मुरथल. वो जगह जहां दिल्ली के लोग हफ्ते में कोई एक दिन निकाल कर 'ढाबे' का खानाखाने जाते हैं. दिल्ली की भागदौड़ से थोड़ा कटा हुआ है तो यार-दोस्तों के साथ कुछवक्त चैन से बिताने के लिए एक जगह है. मैंने मुरथल के बारे में ऐसे ही और इतना हीजाना. लेकिन फिर फरवरी 2016 में जाट आरक्षण की मांग को लेकर जब आंदोलन शुरु हुआ तबमुरथल के बारे में ऐसा कुछ सुना कि फिर कभी वहां जाने का मन नहीं हुआ. मुरथल से खबरआई थी कि वहां एन एच 1 पर कई कारें रुकवाई गईं, उनमें से महिलाओं को घसीटकर पास केखेतों में ले जाया गया और उनसे गैंगरेप किया गया. अखबार ‘द ट्रिब्यून’ ने स्थानीय चश्मदीदों के बयान के आधार पर यह खबर दीथी. मीडिया में आई तस्वीरों में खेतों में जहां-तहां बिखरे कपड़े देखे गए. पर ये भीखबर आई कि रेप हुए ही नहीं थे. पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट इस मामले की निगरानीकर रहा था. 19 जनवरी 2017 को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ये कहा कि गवाहों केबयान ये इशारा करते हैं कि जाट आंदोलन के दौरान मुरथल में गैंगरेप हुए थे. कोर्ट नेमामले की जांच कर रही SIT को झिड़की दी और कहा कि लोगों का भरोसा बना रहे इसके लिएज़रूरी है कि दोषी पकड़े जाएं.गैंगरेप की शिकार महिलाओं के कपड़े यहां-वहां बिखरे पड़े थे.कोर्ट को ऐसा इसलिए कहना पड़ा क्योंकि पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ कर गैंगरेप काआरोपी बताया था, उनके खिलाफ सबूत नहीं मिले हैं. उनके ब्लड सैंपल मुरथल मेंबलात्कार के शिकारों के कपड़ों पर मिले वीर्य (सीमेन) के सैंपल से मैच नहीं हुए.इसलिए इन पर लगे आरोपों में से रेप का चार्ज खत्म किया जाने वाला था. इस मामले मेंकोर्ट की मदद कर रहे अनुपम गुप्ता ने यहां तक कह दिया था कि SIT जानबूझ कर ढीलारवैया अपना रही है ताकि आरोपी छूट जाएं और मामला रफा-दफा हो जाए.कोर्ट ने वहां मौजूद CBI के वकील से ये पूछा कि क्या वे मामले की जांच करने कोतैयार हैं. उनका जवाब था कि CBI को कोर्ट से आदेश मिला तो वे उसका पालन करेंगे.अब तक क्या हुआःशुरुआत में पुलिस ने इसे अफवाह बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की. ये भी कहा गया किपुलिस बलात्कार की शिकार औरतों से इज़्जत की खातिर चुप रहने को कह रही थी. लेकिनफिर अखबारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर गैंगरेप की शिकार लड़कियों की आपबीती केकिस्से आए. तब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ‘सुओ मोटो’ यानी खुद ही मामले की जांच चालूकरवाई थी. मामले पर हंगामा हुआ तो पुलिस ने SIT को मामला सौंप दिया.पहली FIR 30 मार्च को दिल्ली की बॉबी जोशी ने दर्ज करवाई थी. मोलेस्टेशन का आरोपलगाते हुए उन्होंने बताया था कि वो रेप के दौरान मौजूद थीं. अप्रैल में दो औरलड़कियों ने पुलिस को बिना नाम की चिट्ठी लिखकर बताया कि मुरथल में उनके साथ भीबलात्कार हुआ था. इनमें से एक लड़की NRI थी. इसके बाद जाकर पुलिस ने माना कि उस दिन वहां गैंगरेप हुए थे. तब जाकर आंदोलन के समय दर्ज हुई FIR में रेप कीधारा जोड़ी.मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंःक्या 'सवर्णों' को आरक्षण मिलने से समस्या दूर हो जाएगी?रेल की पटरी न उखाड़ने के वादे के साथ जाट रिटर्न्स!पुलिस ने माना, मुरथल में हुए थे गैंगरेप