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इस चादर को धुले दो महीने हुए! तभी गंधा रही है

रेल राज्यमंत्री ने राज्यसभा में रेलवे का ये टॉप सीक्रेट लीक किया है.

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27 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 27 फ़रवरी 2016, 07:49 AM IST)
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ट्रेन का कंफर्म टिकट मिल जाने भर से कोई खुशनसीब नहीं हो जाता. आगे और लड़ाई है. हो सकता है कि उसमें जो चादर दी गई है वो दो महीने पहले धोई गई हो. इसी वजह से इसमें बदबू आ रही है. ये चिलुए भी उसी की वजह से टहिल रहे होंगे. रेलवे राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने राज्यसभा में ये टॉप सीक्रेट लीक किया है. शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान ये कोच्चन किया गया. कि बेडशीट, तकिए चादर वगैरह कब धोए जाते हैं. तो बोले कि बस दू महीना पूरा होने पर. तो राज्यसभा के चेयरमैन हामिद अंसारी ने कहा कि पैसेंजर अपनी तकिया बिस्तर खुद लेकर आएं तब सही रहे. मनोज सिन्हा ने इसके पीछे की मजबूरी भी बताई. कहा कि फुल टेक्नोलॉजी से लैस लॉन्ड्री अभी सिर्फ 41 हैं. जो ट्रेन में यूज होने वाले 85 परसेंट बिस्तर की सर्विस ही कर सकती हैं. अगले दो साल में सरकार का प्लान है कि कम से कम 25 लॉन्ड्री और बढ़ेंगी. लल्लन का कहिना ये है कि ये टाइम पीरियड थोड़ा और बढ़ा दो. अगर चादर गंधाती रहेगी तो पैसेंजर को नींद नहीं आएगी. वो पहरा देगा. और ट्रेन से टोंटी खोल ले जाने वालों पर नजर रखेगा. बहुत बोर हुआ तो उठ कर पंखे वंखे साफ कर लेगा. और एक जागता हुआ आदमी ट्रेन की जेड प्लस सिक्योरिटी साबित होगा. तो गुजारिश है कि ट्रेन में धुली चादर देने की परंपरा बंद की जाए. अगर कुछ कर सकती है तो ये मांगें पूरी कर दे.

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