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रंजीत सिंह मर्डर केस में राम रहीम को उम्र कैद, शक होने पर डेरा मैनेजर को मरवा दिया था

2002 में हुई थी रंजीत सिंह की हत्या.

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राम रहीम को मर्डर केस में उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई है. (फाइल फोटो- India Today)
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अभिषेक त्रिपाठी
18 अक्तूबर 2021 (अपडेटेड: 18 अक्तूबर 2021, 03:48 PM IST)
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डेरा सच्चा सौदा चलाने वाले गुरमीत राम रहीम को हत्या के एक और मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. मामला डेरा के ही मैनेजर रहे रंजीत सिंह की हत्या का है. सोमवार 18 अक्टूबर को सज़ा का ऐलान हुआ. आजतक की खबर के मुताबिक, राम रहीम के अलावा 4 अन्य दोषियों को भी उम्रकैद की सजा मिली है. इनके नाम हैं जसबीर, सबदिल, अवतार और किशन लाल. जसबीर और सबदिल शूटर हैं, जिन पर आर्म्स ऐक्ट का भी केस है. एक और आरोपी था. इंदर सेन. उसकी 2020 में मौत हो गई थी. बाकी सभी आरोपियों को बीती 8 अक्टूबर को IPC की धारा 302 यानी हत्या और 120-B यानी आपराधिक साजिश रचने के लिए दोषी ठहराया गया था. बता दें कि रंजीत सिंह की 2002 में हत्या कर दी गई थी. वो डेरे के ही अनुयायी थे और प्रबंधक के तौर पर काम-काज भी संभाल रहे थे. राम रहीम को शक था कि एक साध्वी के यौन शोषण का सच उजागर करती एक गुमनाम चिट्ठी असल में रंजीत सिंह ने लिखवाई थी. इसी चिट्ठी के आधार पर स्थानीय अख़बार ‘पूरा सच’ में राम रहीम के तमाम कच्चे चिट्ठे छपे थे. इसी के बाद 10 जुलाई 2002 को रंजीत सिंह की गोली मारकर हत्या करवा दी गई थी. साथ ही अख़बार के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की भी राम रहीम ने हत्या करवा दी थी. तमाम सजाएं हैं इससे पहले 2017 में राम रहीम को अपने डेरे की दो शिष्याओं के बलात्कार का दोषी पाया गया था. तब अदालत ने राम रहीम को 10-10 साल सश्रम कैद और 15-15 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी. ये 10-10 साल की कैद अलग-अलग मामलों में थी, जो राम रहीम को अलग-अलग ही काटनी हैं. साथ ही, दोनों मामलों में 15-15 लाख का जुर्माना लगाया गया था. इसके अलावा उसे पत्रकार रामचंद्र की हत्या के मामले में भी 2019 में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी. राम रहीम इस समय रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है. उसने सुनवाई के दौरान अपनी बीमारियों का हवाला देते हुए रहम की मांग की थी. कहा था कि उसे ब्लड प्रेशर, आंख और गुर्दे से जुड़ी समस्याएं हो गई हैं, लिहाजा अदालत दया करे. लेकिन कोर्ट ने उसकी ये याचिका खारिज कर दी. याचिका के विरोध में सीबीआई ने कहा था कि पीड़ित ने राम रहीम को भगवान की तरह समझा, लेकिन उसने अपने अनुयायी के खिलाफ ही आपराधिक साजिश कर उसकी हत्या करवा दी. जांच एजेंसी ने अदालत से कहा था कि गुरमीत का आपराधिक इतिहास रहा है और उसे धारा 302 के तहत अधिकतम सजा दी जाए. अब कोर्ट ने गुरमीत को सारी जिंदगी कैद में रहने की सजा दे दी है.

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