पड़ताल: क्या राजनाथ सिंह ने बंगला छोड़ते वक्त उसे बर्बाद कर दिया?
क्या है इन तस्वीरों की सच्चाई और क्या हुआ राजनाथ सिंह के बंगले में...
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पहले अखिलेश यादव पर इल्जाम लगा. कि उन्होंने सरकारी बंगला खाली करते समय वहां तोड़-फोड़ की. टाइल्स तक उखाड़कर ले गए. अब समाजवादी पार्टी के कई नेता राजनाथ सिंह पर इल्जाम लगा रहे हैं. कि उन्होंने भी बंगला खाली करते समय उसे खंडहर बना दिया और चलते बने. बाईं तरफ जो तस्वीर है, ये भी राजनाथ सिंह के उस बंगले की ही बताई जा रही है. मतलब सोशल मीडिया पर घुमाई जा रही है.
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इस वक्त फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सऐप पर कई सपा नेता-समर्थक और भाजपा विरोधी एक बात शेयर करते दिख रहे हैं:

अखिलेश यादव पर इल्जाम है कि उन्होंने बंगला खाली किया, तो अपने साथ बंगले का खूब सारा सामान भी लेते गए.
क्या मामला है? खबर आई कि अखिलेश ने बंगला तो खाली किया, लेकिन वहां लगे टाइल्स भी उखाड़ ले गए. AC भी लेते गए. कुछ लोगों ने कहा कि अखिलेश अपना लगवाया सामान ले गए. लेकिन बंगले में तोड़-फोड़ का क्या? जब ये बातें आईं, तो समाजवादी पार्टी के नेता-प्रवक्ता अपने लीडर को बचाने दौड़े. प्रीति चौबे भी समाजवादी पार्टी की हैं. पार्टी की राष्ट्रीय सचिव हैं. पार्टी की यूथ विंग भी संभालती हैं. पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी हैं. एक जमाने में पत्रकार रह चुकी हैं. ट्विटर पर इनका वैरिफाइड अकाउंट है. इसके कवर फोटो में उन्होंने अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल यादव के साथ अपनी फोटो लगाई हुई है. इन्हीं प्रीति चौबे ने एक ट्वीट किया. अखिलेश यादव का बचाव करते हुए उन्होंने राजनाथ सिंह पर सरकारी बंगले को खंडहर बनाने का इल्जाम लगाया.

ये 123RF की फोटो है. हम इसका इस्तेमाल बस इस पड़ताल की असलियत दिखाने के लिए कर रहे हैं.
पहली फोटो- इसके ऊपर 123RF का वॉटरमार्क दिखेगा आपको. ये एक एजेंसी है. 2005 में शुरू हुई थी. कंपनी का कहना है कि वो दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल स्टॉक एजेंसी है. ऐपल, गूगल, ऐमजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी कंपनियां भी इससे तस्वीरें खरीदती हैं. आप इस तस्वीर को रिवर्स सर्च करते हैं, तो आप कंपनी की वेबसाइट के इस लिंक पर पहुंचते हैं. यहां आपको फोटो दिखती है. इसका कैप्शन है- एक तहस-नहस हो चुके घर का इंटिरियर. आप इसे यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं.

ये रॉयटर्स की फोटो है. मगर राजनाथ सिंह से जुड़े किसी कीवर्ड में ये तस्वीर फीचर नहीं होती. मतलब इसका राजनाथ सिंह से कोई ताल्लुक नहीं है.
दूसरी फोटो- ये रॉयटर्स की फोटो है. फोटो के नीचे एजेंसी का नाम लिखा है. हमारे पास रॉयटर्स का सब्सक्रिप्शन है. हमने रॉयटर्स पर चेक किया. Rajnath Singh house, Rajnath Singh Home, Rajnath Singh Bungalow. सब ट्राय किया. लेकिन हमें वो फोटो नहीं मिली. अगर ये राजनाथ सिंह के बंगले की फोटो होती, तो रॉयटर्स इन सब कीवर्ड्स से वो फोटो खोज ही देता.

ये depositphotos की तस्वीर है. आपको फोटो के ऊपर वॉटरमार्क साफ नजर आ रहा होगा.
तीसरी फोटो- इसके ऊपर depositphotos का वॉटरमार्क है. इसकी वेबसाइट पर ये तस्वीर मिली. ये 19 मार्च, 2014 की फोटो है. इसके ऊपर जो कैप्शन लिखा है, उसका मतलब है- एक तहस नहस हो चुके पुराने घर का गलियारा. आप इसे यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं.

