कानून और IT मंत्री हैं रविशंकर प्रसाद. ट्विटर पर खूब एक्टिव हैं, इस सरकार केबाकी लोगों की तरह. जो कि बहुत अच्छी बात है. लेकिन इनका 7 जनवरी का एक ट्वीट वायरलहो रहा है. डिजिटल इंडिया का ऐड है. हैशटैग डू यू नो के साथ. हिंदी में इसका मतलबये है कि "क्या आप जानते हैं 1.13 लाख टन फसल का रेट 6.13 लाख करोड़ रुपए किसानोंको मिल चुका है, e-NAM प्लेटफार्म पर. "https://twitter.com/rsprasad/status/817936461429436418 अगर ट्वीट डिलीट हो जाताहै और दौड़कर हमारा गला न पकड़ लो इसके लिए.. e-NAM मतलब e नेशनल एग्रीकल्चरमार्केट. किसानों को उनकी फसल का उचित रेट दिलाने के लिए सरकार का उपक्रम है. साथमें कैशलेस इंडिया का सपना भी संलग्न है. उसके लिए ये ऐड जमकर दिखाया जा रहा है.लेकिन इस ऐड में शायद कुछ 'भूल चूक लेनी देनी' हुई है. नहीं नहीं, गणित की मिस्टेकनहीं है. फैक्चुअल एरर लग रही है. मतलब इस आंकड़े से ये फसल 54 हजार 247 रुपए प्रतिकिलो बिक रही है. पहले इसकी गणित समझ लो. जो हमने देश के टॉप मैथमैटीशियन्स सेनिकलवाई है. मजाक कर रहे हैं यार इतनी गणित तो कोई भी कर सकता है जो बिना ग्रेसमार्क्स के पास हुआ हो. तो लो समझो. 1.13 लाख टन फसल एक टन = एक हजार किलो 1.13 लाख= 113000 1.13 लाख टन = 113000*1000 =11,30,00000 6.13 लाख करोड़ रुपए6130000000000 इस आंकड़े को ऊपर वाले, मतलब 113000000 से भाग कर देंगे, तो निकलकरआएगा 54247.78/Kg. अब सवाल ये है कि कौन से किसान हैं ये और क्या पैदा कर रहे हैंइस शस्यश्यामला भूमि से जो इतना महंगा जा रहा है? और वो डिजिटल पेमेंट करा रहे हैं.केसर का दाम लगभग एक लाख रुपए प्रति किलो है. इतने में आधा किलो आएगा. लेकिन कितनेकिसान केसर पैदा कर रहे हैं? इसके अलावा देश में सबसे महंगा पैदा होने वालाप्रॉडक्ट है अफीम. 8 लाख रुपए किलो. 54 हजार के आस पास तो गांजा आ रहाहै.(एक्सपर्ट्स के मुताबिक. ये न समझो कि हमऊ 'चढ़ाकर' बता रहे हैं.) इस ट्वीट केबाद ये सवाल बार बार पूछा भी जा रहा है रिप्लाई में. देखो रविशंकर प्रसाद कब तकजवाब देते हैं. वैसे ये उनका पीएम को गंगा जैसा पवित्र बताने वाले ट्वीट के बाददूसरा वायरल ट्वीट है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: रविशंकर प्रसाद 'गंगा जैसा पवित्र' इमोशन में बहके तो नहीं कह गए