पुणे के बुजुर्ग ने अपनी सारी जायदाद बच्चों के नाम करने के बजाय देश के नाम लिखदी. बुजुर्ग ने अपनी विल में लिखा कि उनकी प्रॉपर्टी फौजी और उनके परिवार केवेलफेयर के लिए इस्तेमाल की जाए. बुजुर्ग पुणे के रहने वाले हैं और इनका नाम प्रकाशकेलकर है. इन्होंने प्रॉपर्टी फौजियों के रिलीफ फंड को दे दी है. डिफेंस मिनिस्टरमनोहर पर्रिकर के PA ने केलकर के बारे में कहा, पहली बार सुन रहा हूं कि देश का कोईआदमी अपनी सारी जायदाद देश के लिए लगा दी हो. केलकर कहते हैं कि पांच साल से उनकाऐसा करने का मन था. राज्य सरकार पर इसमें उनकी मदद नहीं कर पा रही थी. पर्रिकर केडिफेंस मिनिस्टर बनने के बाद से ये और आसान हुआ तो उन्होंने प्राइम मिनिस्टर रिलीफफंड को 30 परसेंट देने, मुख्यमंत्री रिलीफ फंड को 30 परसेंट देने का, 15 परसेंटआर्म्ड फोर्सेज का और 15 परसेंट नेशनल डिफेंस फंड और बचा हुआ 10 परसेंट किसी अच्छाकाम करने वाले NGO को देने का फैसला किया. कोथारुड इलाके के रहने वाले हैं प्रकाशकेलकर और उनकी उम्र है 72 साल. उनका मानना है कि फौजियों की वजह से ही देश सुरक्षितहै हम चैन से जी सकते हैं क्योंकि वहां सरहद पर फौजी भाई जाग रहे हैं इसलिए हमअच्छे से सो सकते हैं. उन्होंने सबसे अपनी कमाई का एक हिस्सा देश के डिफेंस के लिएदेने की बात भी कही. केलकर ने कहा कि कुछ समय पुणे की सड़कों पर ट्रैफिक कंट्रोलकरने का काम करते हैं. और फिर कुछ घंटे झुग्गियों में जाकर मरीजों को दवाई देने काकाम करते हैं. 2009 से वो ये काम कर रहे हैं. धुलिया और यवतमाल में जाकर वोकिसानों, आदिवासियों की मदद करते हैं. केलकर ने कहा, खिलाड़ी ओलंपिक्स में जातेहैं. और कुछ मेडल्स जीतकर ले आते हैं. उसके लिए करोड़ों रुपये न्यौछावर कर दिए जातेहैं. जो जवान सरहद पर 24 घंटे खड़ा है उनके लिए क्यों ऐसे करोड़ों रुपये खर्च नहींकिए जाते हैं. कितना कुछ है भारत में करने को, क्या जरूरत है स्मार्ट सिटी या बुलेटट्रेन की, पहले भारतीय फौजी को खुश करके दिखाओ. उन्हें जो चाहिए वो देकर दिखाओ. येकरना होगा केवल बातों से काम नहीं चलेगा. मन की बात तो ठीक है पर मन की बात से किसीको कुछ नहीं मिलता. मोदी साहब से विनती है कि बातें न करें फौजियों के लिए कुछ करकेदिखाएं. वैसे एक बात है. जितने जरूरी देश के लिए फ़ौजी हैं. उतने ही जरूरी खेल औरफिल्में भी हैं. आप आर्ट को और स्पोर्ट्स को किनारे नहीं कर सकते. स्मार्ट सिटी याबुलेट ट्रेन के अपने महत्व हैं. कोई देश ऐसे अच्छा नहीं बनता कि बॉर्डर पर ढेरोंसिपाही खड़े कर दो. उनको खुश रखो और देश के अंदर विकास ही न हो. हम तो दुआ करते हैं,देश ऐसा बने जहां किसी को बॉर्डर पर खड़े ही न होना पड़े. केलकर के हिसाब से सोसाइटीने उन्हें अभी तक बहुत कुछ दिया है और अब वो सोसाइटी को कुछ वापस देना चाहते हैं.केलकर और उनकी बीवी का ये ज्वाइंट विल है जिसमें से 90 परसेंट पैसा सरकार को और 10परसेंट एक NGO को जाएगा. ये विल केलकर ने जनवरी 2016 में बनाया था. पिछले पांचसालों से वो जरूरतमंदों की मदद करते रहे हैं. पर इस बात को लेकर बहुत क्लियर नहींथे कि मदद कैसे करनी है. राज्य सरकार से कई बार उन्होंने मदद करने के लिए कहा परकोई रिस्पांस नहीं आया. पर मोदी गवर्मेंट आने के बाद से इसमें बदलाव हुआ है. केलकरने आगे कहा, शहीदों पर करोड़ों नहीं तो लाखों में तो खर्च होना ही चाहिए. ये फिल्मइंडस्ट्री नंगा नाच गाना कराने में करोड़ो रुपया फालतू बर्बाद करती है. पर जवानोंके लिए नहीं करती. जब मैं खाने बैठता हूं तो सैनिकों के परिवार के बारे में सोचकरदुखी हो जाता हूं. PM मोदी के पास लफ्जों का खजाना है पर लफ्जों से कुछ नहीं होता,उसके साथ काम भी चाहिए. एक्शन चाहिए. और मैंने जो किया वो ऐसा ही एक्शन है. ये पैसाबाढ़ और दूसरी आपदाओं के लिए खर्च होगा. थोड़ा सा ही सही. मोदी जी की मन की बात तोठीक है पर मन की बात से किसी को कुछ मिलता नहीं है. लोग दो लफ्ज सीख जाते हैं. दोविचार आते हैं. पर उससे पेट तो नहीं भरता है. दुख हल्के नहीं होते. केलकर की तरह कीउन्हें भावना चाहिए. दम बाजुओं मे रखें और कुछ करके दिखाएं मोदी.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें -जिस पूर्व सैनिक ने खुदकुशी की, दिल्ली पुलिस ने उसके बेटे को हिरासत में लियासेना के लिए मेडल अनाउंस करने पर राजनाथ सिंह की उड़ी खिल्लीसेना के विकलांग पेंशन के बारे में मनोहर पर्रिकर से झूठ बोला गया है!नशे में इस आदमी ने वो सब बता दिया, जो पुलिस भी नहीं पता कर पाई थीमोदी ने कहा सैनिकों को संदेश दो, सहवाग और अक्षय कुमार ने भेजा वीडियो