ये dreamstime की फोटो है. ये एक अमेरिकी एजेंसी है. फोटो आज की नहीं, अक्टूबर 2012 की है.
चौथी फोटो- इसके ऊपर dreamstime का वॉटरमार्क है. ये एक अमेरिकी एजेंसी है. हमें ड्रीम्सटाइम पर ये तस्वीर मिल गई. फोटो लेने की तारीख 23 अक्टूबर, 2012 बताई गई है. कैप्शन में लिखा है- तबाह हो चुकी पुरानी रसोई, खाली पड़े घर का इंटीरियर. आप इसे यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं.
प्रीति चौबे ने अपना होमवर्क ठीक से नहीं किया अब समझे, हमने क्यों कहा कि प्रीति चौबे ने इल्जाम लगाने में गंभीरता क्यों नहीं दिखाई. क्योंकि उन्होंने सबूत के तौर पर जो तस्वीरें दी हैं, वो गलत हैं. कहीं और की हैं. ये तस्वीरें इस्तेमाल करने वाली वो अकेली नहीं हैं. और भी कुछ लोग मिले, जो इन तस्वीरों के सहारे राजनाथ सिंह पर इल्जाम लगा रहे हैं. ऐसे कुछ ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट नीचे देख लीजिए.

ये भी शायद समाजवादी पार्टी के ही नेता हैं. अकाउंट वैरिफाइड नहीं है मगर इनका.

सबने एक सी तस्वीरें इस्तेमाल की हैं.

एक और ट्वीट का स्क्रीनशॉट.
ये फोटो भले फर्जी हों, मगर राजनाथ सिंह पर इल्जाम यहीं खत्म नहीं होता है प्रीति और बाकी वो सारे लोग, जो ऊपर पोस्टमॉर्टम की गई तस्वीरें लगाकर राजनाथ सिंह पर इल्जाम लगा रहे हैं, गलत हैं. क्योंकि ये तस्वीरें राजनाथ के बंगले की नहीं हैं. फर्जी हैं. मगर इसका मतलब ये नहीं कि राजनाथ सिंह पर लगे इल्जाम खारिज हो गए. 10 जून, 2018. हमें इस तारीख को निकला नवभारत टाइम्स दिखा. लखनऊ अडिशन. ये अखिलेश यादव के सरकारी बंगले में हुई तोड़फोड़ की खबर है. इसी में राजनाथ सिंह का भी जिक्र है. लिखा है-
ये 10 जून, 2018 को नवभारत टाइम्स के लखनऊ अडिशन के फ्रंट पेज का स्क्रीनशॉट है.
यानी राजनाथ सिंह पर लग रहे इल्जाम बस उस फर्जी फोटो तक सीमित नहीं थे. हालांकि राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश शुक्ला ने बताया है कि विभाग ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के खाली बंगलों का मुआयना किया है. इनमें केवल पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विक्रमादित्य मार्ग वाले बंगले में टूट-फूट मिली है.
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राजनाथ सिंह ने जब अपना सरकारी बंगला खाली किया, तो उसको खंडहर बनाकर चले गए.उत्तर प्रदेश में पहले बंगला-बंगला चला. अब उस बंगले पर आरोप-आरोप चल रहा है. बहुत टरकाने के बाद आखिरकार UP में पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपना-अपना सरकारी बंगला छोड़ना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मजबूरी थी. और बेइज्जत होने का खतरा था. फिर जब बंगला खाली हुआ, तो भी तमाशा खत्म नहीं हुआ. पार्टियां एक-दूसरे पर 'चिंदीचोरी' का इल्जाम लगा रही हैं. पहले मायावती का नाम आया. कि वो कांशीराम के बहाने कम से कम एक बंगला तो अपने पास बचाना ही चाहती हैं. इसके लिए उन्होंने धमकी तक दे डाली. कि मैं यहां से चली गई, तो समर्थक भड़क जाएंगे. फिर देख लीजिएगा. इसके बाद अखिलेश यादव का नाम आया. और फिर राजनाथ सिंह का.

