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इंडियन पापा और पाकिस्तानी मम्मी की लड़की ने ट्रंप के इलाके में चुनौती पूरी की

और लोग कह रहे थे कि ट्रंप के जीतते ही मुसलमानों को दिक्कत है जाएगी.

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राहीला अहमद
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22 नवंबर 2016 (Updated: 14 जुलाई 2025, 03:14 PM IST)
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ट्रंप के जीतने के साथ ही हल्ला होने लगा कि अब अमेरिका में मुसलमानों का रहना दूभर हो जायेगा. पर नई खबर ये है कि एक मुस्लिम लड़की ने अमेरिका के एक लोकल इलेक्शन में जीत दर्ज की है. मैरीलैंड स्टेट में. जहां सबसे ज्यादा एंटी-इमिग्रेंट सेंटिमेंट हैं. और खासकर एंटी-मुस्लिम सेंटीमेंट यहां अपने पीक पर है.  इसी स्टेट के एक जिले प्रिंस जॉर्ज काउंटी में ये अचंभा हुआ है. जीतने वाली इस 23 साल की लड़की का नाम राहीला अहमद है. इस लड़की के पापा इंडियन हैं और मां पाकिस्तानी हैं. राहीला ने प्रिंस जॉर्ज काउंटी के स्कूल बोर्ड इलेक्शन को जीत कर हिस्ट्री क्रिएट किया है. इस इलेक्शन में टोटल 18 कैंडिडेट थे. उन सभी को पछाड़ते हुए राहीला नंबर वन पर रहीं. पिछले कई चुनावों को जीतकर स्कूल बोर्ड के चेयरमैन के पोस्ट पर काबिज 'जेना जैकब' को इस बार 'राहिला अहमद' से हार का सामना करना पड़ा. इस चुनाव में जेना को कुल 25 परसेंट वोट मिले थे जबकि राहीला को 34 परसेंट वोट मिले.  राहीला इस पोस्ट के लिए चार साल पहले 2012 में भी चुनाव लड़ चुकी हैं. पर उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. राहीला को मिली जीत का एक पहलू ये भी है कि जिले में 80 परसेंट पब्लिक अफ्रीकन-अमेरिकन  है. राहीला को इस इलेक्शन में रिपब्लिकन नेशनल कमिटी के एक्स चेयरमैन माइकल स्टील का भी सपोर्ट मिला था. माइकल स्टील भी भारतीय मूल के हैं.
 

माइकल स्टील राहीला को सपोर्ट करते हुए
माइकल स्टील ने राहीला को सपोर्ट किया था


 

राहीला ने इस जीत के बारे में बताते हुए कहा, “मजेदार बात ये है कि जिस दिन डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के प्रेसिडेंट चुने गए, उसी दिन एक हिजाबी मुस्लिम लड़की भी एक पब्लिक ऑफिस के लिए चुनी गई. मेरे हिसाब से यही बात अमेरिका के ग्रेट डाइवर्सिटी को परिभाषित करती है. और एक महान अमेरिका बनाने के जो सपने हैं वो आज भी मजबूत हैं और जिंदा हैं.”
 

राहीला अहमद (इनके फेसबुक से ली गई तस्वीर)
राहीला अहमद ( फेसबुक से ली गई तस्वीर)



राहीला ने कहा "मैं अमेरिका में रह रहे सभी माइनॉरिटी के लिए एक इंस्पिरेशन बनना चाहती हूं. उन्हें ये बताना चाहती हूं कि वो सब कुछ हासिल कर सकते हैं जो वो हासिल करना चाहते हैं. मेरी जीत संभव नहीं थी अगर मुझे माइनॉरिटी का सपोर्ट न मिला होता."
 

राहीला अहमद
राहीला अहमद



राहीला ने अपने यंग माइनॉरिटी लड़कियों से कहा " प्लीज, आप एक बात समझ लो कि आखिर में आपके मजबूत इरादे ही आपके काम आते हैं, और आपको यह यकीन करना होता है कि आप उसे जरूर हासिल करेंगे. चाहे क्यों न इसके लिए आपकी सोसाइटी का स्ट्रक्चर इसके खिलाफ हो, पर जंग लग चुकी पुरानी धारणाओं को एक दिन तोड़ना ही पड़ता है."

एक शो में 'वॉयस ऑफ अमेरिका' के एंकर को राहीला अपने पॉलिटिकल करियर के बारे में बताती हुई :


राहीला के पापा भारत के हैदराबाद के रहने वाले हैं. 25 साल की उम्र में अमेरिका गए थे. फिर वहीं जाकर बस गए. राहीला की मां पाकिस्तान के सिंध की रहने वाली हैं, और मात्र 3 साल की उम्र में ही अमेरिका चली गई थीं. बाद में पैरेंट्स के साथ वहीं बस गई.
अमेरिका में इस बार का प्रेसिडेंशियल इलेक्शन मुस्लिम सहित सारे माइनॉरिटी के इर्द-गिर्द रहा है. ऐसी कोशिशें भी हुई कि अमेरिका में एंटी-मुस्लिम सेंटिमेंट बनाया जा सके. कुछ लोगों का ये भी कहना था कि ट्रम्प की जीत से अमेरिका में मुसलमानों के खिलाफ एक तरह की गोलबंदी की जाएगी. ऐसी स्थिति में भारतीय मूल की इस मुस्लिम लड़की की जीत उन सभी मुस्लिम विरोधी कट्टरपंथियों के लिए  मुंहतोड़ जवाब है.
 



ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है 

 


 



 

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