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12 रुपये में भर पेट खाने वाले राज बब्बर यूपी कांग्रेस के प्रेसिडेंट बने

इंदिरा गांधी के राज में बैन होने वाली फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' में किरदार निभा चुके राज बब्बर पर यूपी जीतने की जिम्मेदारी.

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12 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 12 जुलाई 2016, 04:28 PM IST)
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राजबब्बर ने जोरशोर से प्रचार किया था अटल के खिलाफ मगर वो हारे थे.
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इंदिरा गांधी के राज में बैन होने वाली फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' में किरदार निभा चुके राज बब्बर को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश का पार्टी प्रेसिडेंट बना दिया है. प्रशांत किशोर को काम में लगाने के बाद कांग्रेस का ये नया पैंतरा है. प्रियंका गांधी के राजनीति के दंगल में आने की तमाम अफवाहें उड़ रही थीं. ऐसे में निर्मल खत्री को हटाकर बब्बर को लाया जाना सबको चकित कर गया. राज बब्बर उत्तर प्रदेश के ही 'मूल निवासी' हैं. लोकसभा और राज्यसभा दोनों में रह चुके हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को हराया था. पर 2014 के चुनाव में जनरल वी के सिंह से हार गए. अभी उत्तराखंड से राज्यसभा में हैं. यूपी कांग्रेस प्रेसिडेंट पद से हटाये गए निर्मल खत्री वही हैं जिन्होंने एक महीने पहले पार्टी की खटिया खड़ी कर दी थी. आरोप था कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के पोस्टरों पर नरेन्द्र मोदी के चेहरे पर कालिख मल दी थी. निर्मल ने कहा था कि ठीक ही किया है. बुरा तो नहीं किया. एक तरफ कांग्रेस पार्टी ऐसे ही GST जैसे मुद्दों को लेकर घिरी हुई है. दूसरी तरफ पुराने नेता पार्टी छोड़ के भाग रहे हैं. ऐसे में राज बब्बर क्या कर सकते हैं, ये तो वक़्त बताएगा.

राज बब्बर की 'राजनैतिक पद-यात्रा':

1. 1989 में जनता दल जॉइन कर पॉलिटिक्स में आये. 2. बाद में समाजवादी पार्टी जॉइन कर ली और तीन बार सांसद रहे. 3. 2006 में राज बब्बर को समाजवादी पार्टी से निकाल दिया गया. 4. 2008 में इन्होंने कांग्रेस जॉइन कर लिया और 2009 में संसद पहुंचे.

राज बब्बर की 'राजनैतिक वाक्-यात्रा':

1. 2013 में राज ने नरेन्द्र मोदी की तुलना हिटलर से की थी. खूब प्रपंच हुआ था इस बात पर. 2. असम चुनाव से पहले राज ने कहा था कि मोदी भले ही प्रधानमंत्री हैं पर RSS प्रचारक की तरह हरकत कर रहे हैं. ये लोग नाथूराम गोडसे के चेले हैं और मेरा दावा है कि बिहार में धोबीपछाड़ के बाद असम में भी बुरी तरह हारेंगे. ऐसा हुआ नहीं. कांग्रेस के हेमंत बिस्वा शर्मा ने पार्टी छोड़ी और बीजेपी को जिताया. 3. फिर राज ने कहा कि देश में गरीबी बहुत है और मोदी जी कुछ कर नहीं रहे हैं. किसान मर रहे हैं और ये लोग बस चुनाव प्रचार कर रहे हैं. पर तीन साल पहले जब कांग्रेस की सरकार थी और फार्मूला आया था कि 32 रूपये डेली कमाने वाला इंसान गरीब नहीं है तब बड़ा बवाल हुआ था. उस वक़्त राज बब्बर ने कहा था: आज भी मुंबई में मैं 12 रुपये में पेट भर कर खाता हूं. 4. वोट वाली राजनीति के बारे में राज बब्बर का कहना है कि कांग्रेस बीजेपी की तरह हिन्दू-मुस्लिम कर के वोट नहीं मांगती. अमित शाह जैसे लोग अपने भाषण से लोगों के मन में डर पैदा कर देते हैं. इससे हमारा वोट कट जाता है. 5. बाबा साहेब अम्बेडकर की जयंती पर राज बब्बर ने कहा: बहुजन समाज पार्टी और मायावती ने बाबा साहेब अम्बेडकर और कांशीराम जी को छोड़ दिया है. जातिगत राजनीति करते हैं ये लोग. हम लोग नहीं करते. अब देखना है कि 'इन्साफ का तराजू' वाले राज बब्बर अपनी जिम्मेदारी से कितना इन्साफ कर पाते हैं.

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