अखिलेश यादव पर इल्जाम है कि उन्होंने बंगला खाली किया, तो अपने साथ बंगले का खूब सारा सामान भी लेते गए.
क्या मामला है? खबर आई कि अखिलेश ने बंगला तो खाली किया, लेकिन वहां लगे टाइल्स भी उखाड़ ले गए. AC भी लेते गए. कुछ लोगों ने कहा कि अखिलेश अपना लगवाया सामान ले गए. लेकिन बंगले में तोड़-फोड़ का क्या? जब ये बातें आईं, तो समाजवादी पार्टी के नेता-प्रवक्ता अपने लीडर को बचाने दौड़े. प्रीति चौबे भी समाजवादी पार्टी की हैं. पार्टी की राष्ट्रीय सचिव हैं. पार्टी की यूथ विंग भी संभालती हैं. पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी हैं. एक जमाने में पत्रकार रह चुकी हैं. ट्विटर पर इनका वैरिफाइड अकाउंट है. इसके कवर फोटो में उन्होंने अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल यादव के साथ अपनी फोटो लगाई हुई है. इन्हीं प्रीति चौबे ने एक ट्वीट किया. अखिलेश यादव का बचाव करते हुए उन्होंने राजनाथ सिंह पर सरकारी बंगले को खंडहर बनाने का इल्जाम लगाया.
राजनाथ सिंह पर इल्जाम ये है कि... प्रीति बस इल्जाम लगाकर नहीं रह गईं. उन्होंने सबूत दिए. यानी, कुछ तस्वीरें. जो उनके मुताबिक, राजनाथ सिंह के बंगले की हैं. उन्होंने ट्वीट किया:कभी मैं धौलपुर, कभी मैसूर और न जाने कहां-कहां न गया... जब भी एक जगह से दूसरी जगह गये कुछ नया पाया, कुछ नया सीखा... अब एक बार और सही... हमारी देश की संस्कृति भी तो यही कहती है... चलते रहो-चलते रहो... pic.twitter.com/OhoJNk9Ur5
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) June 2, 2018
सच क्या है? हमने प्रीति चौबे की शिकायत दूर की. मीडिया, यानी हमने उनके आरोपों को दिखाने का फैसला किया. तस्वीरें तो बोलती हैं. सो प्रीति चौबे ने अपने ट्वीट में जो तस्वीरें लगाई हैं, उन्होंने हमसे बात की. तस्वीरों से क्या पता चला? ये कि ये फर्जी फोटो हैं. प्रीति चौबे ने इल्जाम गंभीरता से नहीं लगाए हैं. उन्होंने कुछ खंडहरनुमा कमरों की तस्वीरों को राजनाथ सिंह का बंगला बताकर पोस्ट कर दिया. प्रीति के ट्वीट में चार तस्वीरें हैं. तीन पर वॉटरमार्क है और एक फोटो न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की है. वॉटरमार्क को मुहर समझ लीजिए. कि फलां तस्वीर पर फलां की मिल्कियत है. ये ही तस्वीरें प्रीति के लगाए इल्जामों की चुगली कर रही हैं. चारों तस्वीरों का बारी-बारी से पोस्टमॉर्टम करते हैं.स्वतंत्र देव सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी पर आरोप लगाए हैं, ये लोग आलीशान जीवन जीते थे और बंगले में लगे Ac,टाइल्स बंगले में 100 करोड़ रुपये लगाए हैं,और उखाड़ कर ले गए!आप श्री राजनाथ सिंह जी का बंगला देखिये,आख़िर मीडिया इसे क्यों नहीं दिखाती,ये क्यों खंडर बना गए! pic.twitter.com/2qMfD9kb6X
— Preeti Chobey (@preeti_chobey) June 10, 2018

ये 123RF की फोटो है. हम इसका इस्तेमाल बस इस पड़ताल की असलियत दिखाने के लिए कर रहे हैं.
पहली फोटो- इसके ऊपर 123RF का वॉटरमार्क दिखेगा आपको. ये एक एजेंसी है. 2005 में शुरू हुई थी. कंपनी का कहना है कि वो दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल स्टॉक एजेंसी है. ऐपल, गूगल, ऐमजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी कंपनियां भी इससे तस्वीरें खरीदती हैं. आप इस तस्वीर को रिवर्स सर्च करते हैं, तो आप कंपनी की वेबसाइट के इस लिंक पर पहुंचते हैं. यहां आपको फोटो दिखती है. इसका कैप्शन है- एक तहस-नहस हो चुके घर का इंटिरियर. आप इसे यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं.

