8 नवंबर 2016. शाम को प्रधान मंत्री ने अनाउंस कर दिया कि 4 घंटे बाद से 500 और1000 के नोट काग़ज़ के टुकड़े हो जायेंगे. देश में त्राहिमाम मच गया. लोग बैंकों केआगे नज़र आने लगे. एटीएम दो दिन शांत रहे फिर पूजे जाने लगे. भगवान की तरह वो भीसेलेक्टेड लोगों को ही फल दे रहे थे. 2000 के गुलाबी नोटों के साथ लोग सेल्फी डालरहे थे. 500 के नोट बाद में आये. कई अफवाहें उड़ीं. और न जाने क्या क्या. लेकिन फिरएक आदमी ने आवाज़ उठाई. सत्येन्द्र मुरली. दूरदर्शन में काम करते हैं. दिल्ली में.जर्नलिस्ट हैं. उन्होंने खुलासा किया कि जो भी मोदी जी ने उस शाम कहा, वो लाइव नहींथा. उसकी स्क्रिप्ट दिनों पहले तैयार कर ली गयी थी. उसपर बार-बार विचार विमर्श कियागया था. जिसके बाद उसे 8 नवंबर से काफी पहले ही रिकॉर्ड कर लिया गया था. अर्थातटीवी पर हम सबने जो कुछ भी देखा, वो लाइव नहीं था. वो पहले रिकॉर्ड किया गया औरएडिट किया गया वर्ज़न था. कैबिनेट को ब्रीफ 8 नवंबर की शाम 7 बजे किया गया था.दूरदर्शन के पत्रकार सत्येन्द्र मुरली ने प्रेस कांफ्रेंस कर ये सारी चीज़ें बताईंऔर फेसबुक पर ये लिखा: (यहां से आप जो कुछ भी पढेंगे, वो सभी चीज़ें सत्येन्द्रमुरली ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखी हैं.) - 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी का 'राष्ट्र के नाम संदेश' लाइव नहीं था, बल्कि पूर्व रिकॉर्डेड और एडिट कियाहुआ था. - इस भाषण को लाइव कहकर चलाया जाना न सिर्फ अनैतिक था, बल्कि देश की जनताके साथ धोखा भी था. - 8 नवंबर 2016 को शाम 6 बजे आरबीआई का प्रस्ताव और शाम 7 बजेकैबिनेट को ब्रीफ किए जाने से कई दिनों पहले ही पीएम का 'राष्ट्र के नाम संदेश'लिखा जा चुका था. - मुद्रा के मामले में निर्णय लेने के रिजर्व बैंक के अधिकार काइस मामले में स्पष्ट तौर पर उल्लंघन किया गया है. - इस बारे में RTI के जरिए पूछेजाने पर (PMOIN/R/2016/53416), प्रधानमंत्री कार्यालय ने जवाब देने की जगह टालमटोलकर दिया और आवेदन को आर्थिक मामलों के विभाग और सूचना और प्रसारण मंत्रालय को भेजदिया. RTI ट्रांसफर का नंबर है – DOEAF/R/2016/80904 तथा MOIAB/R/2016/80180. - यहरिकॉर्डिंग पीएमओ में हुई थी, लिहाजा इस बारे में जवाब देने का दायित्व पीएमओ काहै.--------------------------------------------------------------------------------प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ देते हुए कहा कि “आज मध्यरात्रि यानि 8 नवंबर 2016 की रात्रि 12 बजे से वर्तमान में जारी 500 रुपये और 1,000रुपये के करेंसी नोट लीगल टेंडर नहीं रहेंगे यानि ये मुद्राएं कानूनन अमान्यहोंगी.” केंद्र सरकार की तरफ से दावा किया गया कि यह निर्णय पूरी तरह गोपनीय था औरइस निर्णय की घोषणा से पूर्व इसके बारे में सिर्फ प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री समेतभारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के कुछ ही अधिकारियों को मालूम था.--------------------------------------------------------------------------------वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मीडिया को बताया कि '8 नवंबर को शाम 6 बजे आरबीआई काप्रस्ताव आया, शाम 7 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई, जिसमें मोदी ने मंत्रियों कोब्रीफ किया और रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणाकर दी.' पीएम मोदी ने ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ को मीडिया में लाइव बैंड के साथप्रसारित करने को कहा था, जिसे देश के तमाम चैनलों ने लाइव बैंड के साथ ही प्रसारितकिया. पीएम मोदी ने देश की जनता को बरगलाने के लिए ऐसा दिखावा किया कि मानोंउन्होंने अचानक ही रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया हो. यह अचानक घोषणा वाला नाटकइसलिए किया गया, ताकि देश की जनता को भरोसा हो जाए कि प्रधानमंत्री मोदी ने मामलेको बेहद गोपनीय रखा है, लेकिन ऐसा हरगिज नहीं था.