नोटबंदी से परेशान ग्रामीण इलाके की जनता के लिए राहत भरी खबर है. RBI. हिंदुस्तानमें बैंकों का मुखिया. उसने मंगलवार को अपने मातहत बैंकों के लिए नए निर्देश जारीकिए हैं. निर्देश के अनुसार, करेंसी मेन्टेन करने वाले बैंकों को अपनी ग्रामीणशाखाओं, जिला सहकारी बैंकों, व्यावसायिक बैंकों, पोस्ट ऑफिसों और वाइट लेवल ATM मेंप्राथमिकता के आधार पर नोट सप्लाई करने को कहा गया है. कभी स्कूली लेखों में हमलिखा करते थे कि हमारा देश गांवों में बसता है. अगर देश को आगे बढ़ाना है, तो शुरुआतगांवों से करनी होगी. विकास दर बढ़ रही है, मगर गांव पीछे छूट गए हैं. 8 नवंबर, 2016की सांझ. पीएम मोदी अपने कार्यकाल में पहली बार राष्ट्र को संबोधित कर रहे थे. जोजहां था, वहीं चकित-सा खड़ा रह गया. तमाम मुद्दों की भीड़ में से निकले नए शब्द‘नोटबंदी’ ने अपनी जगह बना ली. कुछ दिनों तक तो सब ठीक रहा, फिर परेशानियों कीबरसात आ गई. किसानी. यकीनन गांवों में ही होती है. लगातार खर्च मांगती है. तन-मन-धनका. डिजिटल समझ से कोसों दूर देश के सुदूर इलाकों में ये परेशानी ज्यादा मुखर थी,मगर जाहिर नहीं हो पा रही थी. ऑनलाइन भुगतान को वरीयता देने की बात चल रही है. उससेपहले डिजिटल समझ को विकसित किया जाए, तो ज्यादा बेहतर और प्रभावी होगा. नया सालशुरू हो चुका है. अब ग्रामीण इलाकों की ओर ध्यान दिया गया है. RBI ने बैंकों कोनिर्देश दिया है कि वे 500 और उससे कम मूल्य के नोटों का 40 प्रतिशत ग्रामीण इलाकेमें सप्लाई करें. पोस्ट ऑफिसों में भी इन नोटों की आपूर्ति करने का निर्देश दियागया है.RBI की ये पहल सराहनीय कही जा सकती है, मगर इस देरी का खामियाजा तो लोग भुगत हीचुके हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी अभिषेक ने लिखी है.