रफाएल डील पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
फैसले से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है.
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सुप्रीम कोर्ट ने रफाएल से जुड़ी सारी याचिकाओं को खारिज कर दिया है.
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पिछले कई दिनों से चर्चा में रही रफाएल डील पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में रफाएल डील की सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया है. रफाएल डील में अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं. सबसे पहले वकील मनोहर लाल शर्मा ने जनहित याचिका दायर की थी. इसके बाद, एक दूसरे विनीत ढांडा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर जांच की मांग की थी. इसके बाद आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और फिर दो पूर्व मंत्रियों यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी के साथ वकील प्रशांत भूषण ने एक अलग याचिका दायर की थी. सबका आरोप था कि इस डील में गड़बड़ी हुई है. पूरे मामले को आप यहां क्लिक करके
पढ़ सकते हैं. सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. ठीक एक महीने बाद 14 दिसंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच ने जांच की मांग को खारिज कर दिया. जानिए इस फैसले की बड़ी बातें-

फैसला चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने दिया है.
# रफाएल डील की प्रक्रिया को लेकर कोर्ट संतुष्ट है. राफेल विमान सौदे में कोई संदेह नहीं है. कोर्ट के लिए यह सही नहीं है कि वह सभी पहलुओं की जांच करे.
# रफाएल की गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं हैं.
# रफाएल डील में कोई संदेह नहीं है, इसलिए सभी याचिकाओं को खारिज किया जाता है.
# कोर्ट को कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे लगे कि कोई पक्षपात हुआ है. ऑफसेट पार्टनर के विकल्प में दखल देने की भी कोई वजह नहीं है.
# देश को लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता है.
# राफेल सौदे के दाम, प्रक्रिया और ऑफसेट पार्टनर किसी भी मुद्दे पर कोर्ट को कोई दिक्कत नहीं है.
# हम सरकार को 126 विमानों की खरीद के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं.
# कीमतों के डीटेल्स की तुलना करना कोर्ट का काम नहीं है.
# रफाएल डील पर लोगों की निजी राय मायने नहीं रखती है. रक्षा सौदों में कोर्ट का अधिकार सीमित है. और खासतौर से तब, जब प्रतिद्वंद्वियों के पास चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन हों और हमारे पास नहीं हों.
# इस फैसले को लिखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और सौदे के नियम को ध्यान में रखा गया. मूल्य और ज़रूरतें भी कोर्ट के ध्यान में थीं.
इस फैसले को लिखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सारी याचिकाओं को एक साथ खारिज कर दिया है. इससे पहले जब 14 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी, तो कोर्ट ने एयरफोर्स के अधिकारियों को भी कोर्ट में बुलाया था.
पढ़ सकते हैं. सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. ठीक एक महीने बाद 14 दिसंबर को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच ने जांच की मांग को खारिज कर दिया. जानिए इस फैसले की बड़ी बातें-

फैसला चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने दिया है.
# रफाएल डील की प्रक्रिया को लेकर कोर्ट संतुष्ट है. राफेल विमान सौदे में कोई संदेह नहीं है. कोर्ट के लिए यह सही नहीं है कि वह सभी पहलुओं की जांच करे.
# रफाएल की गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं हैं.
# रफाएल डील में कोई संदेह नहीं है, इसलिए सभी याचिकाओं को खारिज किया जाता है.
# कोर्ट को कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे लगे कि कोई पक्षपात हुआ है. ऑफसेट पार्टनर के विकल्प में दखल देने की भी कोई वजह नहीं है.
# देश को लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता है.
# राफेल सौदे के दाम, प्रक्रिया और ऑफसेट पार्टनर किसी भी मुद्दे पर कोर्ट को कोई दिक्कत नहीं है.
# हम सरकार को 126 विमानों की खरीद के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं.
# कीमतों के डीटेल्स की तुलना करना कोर्ट का काम नहीं है.
# रफाएल डील पर लोगों की निजी राय मायने नहीं रखती है. रक्षा सौदों में कोर्ट का अधिकार सीमित है. और खासतौर से तब, जब प्रतिद्वंद्वियों के पास चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्लेन हों और हमारे पास नहीं हों.
# इस फैसले को लिखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और सौदे के नियम को ध्यान में रखा गया. मूल्य और ज़रूरतें भी कोर्ट के ध्यान में थीं.
इस फैसले को लिखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सारी याचिकाओं को एक साथ खारिज कर दिया है. इससे पहले जब 14 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी, तो कोर्ट ने एयरफोर्स के अधिकारियों को भी कोर्ट में बुलाया था.
राफेल डील क्या बीजेपी का बोफोर्स स्कैम बन गया है! । दी लल्लनटॉप शो। Episode 35