--------------------------------------------------------------------------------मैं बतौर दूरदर्शन समाचार में कार्यरत पत्रकार सत्येन्द्र मुरली जिम्मेदारीपूर्वकदावा कर रहा हूं कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'राष्ट्र के नामसंदेश' लाइव नहीं था, बल्कि पूर्व रिकॉर्डेड और एडिट किया हुआ था.--------------------------------------------------------------------------------8 नवंबर 2016 को शाम 6 बजे आरबीआई का प्रस्ताव और शाम 7 बजे कैबिनेट को ब्रीफ किएजाने से कई दिनों पहले ही पीएम का 'राष्ट्र के नाम संदेश' लिखा जा चुका था. और इतनाही नहीं मोदी ने इस भाषण को पढ़कर पहले ही रिकॉर्ड करवा लिया था. 8 नवंबर 2016 कोशाम 6 बजे आरबीआई से प्रस्ताव मंगवा लेने के बाद, शाम 7 बजे मात्र दिखावे के लिएकैबिनेट की बैठक बुलाई गई, जिसे मोदी ने ब्रीफ किया. किसी मसले को ब्रीफ करना और उसपर गहन चर्चा करना, दोनों में स्पष्ट अंतर होता है. मोदी ने कैबिनेट बैठक में बिनाकिसी से चर्चा किए ही अपना एक तरफा निर्णय सुना दिया. यह वही निर्णय था जिसे पीएममोदी पहले ही ले चुके थे और कैमरे में रिकॉर्ड भी करवा चुके थे. ऐसे में केंद्रसरकार द्वारा THE GOVERNMENT OF INDIA (TRANSACTION OF BUSINESS) RULES, 1961 एवंRBI Act 1934 की अनुपालना किस प्रकार की गई होगी? क्या इस मामले में राष्ट्रपतिमहोदय को सूचना दी गई? मोदी ने संविधान व नियम-कानूनों को ताक पर रखकर देश की जनताको गुमराह किया है और अपना एक तरफा निर्णय थोपते हुए, देश में आर्थिक आपातकाल जैसेहालात पैदा कर दिए हैं. इस निर्णय की बदौलत देशभर में बैंक कर्मियों, बच्चों,वृद्धों, महिलाओं समेत सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और सिलसिला है कि थमने कानाम ही नहीं ले रहा. पूरे देश में बैंकों और एटीएम मशीनों के बाहर लंबी-लंबी कतारेंलगी हुई हैं. आज देश का आम आदमी, गरीब, मजदूर, किसान एवं मध्यम वर्ग से ताल्लुकरखने वाला व्यक्ति इन कतारों में लगा हुआ है. जबकि पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहाकि “भ्रष्टाचार में लिप्त और काला धन रखने वाला व्यक्ति आज लाइनों में लगा हुआ है,जबकि आम आदमी, गरीब, मजदूर, किसान चैन की नींद सो रहा है.” मोदी के इस वक्तव्य कीचारों ओर जबरदस्त आलोचना भी हो रही है. आज देशभर में लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीको कोसते हुए उन्हें हिटलर और तुगलक जैसी संज्ञा दे रहे हैं. देश की जनता कह रही हैकि मोदी ने इस निर्णय के बारे में अपने चहेते, यार-दोस्तों को पहले ही जानकारी देदी थी. बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती एवं अन्य विपक्षी दलों के नेताओं नेभी राज्यसभा में इस बात को भली-भांति उजागर किया था. यहाँ तक कि कई बीजेपी नेताओंऔर समर्थकों ने भी पीएम मोदी पर देश के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है, जिसकेवीडियो क्लिप सोशल मीडिया और यूट्यूब पर वायरल हो चुके हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्रीअरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में प्रधानमंत्री मोदी पर घूस लेने और नोटबंदीकी सूचना अपने चहेते पूंजीपति यार-दोस्तों को लीक किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं,जिस पर बीजेपी और आरएसएस ने चुप्पी साध रखी है. इस सबके बीच विरोधाभासी बात तो यहभी है कि केंद्र सरकार और आरबीआई ने कालेधन और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उच्चमूल्य वाले 500 रूपये और 1,000 रूपये के नोटों को बंद करने का तर्क देते हुए 8नवंबर को भारत के राजपत्र में कहा है कि "भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशकबोर्ड ने सिफारिश की है कि पांच सौ रूपये और एक हजार रूपये के अंकित मूल्य के बैंकनोट वैध मुद्रा नहीं रहेंगे...यह देखा गया है कि उच्च मूल्य के बैंक नोटों का उपयोगगणना में न लिए गए धन के भंडारण के लिए किया जाता है जैसा कि विधि प्रवर्तनअभिकरणों द्वारा नकदी की बड़ी वसूलियों से परिलक्षित है.” लेकिन, इसके ठीक दो दिनबाद यानी 10 नवंबर को बाजार में 2,000 रूपये का नोट आ गया. और इसी के साथ केंद्रसरकार और आरबीआई द्वारा उच्च मूल्य के नोटों को बंद किए जाने के पीछे दिए गएउपरोक्त तर्क के साथ विरोधाभास पैदा हो गया है, क्योंकि केंद्र सरकार 500 रूपये और1,000 रूपये से भी अधिक उच्च मूल्य का नोट यानि 2,000 रूपये का नोट लाई है. इतना हीनहीं, बाजार में 2,000 रूपये के जाली नोटों के अलावा जम्मू-कश्मीर में मारे गएआतंकवादियों से नए नोट भी बरामद किए जा चुके हैं. इस घटना ने केंद्र सरकार के दावोंको धक्का पहुंचाने का काम किया है और अब मोदी सरकार कटघरे में खड़ी है. एक तथ्य यहभी है कि आरबीआई के पास 10 हजार रूपये तक के नोट छापने की अनुमति है. पूर्व मेंइसके अंतर्गत एक हजार रूपये से ऊपर सीधे 5,000 रूपये और 10,000 रूपये का ही नोटछापा जा सकता था, लेकिन वर्तमान में 2,000 रूपये के नोट की नई सीरीज गांधी की फोटोके साथ छापी गई है, तो जाहिर है कि इसकी अनुमति से संबंधित एक्जीक्यूटिव ऑर्डर,नोटिफिकेशन आदि जारी किए गए होंगे, लेकिन आज तक जनता इन संबंधित एक्जीक्यूटिवऑर्डरों, नोटिफिकेशनों आदि को देखने में नाकाम रही है. एक तरफ तो भारतीय रिजर्वबैंक का स्पष्ट रूप से कहना है कि भारत की कैश आधारित इकॉनोमी है अर्थात देश केअधिकतर लोग कैश में ही लेन-देन का कार्य करते हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार नकदलेन-देन के खिलाफ है और नोटबंदी के बाद बैंको से नकदी निकासी पर शिकंजा कसते हुएलोगों से चेक, एटीएम, मोबाइल वॉलेट, इंटरनेट बैंकिंग इत्यादि द्वारा लेन-देन करनेको कहा जा रहा है. आज देश की जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है. मेरा मानना है किमोदी द्वारा लिए गए एकतरफा, पक्षपाती, विरोधाभासी और संदेहास्पद मकसद वाले इसतानाशाही निर्णय की वैधानिकता को माननीय न्यायालय के समक्ष कानूनन चुनौती दी जासकती है. पीएमओ को चाहिए कि वह RTI के सवालों का सीधा जवाब देकर RTI एक्ट, 2005 कीअनुपालना करे.-------------------------------------------------------------------------------- आशीष का क्या कहना है, देखें: https://www.youtube.com/watch?v=VxyWLrrE1W4--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: मोदी का मंसूबा टूट रहा है, बैंक खुद ब्लैक मनी को वाइट कर रहे हैंजानिए, नोट बैन करके मोदी ने कितना काला धन कम कर दिया! 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