ये रॉयटर्स की फोटो है. मगर राजनाथ सिंह से जुड़े किसी कीवर्ड में ये तस्वीर फीचर नहीं होती. मतलब इसका राजनाथ सिंह से कोई ताल्लुक नहीं है.
दूसरी फोटो- ये रॉयटर्स की फोटो है. फोटो के नीचे एजेंसी का नाम लिखा है. हमारे पास रॉयटर्स का सब्सक्रिप्शन है. हमने रॉयटर्स पर चेक किया. Rajnath Singh house, Rajnath Singh Home, Rajnath Singh Bungalow. सब ट्राय किया. लेकिन हमें वो फोटो नहीं मिली. अगर ये राजनाथ सिंह के बंगले की फोटो होती, तो रॉयटर्स इन सब कीवर्ड्स से वो फोटो खोज ही देता.

ये depositphotos की तस्वीर है. आपको फोटो के ऊपर वॉटरमार्क साफ नजर आ रहा होगा.
तीसरी फोटो- इसके ऊपर depositphotos का वॉटरमार्क है. इसकी वेबसाइट पर ये तस्वीर मिली. ये 19 मार्च, 2014 की फोटो है. इसके ऊपर जो कैप्शन लिखा है, उसका मतलब है- एक तहस नहस हो चुके पुराने घर का गलियारा. आप इसे यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं.

ये dreamstime की फोटो है. ये एक अमेरिकी एजेंसी है. फोटो आज की नहीं, अक्टूबर 2012 की है.
चौथी फोटो- इसके ऊपर dreamstime का वॉटरमार्क है. ये एक अमेरिकी एजेंसी है. हमें ड्रीम्सटाइम पर ये तस्वीर मिल गई. फोटो लेने की तारीख 23 अक्टूबर, 2012 बताई गई है. कैप्शन में लिखा है- तबाह हो चुकी पुरानी रसोई, खाली पड़े घर का इंटीरियर. आप इसे यहां पर क्लिक करके देख सकते हैं.
प्रीति चौबे ने अपना होमवर्क ठीक से नहीं किया अब समझे, हमने क्यों कहा कि प्रीति चौबे ने इल्जाम लगाने में गंभीरता क्यों नहीं दिखाई. क्योंकि उन्होंने सबूत के तौर पर जो तस्वीरें दी हैं, वो गलत हैं. कहीं और की हैं. ये तस्वीरें इस्तेमाल करने वाली वो अकेली नहीं हैं. और भी कुछ लोग मिले, जो इन तस्वीरों के सहारे राजनाथ सिंह पर इल्जाम लगा रहे हैं. ऐसे कुछ ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट नीचे देख लीजिए.

ये भी शायद समाजवादी पार्टी के ही नेता हैं. अकाउंट वैरिफाइड नहीं है मगर इनका.

सबने एक सी तस्वीरें इस्तेमाल की हैं.

एक और ट्वीट का स्क्रीनशॉट.
ये फोटो भले फर्जी हों, मगर राजनाथ सिंह पर इल्जाम यहीं खत्म नहीं होता है प्रीति और बाकी वो सारे लोग, जो ऊपर पोस्टमॉर्टम की गई तस्वीरें लगाकर राजनाथ सिंह पर इल्जाम लगा रहे हैं, गलत हैं. क्योंकि ये तस्वीरें राजनाथ के बंगले की नहीं हैं. फर्जी हैं. मगर इसका मतलब ये नहीं कि राजनाथ सिंह पर लगे इल्जाम खारिज हो गए. 10 जून, 2018. हमें इस तारीख को निकला नवभारत टाइम्स दिखा. लखनऊ अडिशन. ये अखिलेश यादव के सरकारी बंगले में हुई तोड़फोड़ की खबर है. इसी में राजनाथ सिंह का भी जिक्र है. लिखा है-
यह बंगला सबसे पहले खाली हो गया था. इसमें भी कुछ हिस्से में तोड़फोड़ की शिकायतें आई थीं. एसी गायब होने के साथ ही कुछ हिस्से की वायरिंग गायब मिली थी. टिन शेड हटाया गया था.

ये 10 जून, 2018 को नवभारत टाइम्स के लखनऊ अडिशन के फ्रंट पेज का स्क्रीनशॉट है.
यानी राजनाथ सिंह पर लग रहे इल्जाम बस उस फर्जी फोटो तक सीमित नहीं थे. हालांकि राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश शुक्ला ने बताया है कि विभाग ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के खाली बंगलों का मुआयना किया है. इनमें केवल पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विक्रमादित्य मार्ग वाले बंगले में टूट-फूट मिली है.
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