गरीब से किया वादा राहुल ने पूरा नहीं किया, तो आगे आईं स्मृति
सड़क पर अखबार बेचते मिला था बच्चा, राहुल ने अपनाया लेकिन फिर भूल गए.
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फोटो - thelallantop
राहुल और स्मृति की टक्कर के चक्कर में एक 13 साल के बच्चे और उसके परिवार की चांदी हो गई है. राजनीति में राहुल और स्मृति पहली बार भिड़े थे अमेठी में, इस वाले लोकसभा चुनाव के समय. उसके बाद अक्सर ही भिड़ते रहते हैं. पहले मद्रास आईआईटी के मुद्दे पर दोनों ट्विटर पर भिड़ लिए थे. अभी एक दिन संसद में स्मृति ईरानी ने कहा. राहुल उनसे अमेठी से चुनाव लड़ने का बदला ले रहे हैं,
लेकिन अब मौका मिला स्मृति को, दरअसल, कौशल शाक्या नाम का बच्चा भोपाल में न्यूजपेपर बेचता था. एक दिन उसने पेपर बेचने के लिए एक गाड़ी की खिड़की खटखटाई. गाड़ी में जो आदमी बैठा था उसका नाम था राहुल गांधी. बच्चे ने राहुल से पेपर खरीदने की रिक्वेस्ट की. कहा 'देख लीजिए आपकी ही फोटो है, पहले पेज पर' . एक तो बच्चे की रिक्वेस्ट, ऊपर से फ्रंट पेज पर अपनी ही फोटो. खरीदते कैसे नहीं.
लेकिन छुट्टे नहीं थे राहुल के पास. अब छुट्टे के लिए बच्चे का दिल थोड़े ही तोड़ते. बढ़ा दिया हजार का पत्ता. पर बच्चे ने पैसे लेने से मना कर दिया. फ्री में ही पेपर दे दिया. फिर राहुल कौशल से खूब बतिआए पूछा कि वो स्कूल क्यों नहीं जाता है? कौशल ने राहुल को बताया कि वो डॉक्टर बनना चाहता है, स्कूल जाना चाहता है. लेकिन उसे घर चलाने में परिवार की मदद करनी पड़ती है. इसलिए वो सड़क पर अखबार बेचता है.
उसके बाद बच्चा मध्यप्रदेश कांग्रेस के नेताओं की नजरों में चढ़ गया. प्रदेश कांग्रेस ने उसे 'गोद' ले लिया. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने पढ़ाई के लिए कौशल को हर महीने 1000 रुपए देने का ऐलान कर दिया. कांग्रेस की कृपा यहीं नहीं रुकी. एक सीनियर नेता साजिद अली ने उसके पिता को अपने कॉलेज में नौकरी भी दे दी. अरे नेताजी कॉलेज में पढ़ते नहीं थे, उसे चलाते थे. अब कहानी में ट्विस्ट यूं आया है कि पढ़ाई का पैसा आना बंद हो गया है. कौशल की मां ने कहा है कि पैसा न मिलने के चलते उसके बेटे का एक साल बर्बाद हो गया.
पर, नेताजी कहते हैं कि कौशल ने खुद ही स्कूल जाना छोड़ दिया था. क्योंकि वो उसके घर से दूर पड़ता था. बस, इनकी खींचातानी के बीच में एंट्री होती है स्मृति ईरानी की. उनने कौशल की मदद करने के लिए हाथ बढ़ाया. कौशल के KV में एडमिशन के लिए पैसे अप्रूव कर दिए. HRD मिनिस्ट्री की तरफ से केंद्रीय विद्यालय संगठन वालों ने कौशल के घरवालों को एक चिट्ठी भी लिख दी गई.
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