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राजबल्लभ यादव, लालू की पार्टी का विधायक जिसे कोर्ट ने रेप केस में उम्रकैद की सजा दी है

जिसके भाई की वजह से लालू यादव पहली बार मुख्यमंत्री बन पाए थे.

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21 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 21 दिसंबर 2018, 10:09 AM IST)
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कोर्ट ने राजबल्लभ यादव को नाबालिग से रेप का दोषी पाया है.
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राजबल्लभ यादव. नवादा से विधायक हैं. फिलहाल जेल में हैं. और अब तमाम उम्र वो जेल में ही रहेंगे. वजह ये है कि 15 दिसंबर को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष जज परशुराम सिंह यादव ने राजबल्लभ यादव को एक नाबालिग लड़की से रेप के मामले में दोषी करार दिया था और 21 दिसंबर को कोर्ट ने राजबल्लभ यादव को उम्रकैद की सजा दी है.  इसके अलावा कोर्ट ने इस मामले में पांच और लोगों को दोषी करार दिया है और सभी को सजा सुनाई है.
क्या था मामला?

राजबल्लभ यादव को रेप का दोषी पाया गया है.

पटना के बिहारशरीफ नगर इलाके में 15 साल की एक लड़की किराए के मकान में पढ़ाई कर रही थी. वो नालंदा जिले के रहुई इलाके के सुल्तानपुर की रहने वाली थी. 6 फरवरी, 2016 को बिहारशरीफ के ही धनेश्वर घाट की रहने वाली सुलेखा और उसकी मां नाबालिग लड़की के कमरे पर पहुंचीं. वहां मां-बेटी ने नाबालिग लड़की से एक बर्थडे पार्टी में चलने को कहा. लड़की तैयार हो गई तो सुलेखा और उसकी मां लड़की को लेकर नवादा के विधायक राजबल्लभ के नवादा के पथरा इंग्लिश स्थित चारमंजिला मकान में लेकर चली गईं. वहां राजबल्लभ ने लड़की के साथ रेप किया. 7 फरवरी को सुलेखा ने लड़की को 30,000 रुपये दिए और लड़की को बिहारशरीफ में उसके घर छोड़ दिया गया और मुंह बंद रखने की धमकी दी गई. लेकिन लड़की ने बहादुरी दिखाई और 9 फरवरी, 2016 को बिहारशरीफ महिला थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी.15 फरवरी, 2016 को व्यवहार न्यायालय ने विधायक राजबल्लभ प्रसाद के खिलाफ सर्च वारंट जारी कर दिया. राजबल्लभ यादव फरार हो गए. 23 दिनों तक फरार रहने के बाद 10 मार्च, 2016 को राजबल्लभ यादव एक पुरानी मारुती कार से अचानक बिहारशरीफ की एडीजे फर्स्ट रश्मि रेखा की कोर्ट में पहुंचे और सरेंडर कर दिया. पुलिस को भी इसकी भनक लगी थी कि राजबल्लभ यादव सरेंडर करने वाला है, लेकिन गिरफ्तारी से पहले राजबल्लभ यादव ने सरेंडर कर दिया.
हाई कोर्ट से जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने रद कर दी
पटना हाई कोर्ट ने राजबल्लभ को जमानत दे दी थी.
पटना हाई कोर्ट ने राजबल्लभ को जमानत दे दी थी.

पटना हाई कोर्ट ने राजबल्लभ यादव को 20 सितंबर को इस मामले में जमानत दे दी. जमानत के खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए राजबल्लभ यादव की जमानत खारिज कर दी, जिसके बाद राजबल्लभ को सरेंडर करना पड़ा.
केस दर्ज करवाने के बाद लड़ती रही नाबालिग लड़की
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कहा जाता है कि विधायक राजबल्लभ ने लड़की के भाई से भी रेप किया था.

