पुलवामा अटैक में शहीद हुआ पति, विधवा को 'सोशल मीडिया देशभक्तों' ने कायर कह दिया
युद्ध के खिलाफ बात करने पर बुरी तरह ट्रोल किया.
Advertisement

शहीद बबलू संत्रा
Quick AI Highlights
Click here to view more
14 फरवरी की वो मनहूस तारीख थी जिसने हमारे 40 से ज्यादा CRPF जवानों को छीन लिया. शहीदों में एक बबलू संत्रा भी थे. वो अपने पीछे एक 6 साल की बच्ची और पत्नी मीता संत्रा को छोड़ गए हैं. मीता हावड़ा के बौरिया में एक स्कूल में इंगलिश टीचर हैं. पश्चिम बंगाल में है ये जगह. लेकिन अभी मीता की बात उनके शहीद पति की वजह से नहीं, उन पर ततैया की तरह भिड़े हुए ट्रोल्स की वजह से हो रही है. जी हां, सोशल मीडिया वॉरियर्स. जो रजाई के अंदर घुसे हुए देशद्रोही का सर्टिफिकेट बांटते हैं. इन्होंने मीता को भी ट्रोल कर दिया. सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने युद्ध से ज्यादा बातचीत करने की बात कही थी.

मीता ने कहा था 'युद्ध हर समस्या का हल नहीं है.' बस ट्रोल आर्मी उन पर फायर हो गई. उन्हें कायर और 'खुद के बारे में सोचने वाली' कहा गया. ये भी कहा गया कि उन्हें उनके पति से प्यार नहीं था. कोई कह रहा था कि किस शांति की बात कर रही हो, अब किसी शांति की जगह नहीं है. कुछ रणबांकुरे ये भी बता रहे थे कि युद्ध में मरना कायरों की तरह मरने से बेहतर है. ये कीबोर्ड से वीर रस उनके लिए छलका रहे थे जिनका पति शहीद हो गया.

मिता संत्रा, शहीद बबलू संत्रा की पत्नी
इस पर मीता ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात की. कहा कि 14 फरवरी के बाद मुझे कुछ भी समझ में आना बंद हो गया है. अभी मैं उस स्थिति में नहीं हूं कि सोशल मीडिया पर देखूं कि वहां क्या चल रहा है. लेकिन युद्ध पर जो मैंने कहा अभी तक उस पर कायम हूं. लोग अपना ओपीनियन रखते हैं, ये उनकी अभिव्यक्ति की आजादी है. मैं कोई अलग नहीं हूं.
अपने कहे पर अटल रहते हुए मीता ने बताया कि वो क्यों युद्ध के खिलाफ हैं. कहा कि मैं टीचर हूं और इतिहास की स्टूडेंट रही हूं. मुझे पता है युद्ध कभी परमानेंट सोल्यूशन नहीं लाता. पत्नियां अपना पति खोती हैं, माएं अपने बेटे खोती हैं, बेटियां अपने पिता खोती हैं. उन्होंने कहा कि उनके कहे को गलत तरीके से लिया गया और उनके युद्ध के खिलाफ कमेंट को कायरता कहा गया. कहा कि मैं इंडियन एयर फोर्स, आर्मी, नेवी और पैरामिलिट्री फोर्सेज की बहादुरी का सपोर्ट करती हूं. उन्होंने जो मंगलवार की रात किया वो वाकई बहादुरी का काम था.

पत्नी मिता और बच्ची के साथ बबलू संत्रा
अब बताइये, एक तरफ जब हमला हुआ तो यही वीर लोग शहीद शहीद कर रहे थे. और जब एक शहीद की पत्नी कुछ कहती है तो उसको सुनने और गुनने की बजाय ट्रोल करते हैं. देशभक्त तो ये हो नहीं सकते. बस नेटभक्त हैं. सस्ते जियो के प्लान ने ये वाले देशभक्त तैयार किए हैं. और पबजी पर युद्ध लड़ने वाले कायरता वीरता का अंतर बता रहे हैं. घोर कलजुग है.

मीता ने कहा था 'युद्ध हर समस्या का हल नहीं है.' बस ट्रोल आर्मी उन पर फायर हो गई. उन्हें कायर और 'खुद के बारे में सोचने वाली' कहा गया. ये भी कहा गया कि उन्हें उनके पति से प्यार नहीं था. कोई कह रहा था कि किस शांति की बात कर रही हो, अब किसी शांति की जगह नहीं है. कुछ रणबांकुरे ये भी बता रहे थे कि युद्ध में मरना कायरों की तरह मरने से बेहतर है. ये कीबोर्ड से वीर रस उनके लिए छलका रहे थे जिनका पति शहीद हो गया.

मिता संत्रा, शहीद बबलू संत्रा की पत्नी
इस पर मीता ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात की. कहा कि 14 फरवरी के बाद मुझे कुछ भी समझ में आना बंद हो गया है. अभी मैं उस स्थिति में नहीं हूं कि सोशल मीडिया पर देखूं कि वहां क्या चल रहा है. लेकिन युद्ध पर जो मैंने कहा अभी तक उस पर कायम हूं. लोग अपना ओपीनियन रखते हैं, ये उनकी अभिव्यक्ति की आजादी है. मैं कोई अलग नहीं हूं.
अपने कहे पर अटल रहते हुए मीता ने बताया कि वो क्यों युद्ध के खिलाफ हैं. कहा कि मैं टीचर हूं और इतिहास की स्टूडेंट रही हूं. मुझे पता है युद्ध कभी परमानेंट सोल्यूशन नहीं लाता. पत्नियां अपना पति खोती हैं, माएं अपने बेटे खोती हैं, बेटियां अपने पिता खोती हैं. उन्होंने कहा कि उनके कहे को गलत तरीके से लिया गया और उनके युद्ध के खिलाफ कमेंट को कायरता कहा गया. कहा कि मैं इंडियन एयर फोर्स, आर्मी, नेवी और पैरामिलिट्री फोर्सेज की बहादुरी का सपोर्ट करती हूं. उन्होंने जो मंगलवार की रात किया वो वाकई बहादुरी का काम था.

पत्नी मिता और बच्ची के साथ बबलू संत्रा
अब बताइये, एक तरफ जब हमला हुआ तो यही वीर लोग शहीद शहीद कर रहे थे. और जब एक शहीद की पत्नी कुछ कहती है तो उसको सुनने और गुनने की बजाय ट्रोल करते हैं. देशभक्त तो ये हो नहीं सकते. बस नेटभक्त हैं. सस्ते जियो के प्लान ने ये वाले देशभक्त तैयार किए हैं. और पबजी पर युद्ध लड़ने वाले कायरता वीरता का अंतर बता रहे हैं. घोर कलजुग है.

