क्या लोग नेपाल में खपा रहे हैं हजारों करोड़ का काला धन और नकली नोट?
नेपाल के मार्केट से आ रही ऐसी खबर.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. सांकेतिक तस्वीर.
भारत में नोटबंदी. जनता तो परेशान है ही. नेतागण कह रहे हैं कि पाकिस्तान के आतंकवादी ज्यादा परेशान हैं. तो आप थोड़ा सब्र रखिेए. पर इस बंदी से एक और देश परेशान होने वाला है. नेपाल.
नेपाल में इंडियन करेंसी खूब चलती है. तो वहां भी 500 और 1000 के पुराने नोट बहुत बचे हुए हैं. नेपाल के लोग जुगाड़ में थे कि भारत के बैंकों में भीड़ कम हो तो वो भी बदलवाने जाएं.
नेपाल राष्ट्र बैंक ने रिजर्व बैंक को चिट्ठी लिखी कि हमारा तो चेंज करवा दे. आपसी बात है. हम थोड़ी लाइन में लगेंगे. पर रिजर्व बैंक की तरफ से जो जवाब आया वो नेपाल के रंग छुड़ानेवाला था. रिजर्व बैंक ने नोट बदलने से मना कर दिया.
वजह थी कि नेपाल के बैंकों को रिजर्व बैंक ने 3.5 करोड़ रुपये दिये थे. 500 और 1000 के नोट. पर पता चल रहा है कि नेपाल के मार्केट में दस हजार करोड़ रुपये के नोट घूम रहे हैं. रिजर्व बैंक ने पूछा कि ये पैसा कहां से आया बाबू?
अब माना जा रहा है कि दोनों देशों के बड़े-बड़े लोग मिल के इस समस्या के बारे में बात करेंगे.
नेपाल के मार्केट में अगर इतना पैसा आ गया है तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं. या तो नकली नोट का बहुत बड़ा कारोबार चल रहा होगा. जहां पाकिस्तान से नोट आते होंगे. या फिर यहीं पर लोग छाप रहे होंगे. या फिर भारत से बहुत सारे लोगों ने अपना काला धन नेपाल में खपाया होगा.
क्योंकि रिजर्व बैंक थोड़े झूठ बोलेगा कि हमने तो पैसे दिये ही नहीं हैं. एक तो रिजर्व बैंक ऐसे ही परेशान है देश में एटीएम और बैंकों के बाहर की कतार देखकर. अभी तक ये भी पता नहीं चल पा रहा कि कितना काला धन वापस आया है. इससे पहले नेपाल की ये समस्या हो गई है. तो इसके लिए स्टडी करनी पड़ेगी कि मामला कहां से फंसा हुआ है.
अगर ये काले धन या नकली नोट के रूप में बाहर आया तो रिजर्व बैंक की उपलब्धि के रूप में गिना जायेगा ये फैसला. किसी और चीज के रूप में आने की कोई संभावना नहीं है.
पर ये भी कहा जा सकता है कि रिजर्व बैंक बिना नोट बैन किये भी ये पता कर सकती थी. नेपाल पर शिकंजा कसा जाता.

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