आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के परिवार को सरकारी नौकरी देगी पंजाब सरकार
76 किसान विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवा चुके हैं.
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पंजाब के सीएम ने लाइव के दौरान ये बातें कहीं. फोटो ट्विटर लाइव से लिया गया है.
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नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर किसान डटे हुए हैं. 22 जनवरी को 11वें दौर की वार्ता के बाद भी केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच मामला किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सका. किसानों का प्रदर्शन जारी है. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कई किसानों की जान जा चुकी है. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ऐलान किया है कि आंदोलन में जान गंवाने वाले पंजाब के किसानों के परिवार को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि और एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि क्या देश में वाकई संविधान है? शेड्यूल 7 के अंतर्गत कृषि राज्य का विषय है. संसद में चर्चा के बिना केंद्र ने इसमें बदलाव क्यों किया? उन्होंने लोकसभा में इसको पास किया, जबकि और सदस्यों की आवश्यकता थी. राज्यसभा में भी इसको हंगामे के बीच पास किया गया.
https://twitter.com/ANI/status/1352630062638501888
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि मुझे रिपोर्ट मिली है कि दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में अब तक 76 किसानों का निधन हो चुका है. मैं घोषणा करता हूं कि इनमें से जो किसान पंजाब से थे, उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और पीड़ित परिवार को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.
सीएम ऑफिस के ट्वीट में कहा गया-
"उन्होंने (सीएम) अकाली दल और आप पार्टी को कृषि कानूनों पर झूठ बोलने के लिए फटकार लगाई. साथ ही केंद्र द्वारा कानूनों को वापस नहीं लिए जाने को अमानवीय करार दिया. सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य के उन किसानों के परिवार में से एक सदस्य को नौकरी की घोषणा की है जिन्होंने अपनी जान आंदोलन में गंवाई है."https://twitter.com/CMOPb/status/1352652374976786432 पंजाब के मंत्रिमंडल की बैठक में सीएम ने कहा था कि केंद्र सरकार जमीनी हकीकत से दूर है. इस बैठक में शामिल सदस्यों ने तीनों नए केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की अपील की थी. पंजाब कैबिनट ने मांग की थी कि केंद्र सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य को किसानों का वैधानिक अधिकार बनाना चाहिए. क्योंकि किसान अपनी उपज की बेहद कम कीमत हासिल कर पाता है. आपको बता दें कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों और सरकार के बीच बातचीत अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है. इन नए कृषि कानूनों का काफी वक्त से किसान विरोध कर रहे हैं. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है हालांकि किसानों ने कहा है कि जब तक तीनों कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा वे पीछे नहीं हटेंगे. द लल्लनटॉप के संवाददाता रजत शर्मा लगातार किसानों के इस आंदोलन को कवर कर रहे हैं. वे बताते हैं कि विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन के दौरान अभी तक 138 लोगों की मौत हो चुकी हैं. इनमें कम से कम 76 किसान पंजाब के रहने वाले थे. ठंड, बारिश के कारण तबियत खराब होने से जहां बुजुर्ग किसानों की जानें गईं वहीं कुछ किसानों ने आत्महत्या भी कर ली.