नाबालिग लड़की ने 9 फरवरी, 2016 को केस दर्ज करवाया था. नवादा पुलिस अगले ही दिन यानी कि 10 फरवरी, 2016 को लड़की को लेकर नवादा के उस मकान पर पहुंची, जहां रेप हुआ था. इसके बाद 13 फरवरी को नाबालिग लड़की को नवादा की इंस्पेक्टर मृदुला ने लालू यादव और राजबल्लभ की एक साथ फोटो दिखाई. लड़की ने फोटो देखकर विधायक राजबल्लभ की शिनाख्त की. शिनाख्त के बाद डीआईजी शालीन ने विधायक राजबल्लभ की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए. अगले ही दिन फरेंसिक टीम जांच के लिए नवादा वाले घर पहुंची और जांच की. 15 फरवरी को राष्ट्रीय जनता दल ने अपने विधायक राजबल्लभ को पार्टी से निलंबित कर दिया. उसी दिन पुलिस ने विधायक के पास लड़की पहुंचाने वाले सुलेखा के पति अरुण को गिरफ्तार कर लिया. 19 फरवरी को सुलेखा के दामाद संदीप को हिरासत में ले लिया गया. वहीं कोर्ट ने राजबल्लभ की जमानत अर्जी खारिज़ कर दी. 25 फरवरी को नवादा पुलिस ने सुलेखा के साथ चार और लोगों को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में सुलेखा ने मान लिया कि लड़की उसी ने पहुंचाई थी. इसके बाद 28 फरवरी को राजबल्लभ के पटना और नवादा वाले घर की कुर्की कर ली गई. 10 मार्च को विधायक ने सरेंडर कर दिया और एक महीने से थोड़े से ज्यादा वक्त में 20 अप्रैल को पुलिस ने चार्जशीट पेश कर दी.
सुप्रीम कोर्ट ने केस को स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने केस को स्पेशल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था.

15 सितंबर, 2016 को बिहारशरीफ कोर्ट में गवाही शुरू हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश और एमपी-एमएलए कोर्ट बनने के बाद इस मामले से संबंधित सभी रेकॉर्ड पटना की विशेष अदालत में ट्रांसफर कर दिए जाए. केस ट्रांसफर होने और सुनवाई शुरू होने के करीब ढाई साल के बाद 4 दिसंबर, 2018 को कोर्ट ने अभियोजन के 22 और बचाव पक्ष के 15 गवाहों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. 15 दिसंबर, 2018 को कोर्ट ने राजबल्लभ के साथ ही छोटी देवी, सुलेखा देवी, संदीप सुमन उर्फ पुष्पांजय, राधा देवी और टूसी देवी को दोषी करार दिया है. कोर्ट ने राजबल्लभ यादव को आईपीसी की धारा 376 और पाक्सो ऐक्ट की धारा 4 और 8 के तहत दोषी करार दिया है. वहीं सुलेखा और राधा को आपराधिक षड्यंत्र रचने के लिए आईपीसी की धारा 109, 120बी और 376 के साथ ही इममोरल ट्रैफिक ऐक्ट के तहत धारा 4 और 5 के अलावा पाक्सो ऐक्ट की धारा 4 और 8 के तहत दोषी करार दिया है. संदीप सुमन ऊर्फ पुष्पांजय, छोटी देवी और टूसी को आपराधिक षड्यंत्र रचने के लिए आईपीसी की धारा 366 ए तहत और अनैतिक देह व्यापार की धारा 4 और 5 के तहत दोषी करार दिया गया है. अब कोर्ट ने 21 दिसंबर को राजबल्लभ यादव को उम्रकैद की सजा दी है.
बड़ी बहन से भी किया था रेप
नवादा के वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि राजबल्लभ पर लड़की की बड़ी बहन से भी रेप का आरोप लगा था. उस वक्त भी सुलेखा ही लड़की की बहन को राजबल्लभ के पास लेकर गई थी और इसके एवज में सुलेखा को 1 लाख रुपये मिले थे.
पहले विधायक, जिन्हें दोषी करार दिया गया
राजबल्लभ प्रसाद बिहार के पहले ऐसे विधायक हैं, जिन्हें पद पर रहते हुए दोषी करार दिया गया है. इससे पहले 90 के दशक में विधायक रहते हुए योगेंद्र सरकार पर रेप का आरोप लगा था. लेकिन जब तक सजा सुनाई जाती, वो विधायक से पूर्व विधायक हो गए थे. इस तरह से राजबल्लभ पहले ऐसे विधायक हो गए, जिन्हें पद पर रहते हुए दोषी करार दिया गया है.
कौन हैं राजबल्लभ यादव?

राजबल्लभ यादव के भाई की वजह से लालू यादव पहली बार मुख्यमंत्री बने थे.

