अब तक दिल्ली और पुदुचेरी में एक बात कॉमन थी. कल से दो हो गई हैं. अब यहां केलेफ्टिनेंट गवर्नर ने भी मुख्यमंत्री के फैसले पलटने शुरू कर दिए हैं.लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी ने मुख्यमंत्री वी नारायणसामी के 2 जनवरी के उस फैसलेको पलट दिया है, जिसमें उन्होंने किसी भी सरकारी कम्युनिकेशन के लिए सोशल मीडिया केइस्तेमाल पर रोक लगा दी थी.कांग्रेसी मुख्यमंत्री नारायणसामी के जले पर मुट्ठी भर नमक पड़ गया होगा, जबउन्होंने राजभवन के लेटर-हेड पर किरण का आदेश ट्विटर पर देखा होगा.ट्विटर स्क्रीनशॉटपुदुचेरी लेफ्टिनेंट गवर्नर का आदेश. किरण बेदी के ट्विटर हैंडल से. नारायणसामी का आदेशपुदुचेरी सरकार ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने के पीछे ये वजह बताई थीकि इन साइट्स/एप्स के कुछ सर्वर देश से बाहर भी हैं. इसलिए अपलोड किए सरकारीदस्तावेज़ किसी विदेशी सरकार के हाथ लग सकते हैं. ये ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA)के साथ ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निर्देशों का भी उल्लंघन है.पुदुचेरी सरकार का आदेश. किरण बेदी के ट्विटर हैंडल से.पुदुचेरी सरकार का फैसला पलटने की वजह भी किरण ने ट्विटर पर ही दी. और बात घुमाएबिना सीधे नारायणसामी पर निशाना साध दिया.ट्विटर स्क्रीनशॉट पीछे की कहानीसरकार ने अपने बयान में विदेशी सर्वर की बात कही थी. लेकिन असल बात यही है किनारायणसामी सारे आदेश अपने 'सर्वर' के जरिये चाहते हैं. व्हाट्सऐप ग्रुप से किरणबेदी के आदेश सीधे अफसरों तक पहुंचते थे - बिना नारायणसामी के मंत्रियों की नज़र मेंआए. किरण बेदी के काम करने का तरीका हमेशा काफी 'डायरेक्ट' रहा है. इसलिए अफसरों कोतय समय में किरण के आदेश मानने पड़ते थे. क्योंकि ये सब लोगों को भी अपने गैजेट्स परनज़र आता था, लाज़मी तौर पर ये सवाल उठता था, कि पुदुचेरी को चला कौन रहा है, किरण यानारायणसामी.ये देख कर कुछ विधायक अपनी समस्याएं लेकर सीधे राजभवन तक पहुंच रहे थे. 'इंडियनएक्सप्रेस' के हवाले से खबर है कि विधानसभा के स्पीकर वैथीलिंगम भी बेदी से अपनेलोगों की परेशानियों को लेकर मिले थे. ये नारायणसामी को खास तौर पर बुरा लगा था.नारायणसामी और स्पीकर वैथीलिंगम के बीच बनती नहीं है.किरण बेदी ने दिसंबर में डीडी पुदुचेरी से लोगों तक सीधे अपने मन की बात भी पहुंचाईथी. बाकायदा तमिल में.https://www.youtube.com/watch?v=nUEx0ckEHGU&sns=twनारायणसामी की कुलबुलाहट समझना मुश्किल नहीं है. दिल्ली के उदाहरण के बाद कोईमुख्यमंत्री अपने राज्य में एक एक्टिव गवर्नर नहीं चाहता. खासकर तब जब आपकी सरकारउस पार्टी की हो, जिसकी न केंद्र से बनती हो, न लोकसभा में इतने सांसद हों किकेंद्र से कुछ मनवा लें. किरण बेदी ने जब जुलाई 2016 में व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाएथे, तभी नारायणसामी ने अधिकारियों की एक बैठक उन्हें ये याद दिलाने के बुला ली थीकि उन्हें और उनके कैबिनेट को बायपास ना किया जाए और प्रोटोकॉल का पालन हो.साफ़ है कि नारायणसामी को कुछ दिन पहले पोर्न क्लिप कांड के बहाने किरण के व्हाट्सऐपग्रुप्स को निशाना बनाने का मौका मिला तो वह चूके नहीं. लेकिन उन्हें अंदाज़ा नहींरहा होगा कि यहां से बात ख़त्म नहीं, शुरू होने जा रही है.किरण ने ट्विटर पर बिगुल बजा दिया है: ट्विटर स्क्रीनशॉट ट्विटर स्क्रीनशॉटअब बात शुरु होकर कहां जाएगी, ये आने वाला वक़्त बताएगा. लेकिन इतना तय है कि येदिलचस्प होने वाला है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:किरण बेदी के व्हाट्सऐप पर अफसर ने भेजा पॉर्न, कांग्रेस के मुख्यमंत्री बचा क्योंरहे?