हाथ में सोनिया गांधी की शादी का कार्ड और चेहरे पर उदासी, क्यों?
कांग्रेसी कार्यकर्ता रजनीश पांडे के कलेजे का दर्द.
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फोटो - thelallantop
वो किसी शेर की एक लाइन है. 'नए दोस्त मिलते हैं पुराने छूट जाते हैं.' वैसी ही बात है और कुछ नहीं. रजनीश पांडे के दिन बदल गए हैं. अब कांग्रेस का उनमें इंट्रेस्ट नहीं रहा. नहीं तो जिस आदमी के घर में सोनिया-राजीव गांधी की शादी के न्योते आए हों. कार्ड पर खुद इंदिरा गांधी ने एड्रेस लिखा हो. उसको इंदिरा के जन्मदिन कार्यक्रम में न इनवाइट किया जाए. तो दिल टूटेगा ही न भाईसाब. बुरा तो लगता ही है.
इलाहाबाद के आनंद भवन में इंदिरा की जन्मशती पर बड़ा प्रोग्राम चल रहा था. बाहर रजनीश पांडे गले में तिरंगा अंगौछा डाले इंतजार कर रहे थे. कि उनको भी बुलाया जाएगा. इंदिरा की बहुरिया से मिलेंगे. नाती पोते भी आए होंगे. सबसे घर परिवार गांव जवांर का हाल चाल होगा. लेकिन कुछ नहीं हुआ. अंदर सोनिया, राहुल और प्रियंका बैठे रहे. बाहर पांडे सोनिया की शादी का कार्ड लिए खड़े रहे.
अब इस कार्ड का हाल सुन लो. तुम्हारे पास जितने राशन कार्ड, मार्कशीट, सर्टिफिकेट और आधार कार्ड हैं, उनसे किसी मामले में इसकी वैल्यू कम नहीं है. देश की राजसत्ता से सीधा कनेक्शन दिखाता है. इसीलिए लैमिनेशन कराया हुआ है. 25 फरवरी सन 1968 की तारीख पड़ी है कार्ड पर. नीली कलम से इंदिरा ने कृष्ण कुमार का नाम और पता लिखा है. ये कार्ड रजनीश के दादा कृष्ण कुमार के पास आया था. लेकिन वक्त वक्त की बात है. वो साल दूसरा था ये साल दूसरा है.
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