अमेरिकन एक्सप्रेस और डाइनर्स क्लब अब भारत में नए कार्ड जारी नहीं कर पाएंगे.भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने 23 अप्रैल को दोनों पर ऐसा करने से प्रतिबंध लगादिया है. ये प्रतिबंध 1 मई से लागू होगा. RBI ने अपने एक बयान में कहा है किअमेरिकन एक्सप्रेस बैंकिंग कॉरपोरेशन और डाइनर्स क्लब को 1 मई से भारत में नएग्राहक जोड़ने से मना किया गया है. डेटा और अन्य जानकारी के रखरखाव से जुड़े नियमोंके उल्लंघन को लेकर ये कार्रवाई की गई है. हालांकि ऐसा करने से पुराने ग्राहकों परकोई असर नहीं होगा. https://twitter.com/rahulshrivstv/status/1385594804696846342RBI ने अपने बयान में कहा है कि अमेरिकन एक्सप्रेस बैंकिंग कॉरपोरेशन और डाइनर्सक्लब इंटरनेशनल लिमिटेड पर 1 मई 2021 से नए ग्राहक जोड़ने पर रोक लगाई जा रही है.ये संस्थान पेमेंट सिस्टम डेटा के स्टोरेज के रखरखाव से जुड़े नियमों का पालन करनेमें असमर्थ रहे हैं. दोनों ही संस्थानों को पेमेंट एंड सेटेलमेंट सिस्टम एक्ट 2007(PSS Act) के तहत देश में कार्ड नेटवर्क ऑपरेट करने की इजाजत दी गई थी. RBI ने कहाकि PSS एक्ट के सेक्शन 17 में RBI को सुपरविजन की शक्ति दी गई है जिसके तहत वह इससुपरवाइजरी एक्शन को ले रहा है. हालांकि RBI ने ये भी साफ कर दिया कि उसके इस फैसलेका इन दोनों बैंकों से जुड़े ग्राहकों पर कोई असर नहीं होगा और वह पहले की तरह बैंककी सेवाओं का इस्तेमाल करते रहेंगे. दैनिक जागरण की एक खबर के मुताबिक RBI के इसआदेश के बाद अमेरिकन एक्सप्रेस ने कहा, "हम आरबीआई के इस कदम से दुखी हैं. हमयथाशीघ्र उनकी चिंताओं को दूर करने के लिये उनके साथ काम कर रहे हैं. इससे भारत मेंहमारे मौजूदा ग्राहकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और हमारे ग्राहक हमारे कार्ड कापहले की तरह उपयोग कर सकते हैं." डेटा को लेकर उठाया कदम अमेरिकन एक्सप्रेस बैंकिंगकॉरपोरेशन और डाइनर्स क्लब इंटरनेशनल लिमिटेड, दोनों ही पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर हैं.दोनों को ही भारत में PSS Act के तहत कार्ड नेटवर्क ऑपरेट करने की इजाजत मिली हुईहै. यानी दोनों ही कंपनियां भारत में क्रेडिट कार्ड जारी कर सकती हैं. 6 अप्रैल2018 को एक सर्कुलर जारी किया गया था जिसमें सभी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स कोनिर्देश दिया गया था कि 6 महीने के भीतर वह सभी डेटा को भारतीय सिस्टम में ही स्टोरकिया जाए. इस डेटा में लेन-देन की डिटेल्स, पेमेंट निर्देश, और अन्य जानकारी होनीचाहिए. साथ ही CERT-In यानी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम के पैनल मेंशामिल ऑडिटरों द्वारा कंडेक्टेड निदेशक मंडल की मंजूरी वाली सिस्टम ऑडिट रिपोर्ट भीजमा करनी थी. दोनों संस्थानों को इस निर्देश का पालन करना था और इस बारे में RBI कोभी बताना था. दोनों ही संस्थान ऐसा करने में असफल रहे जिसकी वजह से RBI को ये फैसलाकरना पड़ा. इंडिया टुडे के संपादक अंशुमान तिवारी ने इस पर कहा, "अप्रैल 2018 मेंडेटा लोकलाइजेशन की एक पॉलिसी आई थी. इसमें कहा गया था कि भारतीयों के डेटा को भारतमें ही सुरक्षित रखा जाएगा. ताकि भारत के रेग्युलेटर्स इसको जरूरत पड़ने पर एक्सेसकर सकें. खास तौर से पेमेंट सिस्टम का डेटा. ये ऑर्डर अमेरिकन एक्सप्रेस और डायनर्सने फॉलो नहीं किया इसलिए RBI ने इन्हें बैन कर दिया है. अब इन दो कंपनियों परकार्रवाई होने के बाद अन्य कंपनियों पर भी कार्रवाई हो सकती है जिन्होंने डेटालोकलाइजेशन का पालन नहीं किया था." "RBI ने इंडीकेशन दे दिया है कि डेटा को लेकर वहगंभीर है. जिन कंपनियों पर कार्रवाई हुई है उनके बहुत अधिक ग्राहक भारत में नहींहैं. करीब 15 लाख से कुछ अधिक ग्राहक अमेरिकन एक्सप्रेस के हैं. और डायनर्स HDFC केसाथ काम करती है. डेटा को लेकर RBI ने पहला ऐसा कदम उठाया है और ये काफी बड़ी बातहै." HDFC पर भी लगाई थी रोक आपको बता दें कि RBI ने मार्च के महीने में HDFC बैंकपर भी नए क्रेडिट कार्ड जारी करने से रोक लगा दी थी. HDFC बैंक में बार-बार डिजिटलकामकाज में आ रही परेशानी के चलते RBI ने ये फैसला किया था. बैंक ने इस बारे मेंशेयर बाजार को बताया था कि पिछले 2 सालों के दौरान डिजिटल कामकाज में कुछ परेशानीआई थी. 21 नवंबर 2020 को भी बैंक के प्राईमरी डेटा सेंटर में बिजली बंद हो गई थीजिसके कारण ग्राहकों को काफी परेशानी हुई थी. दरअसल नवंबर में ही RBI ने HDFC सेसभी डिजिटल लॉन्चिंग और नए क्रेडिट कार्ड रोकने को कहा था. इससे पहले बैंक पर RBIने 10 लाख का जुर्माना भी लगाया था. RBI ने बैंक के IT इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच केलिए एक प्रोफेशनल ऑडिट कंपनी की नियुक्ति की थी. RBI ने बैंक से कहा था किगड़बड़ियों की जांच करें और जवाबदेही तय करें.