अब बात राजबल्लभ यादव की. 1990 में बिहार में विधानसभा के चुनाव हुए थे. कुल 324 सीटों में से जनता दल को 122 सीटें मिली थीं. प्रधानमंत्री वीपी सिंह रामसुंदर दास को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे और चंद्रशेखर रघुनाथ झा को. गतिरोध को तोड़ने के लिए उपप्रधानमंत्री देवीलाल ने लालू प्रसाद यादव का नाम सुझाया और फिर नाम पर सहमति बन गई. लेकिन पेच फंस गया. पेच ये कि तमाम सहमतियों के बाद भी जनता दल को बहुमत जुटाने के लिए 10 सीटें कम पड़ रही थीं. ऐसे में बीजेपी के पास 39 विधायक थे. एक नाम था कृष्णा यादव का. कृष्णा यादव ने पार्टी में टूट कर ली और 10 विधायकों के साथ जनता दल में शामिल हो गए. कृष्णा यादव की बदौलत लालू यादव की सरकार बन गई. राजबल्लभ यादव इसी कृष्णा यादव के छोटे भाई हैं.
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लालू यादव 1990 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने. उस वक्त राजबल्लभ यादव के भाई कृष्णा यादव 10 विधायकों के साथ पार्टी में शामिल हो गए थे.

कृष्णा यादव नवादा जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के इंग्लिश पथरिया गांव के रहने वाले थे. उनके पिता जेएल प्रसाद कांग्रेस के नेता था और कांग्रेस से जिला परिषद अध्यक्ष बने थे. विधायकी का चुनाव हार गए थे. लेकिन बीजेपी के आने के बाद उनके बेटे कृष्णा प्रसाद बीजेपी से विधायक बन गए. बीजेपी से जनता दल में जाने के बाद कृष्णा प्रसाद को लालू यादव का अच्छा खासा सपोर्ट मिला. नवादा के एक वरिष्ठ पत्रकार उस वक्त को याद करते हुए बताते हैं कि कृष्णा प्रसाद विधायकी करते रहे. उनके एक भाई मुखिया बन गए और एक भाई राजबल्लभ घर पर रहने लगे. कहा जाता है कि राजनैतिक संरक्षण मिला तो राजबल्लभ ने अपने घर के पास पत्थर के पहाड़ से अवैध तरीके से पत्थर बेचने शुरू कर दिए. इससे उन्होंने करोड़ों रुपये कमाए. अभी कृष्णा प्रसाद विधायकी का एक टर्म भी पूरा नहीं कर सके कि एक सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई. इसके बाद लालू ने कृष्णा की पत्नी को एमएलसी बना दिया, लेकिन राजबल्लभ को विधानसभा का टिकट नहीं दिया. ऐसे में राजबल्लभ निर्दलीय ही चुनावी मैदान में उतर गए. आयोग की ओर से छाता चुनाव चिह्न मिला और जीत गए. 1995 के विधानसभा चुनाव में लालू ने राजबल्लभ को नवादा से टिकट दिया और राजबल्लभ जीत गए. फिर लालू ने उनको मंत्री भी बना दिया.

2005 में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने तो उस चुनाव में राजबल्लभ को हार मिली.

2005 में जब लालू यादव की सत्ता गई तो राजबल्लभ भी चुनाव हार गए. नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने नवादा के पहाड़ का लीज एग्रीमेंट कर दिया. पत्थर निकालने के लिए चड्ढा एंड चड्ढा कंपनी ने लीज ली और काम शुरू किया. लेकिन राजबल्लभ पत्थर लेकर निकल रही गाड़ियों से पैसे वसूलते रहे. नतीजा ये हुआ कि चड्ढा एंड चड्ढा कंपनी ने लीज छोड़ दी. वहीं 2010 का चुनाव भी राजबल्लभ हार गए थे. जीत मिली थी पूर्णिमा यादव को, जो जेडीयू से चुनाव लड़ी थीं. 2015 में राजबल्लभ फिर से चुनाव जीतकर विधायक बन गए. 2016 में रेप केस दर्ज हुआ और 2018 में कोर्ट ने उसको रेप का दोषी पाया है.

(इस स्टोरी के लिए नवादा के पत्रकार विजय भान सिंह ने इनपुट मुहैया करवाए हैं.)

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