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किसान आंदोलन खत्म नहीं होने पर दूसरा ज़ाफराबाद बनाने की बात कहने वाली महिला का वीडियो वायरल

बार-बार भड़काऊ बयान देने वाली इस महिला के खिलाफ दिल्ली पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं करती?

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रागिनी तिवारी किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए वीडियो बनाकर सरकार को चेतावनी दे रही हैं.
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उमा
13 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 13 दिसंबर 2020, 09:09 AM IST)
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो घूम रहा है. इस वीडियो में एक महिला किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को चेतावनी दे रही है. कह रही है कि अगर 16 दिसंबर तक सरकार किसान आंदोलन को हटाती नहीं है, तो 17 को फिर ज़ाफराबाद बनेगा. एक्टिविस्ट और कवि नाबिया खान ने इस वीडियो को दिल्ली पुलिस और CP दिल्ली को टैग करते हुए शेयर किया है.

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इसमें रागिनी तिवारी कह रही हैं-
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रागिनी आगे कहती है
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रागिनी तिवारी कौन हैं?

खुद को हिंदुत्व नेता बताने वाली रागिनी तिवारी उर्फ जानकी तिवारी बिहार के मुज़फ्फरपुर की रहनी वाली हैं, जैसा कि उनके फेसबुक का स्क्रीनशॉट शेयर हो रहा है. हालांकि हमने उनका फेसबुक अकाउंट सर्च किया, पर दो तीन पोस्ट के सिवाए ज्यादा जानकारी नहीं मिली. उनका दावा है कि वो किसी भी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ी हैं, पर रिपोर्ट के मुताबिक, वो खुद दावा करती हैं कि उन्होंने दिल्ली विधानसभा में BJP प्रत्याशी अभय वर्मा के लिए कैम्पेनिंग की थी. वो PM मोदी को पसंद करती हैं.

ज़ाफराबाद का ज़िक्र क्यों? नागरिकता संशोधन क़ानून CAA के विरोध में 22 फरवरी को ज़ाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास लोग जमा थे. इसके बाद दंगा हुआ था जिसमें कई लोग मारे गए थे. और अब रागिनी का कहना है कि जैसे यहां पर स्थिति हुई थी, वही स्थिति वो किसान आंदोलन में करेंगी, अगर आंदोलन 16 तक खत्म नहीं हुआ तो.  पहले भी दिया भड़काऊ बयान रागिनी ने CAA-NRC के प्रदर्शन के दौरान ऐसा ही भड़काऊ वीडियो बनाया था. 23 फरवरी को मौजपुर से एक फेसबुक लाइव किया था. इसमें उन्होंने कहा था-

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इस वीडियो के बाद काफी बवाल मचा था. क्विंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस वीडियो के वायरल होने के बावजूद उनका नाम चार्जशीट में नहीं था.

इन सब बातों के सामने आने के बाद अब लोग ट्विटर पर दिल्ली पुलिस को टैग कर रागिनी तिवारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. लोगों का ये भी कहना है कि जब रागिनी तिवारी खुद फेसबुक लाइव के ज़रिए दिल्ली दंगों के दौरान ऐसे भड़काऊ बातें कह रही थी, तो इससे पूछताछ क्यों नहीं हुई और इसे दंगे में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया. हालांकि खबर लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था.

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