The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • rajasthan kota north mla shanti kumar dhariwal inappropriate language in assembly

राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस MLA ने दी सड़कछाप गालियां, स्पीकर को भी धमका दिया

जब धारीवाल सदन में बोल रहे थे, तब ख़ुद सभापति संदीप शर्मा पीठासीन थे. समय को लेकर जिरह और तर्क से बात बढ़ी और बिगड़ गई. धारीवाल ने सभापति को धमकी तक दे डाली.

Advertisement
shanti dhariwal
सदन का वीडियो वायरल है. (फ़ोटो - सोशल)
pic
सोम शेखर
26 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 12:03 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

शुक्रवार, 26 जुलाई को राजस्थान विधानसभा में बजट पर बहस चल रही थी. प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोटा उत्तर से विधायक शांति कुमार धारीवाल ने कथित तौर पर असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल किया. स्पीकर को धमकी भी दे डाली.

ऐसा हुआ कैसे?

सदन में बहस चल रही थी. मौजूदा हाउसिंग ऐंड अर्बन अफ़ेयर्स (UDH) मंत्री झाबर सिंह खर्रा और पूर्व UDH मंत्री शांति धारीवाल में 'लैंड फ़ॉर लैंड' मामले को लेकर तीखी बहस हो गई. झाबर सिंह खर्रा ने धारीवाल पर आरोप लगाया कि लैंड फॉर लैंड की फाइलें गायब हो गईं. 

जब धारीवाल सदन में बोल रहे थे, तब ख़ुद सभापति संदीप शर्मा पीठासीन थे. उन्होंने समय की दुहाई दी और कहा कि शांति धारीवाल अपना वक्तव्य ख़त्म करें. अलिखित नियम का पालन करते हुए धारीवाल ने पांच मिनट और मांगे. सभापति ने कहा कि ये मुमकिन नहीं होगा, क्योंकि कुल 65 वक्ता हैं. धारीवाल बोले कि कितने भी हों, पांच मिनट और.

ये भी पढ़ें - कांग्रेस की राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम सदन के भीतर बेहोश हुईं

न्यूज़ 18 की एक ख़बर के मुताबिक़, इसी बीच धारीवाल ने आसन को गाली दी और कहा,

Image embed

फ्लो-फ्लो में उन्होंने गाली भी दे डाली. एक नहीं दो. बता भी नहीं सकते. दरअसल, सभापति संदीप शर्मा भी कोटा दक्षिण से ही विधायक हैं. 

विधानसभा में अपशब्दों के इस्तेमाल के लिए कांग्रेस विधायक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उनकी भाषी और बर्ताव की आलोचना हो रही है. हालांकि, बाद में शांति धारीवाल और सभापति संदीप शर्मा आपस में मुस्कुराते हुए बात करते नज़र आए.  

ये भी पढ़ें - घर में एक सांप दिखा था, खोजा तो पाइप से 11 कोबरा निकले

आचार व संसदीय शिष्टाचार के नियमों के मुताबिक़, सदन सदस्यों के कदाचार या अवमानना ​​के मामले में पीठ उन्हें सज़ा दे सकती है. चेतावनी, फटकार, निष्कासन, सदन से निलंबन और कारावास तक, विवेकानुसार कुछ भी.

वीडियो: नेता नगरी: योगी आदित्यनाथ बनाम केशव प्रसाद मौर्य के पीछे कौन? मोदी-शाह से मीटिंग के बाद अब क्या होने वाला है?

Advertisement

Advertisement

()