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इन वजहों से नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा

अब आगे क्या?

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26 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 26 जुलाई 2017, 08:50 PM IST)
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26 जुलाई 2017 को नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. वह 20 नवंबर 2015 को महागठबंधन (जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस) के नेता के तौर पर मुख्यमंत्री बने थे. नीतीश ने लालू प्रसाद यादव के बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत तमाम परिवारजानों पर लगे भ्रष्टाचार के इल्जामों के चलते इस्तीफा दिया. इस इस्तीफे के बाद आगे क्या होगा. हर कोई पूछ रहा है. हर कोई बता रहा है कि अब बिहार में बीजेपी नीतीश कुमार का समर्थन कर देगी.

भाजपा संसदीय बोर्ड और बिहार में बीजेपी विधायक दल की मीटिंग होने लगी. कभी नीतीश के डिप्टी रहे सुशील मोदी के बयान आने भी शुरू हो गए हैं. मोदी बोले कि नीतीश ने कभी करप्शन से समझौता नहीं किया. उधर बड़े मोदी यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नीतीश को करप्शन के खिलाफ लड़ाई की बधाई दी. कहा कि 125 करोड़ देशवासी उनके साथ हैं.

देश का तो पता नहीं, मगर ये साफ है कि बीजेपी साथ है. वही बीजेपी जिसने जब नरेंद्र मोदी को इलेक्शन कमेटी का चेयरमैन बनाया तो नीतीश की जेडीयू एनडीए से अलग हो गई थी. वही नीतीश जो नरेंद्र मोदी के राज में आने के बाद सत्ता छोड़ जीतनराम मांझी को पकड़ा दिए थे. और वही नीतीश जो नरेंद्र मोदी के पॉलिटिकल डीएनए वाले बयान को बिहार के स्वाभिमान के खिलाफ बता रहे थे. मगर सियासत है. सियार जैसी होती है. सब रंग बदल जाते हैं. अभी के रंग यही हैं. और इसे समझने के लिए नीतीश की इस्तीफे के बाद वाली बातों को गौर से समझना होगा. क्या कहा नीतीश ने.

#1. लालू बोले, संकट में हैं, हमने कहा, आपका लाया हुआ

नीतीश कुमार ने आरजेडी को तरीके से घेरा. सीधे इल्जाम नहीं लगाया, मगर बरी भी नहीं किया. बोले, हमसे कहा गया कि राजनीतिक संकट में हैं, आप साथ रहें. इस पर नीतीश ने तंज कसते हुए कहा कि ये संकट खुद आपका लाया हुआ है. इस पर सफाई दीजिए. जनता बरी करेगी. नीतीश ने साफ किया कि मैंने कभी तेजस्वी यादव का इस्तीफा नहीं मांगा. मैंने सिर्फ इतना कहा कि ये जो इल्जाम लग रहे हैं, उन पर क्लीन होना चाहिए.

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2 नोटबंदी सपोर्ट की तो इल्जाम लगे

बीजेपी के साथ नई दोस्ती की प्रस्तावना रचते हुए नीतीश ने कहा कि हमने नोटबंदी का समर्थन किया तो अपने ही लोगों ने हमला बोला. हमने तब ये भी कहा था कि बेनामी संपत्ति के खिलाफ भी ऐसे ही कानून को लाया जाना चाहिए. नीतीश के मुताबिक जब मैं इस तरह का स्टैंड रखता हूं तो मौजूदा राजीनीति इल्जामों की रौशनी में चुप कैसे रह सकता हूं.

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3 राहुल गांधी की खिल्ली उड़ाई

नीतीश ने खुद को महागठबंधन का आर्किटेक्ट बताने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी रडार पर लिया. नीतीश बोले, दिल्ली में मुलाकात के दौरान मैंने राहुल जी से कहा, आपने तो ऑर्डिनेंस फाड़ा था. अब चुप क्यों हैं.

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4 आगे क्या होगा स्पीकर तय करेंगे

जब पत्रकारों ने पूछा कि आगे की राह क्या, तो नीतीश बोले कि अब स्पीकर विधानसभा का सत्र बुलाएंगे. वहीं तय होगा. स्पीकर हैं जेडीयू के विजय चौधरी. और गवर्नर हैं बीजेपी के नेता रहे केसरी नाथ त्रिपाठी. ऐसे में आगे वही होगा जो नीतीश और मोदी चाहेंगे. जो अभी दो रोज पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के विदाई डिनर में गलबहियां हुए थे.

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5 कुछ कह रहे ये कोप भवन स्टंट है

सियासत में कई बार इस्तीफा सरकार बचाने का सबसे अच्छा तरीका होता है. नेहरू ने कई बार इस्तीफे की धमकी दी. अटल ने भी इस हथियार का खूब इस्तेमाल किया था. कुछ राजनीतिक पंडितों की मानें तो नीतीश भी वैसा ही कर रहे हैं. वह जानते हैं कि बिहार में उनके बिना राजनीतिक गठबंधन बेमानी है. और वह जो बाहर गए तो विपक्षी एकता के नारे भी कमजोर पड़ जाएंगे, जिसके दम पर कांग्रेस देश भर में भाजपा का मुकाबला करना चाहती है. ऐसे में नीतीश का ये दांव कांग्रेस को विवश कर देगा आरजेडी की बांह मरोड़ने के लिए. लालू प्रसाद यादव भी जानते हैं कि नीतीश तो बीजेपी के दम पर सत्ता में आ जाएंगे, उनके लिए कोई और विकल्प नहीं. ऐसे में एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि तेजस्वी यादव पाक साफ आने तक सरकार से अलग हो जाएं.

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हालांकि, ये कहना अब तकनीकी रूप से दुरुस्त नहीं क्योंकि सरकार नीतीश के नेतृत्व में चल रही थी, जो खुद ही पद छोड़ चुके हैं. मगर एक नया फॉर्मुला बन सकता है. जिसके तहत आरजेडी बाहर से सपोर्ट दे. नीतीश को उस सपोर्ट में पेच नजर आएंगे. बाहर से सपोर्ट, जब राजनीती की रोटी में सबको एक ही कोने से कौर तोड़ना है, मुमकिन नहीं ही लगता. ऐसे में ज्यादातर यही मानते हैं कि नीतीश बीजेपी के साथ चले जाएं. सुशासन के नारे के दम पर. भ्रष्टाचार के विरोध के दम पर. ये दम साध लड़ी जा रही लड़ाई है. ये बिहार की लड़ाई है. जहां चाणक्य हुए थे. जिनसे बेहतर राजनीतिक चौसर कोई नहीं जानता था.


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