नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक के पास पुराने पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों काढेर लग गया है. बता दें कि पूरी इकॉनमी में इन नोटों का शेयर 85 प्रतिशत तक था.इकॉनोमिक टाइम्स की मानें तो ये नोट इतने ज्यादा हैं अगर इन नोटों को एक के बाद एकरखकर लम्बी लाइन बनाई जाए तो इसकी दूरी धरती और चांद की दूरी की पांच गुनी होगी.इन्हें अगर एक के ऊपर एक करके रखा जाए तो माउंट एवेरस्ट से 300 गुनी ज्यादा नोटोंकी ऊंचाई होगी. तो RBI इन नोटों से कैसे छुटकारा पाएगी. पिछले दिनों RBI के एकसोर्स ने बताया था कि इन नोटों को लैंडफिल के काम में लाया जाएगा. इन्हें छोटे-छोटेटुकड़ों में कतरा जाएगा. इनसे पेपरवेट, पैड, प्लाईवुड जैसी चीजें भी बनाई जाएंगी.कुछ रिपोर्टों की मानें तो RBI ने ये काम शुरू भी कर दिया है. केरल के तिरुअनंतपुरममें बैंकों से मिले पुराने नोटों को कतरकर उन्हें कन्नूर की प्लाईवुड फैक्ट्री मेंभेजा जा रहा है. फैक्ट्री इनसे लुगदी बनाकर हार्ड बोर्ड, सॉफ्ट बोर्ड, राइटिंग पैडवगैरह बनाएगी. वेस्टर्न प्लाईवुड के मैनेजिंग डायरेक्टर मइन मोहम्मद ने कहा नोटोंके टुकड़े मिलाने से प्लाईवुड की क्वालिटी बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि RBI ने उनसेसंपर्क किया था. RBI इन नोटों को ट्रांसपोर्ट करने का खर्च खुद उठाती है. एक टनपुराने नोटों के बदले फैक्ट्री RBI को 250 रुपए भी देती है. यहां वीडियो में देखिएपूरी प्रॉसेस- https://www.youtube.com/watch?v=SF804kwHBQg--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशान्त ने की है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें- लोग लाइन में लगे हैं, यहां ब्लैक मनी के नोटों को हवाई यात्रा कराई जारही है जनता लाइन में लगी है और ये 27 लाख के नए नोट लेकर घूम रहे थे नोटबंदी कीचोट से बचने के लिए गोरखपुरिया मजदूरों ने तरीका निकाला तो इस वजह से 500 के नोट कमऔर 2000 के नोट ज्यादा आ रहे हैं जानिए क्यों उर्जित पटेल ने नहीं, नरेंद्र मोदी नेनोट बैन का ऐलान किया