कोरोना की वजह से पिछले कई महीने से रेगुलर ट्रेनों पर रोक लगा दी गई थी. इसकी जगहस्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही थीं, जिनका किराया रेगुलर ट्रेनों से 30 प्रतिशत ज्यादाथा. लेकिन अब रेलवे ने फिर से रेगुलर ट्रेनों को शुरू करने का फैसला किया है. सरकारने लगभग 1700 से अधिक ट्रेनों की सूची तैयार की है जो कोविड के समय बंद की गईं थीं.हालांकि रेलवे ने साफ कर दिया है कि भले ही सभी ट्रेनों को रेगुलर किया जा रहा,लेकिन कोविड की सभी गाइडलाइंस जारी रहेंगी. स्पेशल ट्रेनें होंगी बंद! कोरोना केमामलों में बढ़ोतरी के बाद देश में मार्च 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन किघोषणा की थी. 25 मार्च,2020 को ट्रेन सर्विस को अस्थायी तौर पर रोक दिया गया था.166 साल में ऐसा पहली बार हुआ था जब ट्रेन का परिचालन रुक गया था. हालांकि इस दौरानट्रेन से माल की आवाजाही चालू रही, केवल यात्री ट्रेनें बंद हुईं. इसके बाद मई 2020से पहले श्रमिक स्पेशल ट्रेनों और बाद में स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरूहुआ.रेगुलर ट्रेनों के नंबर में बदलाव कर उन्हें स्पेशल ट्रेनों के रूप में संचालितकिया गया. हालांकि इन ट्रेनों में सामान्य के मुकाबले अधिक किराया लिया जाता था औरजनरल क्लास टिकट को भी बंद किया गया था. लेकिन अब मेल स्पेशल और हॉलिडे स्पेशल, दोश्रेणियों में चलने वाली सभी कोविड ट्रेनों को आखिरकार बंद किया जाएगा. किरायाकोविड से पहले जितना लगेगास्पेशल ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों से 30 प्रतिशत ज्यादा था. इन स्पेशलट्रेनों जैसे, मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में स्लीपर क्लास में यात्रा करने वाले यात्रीको ट्रेन में बिना किसी अन्य लाभ के ₹20 अधिक देने पड़ते थे. इसके अलावा, वरिष्ठनागरिकों सहित विभिन्न यात्रियों को दी जाने वाली रेल यात्रा रियायतों को विशेषट्रेनों में बंद कर दिया गया था. लेकिन अभ रेगुलर ट्रेनों को कोविड से पहले वालेकिराए पर चलाया जाएगा. वहीं आजतक के अशोक सिंघल और मिलन शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, जनरल टिकट वालासिस्टम भी खत्म होने जा रहा है. कहा गया है कि अब सिर्फ रिजर्व और वेटिंग टिकलवालों को ही यात्रा करने की अनुमति रहेगी. जनरल क्लास वाली टिकट मौजूद नहीं रहनेवाली है. इस बात पर भी जोर दिया गया है कि पहले से बुक हो चुकीं ट्रेन टिकट परएक्स्ट्रा किराया नहीं वसूला जाएगा, वहीं कोई पैसा वापस भी नहीं होगा.वहीं रेलवे के एक प्रवक्ता ने कहा कि ट्रेनों में अब भी कंबल,चादर, तकिया नहीं दियाजाएगा, जैसा कि कोरोना काल में नहीं दिया जा रहा था.