PM मोदी ने अमेरिकी हमले में भारतीयों की मौत का मुद्दा उठाया, G7 समिट में ट्रंप को गले नहीं लगाया
PM Modi in G7 Summit: पीएम मोदी ने अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों की मौत पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने G7 सम्मलेन में कहा कि अमेरिका-ईरान जंग की वजह से कई मासूमों की जान गई है, जिसमें भारतीय भी शामिल हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में आयोजित G7 समिट के दौरान अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीयों के मुद्दे को उठाया और उसपर अपना पक्ष रखा. मिडिल ईस्ट में 10 जून को अमेरिकी सैनिकों ने एक जहाज को निशाना बनाया जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई. पीएम मोदी ने कहा, ‘अमेरिका-ईरान जंग की वजह से कई देशों के मासूम नागरिकों की जान चली गई, जिसमें भारतीय भी शामिल हैं.’
भारतीयों की मौत पर PM मोदीफ्रांस के एवियन-लेस-बैंस शहर में 52वां G7 सम्मलेन आयोजित हुआ. इस दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप एक-दूसरे के आमने-सामने पड़े. दोनों ने हैंडशेक किया लेकिन हमेशा की तरह गले नहीं मिले. पीएम मोदी ट्रंप के बगल में अपनी सीट पर बैठे. समिट में उन्होंने MT सेट्टेबेलो जहाज पर हुए हमले का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा,
‘पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने की दिशा में जो कदम उठाया गया है उसका हम स्वागत करते हैं. लेकिन इस जंग की वजह से कई देशों के मासूम लोगों का खून बहा है और आर्थिक नुकसान पहुंचा है. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में ब्लॉकेड की वजह से ग्लोबल इकॉनमी पर असर पड़ा है. कुछ भारतीय नागरिकों ने भी इस दौरान अपनी जान गंवाई है.’

पीएम का ये बयान ओमान की खाड़ी में 10 जून वाले अमेरिकी हमले से जुड़ा था. जहाज में 24 भारतीय शामिल थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया था. तीन नाविक लापता चल रहे थे. लेकिन बाद में उनकी मौत की ख़बर मिली. भारत ने इसपर कड़ा विरोध जताया और अमेरिकी डिप्लोमैट को फटकार भी लगाई.
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ग्लोबल पार्टनरशिप की मांगपीएम ने नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि समुद्र में नाविक ही हैं जो एक देश को दूसरे देश से जोड़ते हैं. उनकी सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. पीएम ने साफ किया कि भारत सभी देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है. उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सबको मिलकर ये सुनिश्चित करना होगा कि सी रूट नाविकों के लिए सुरक्षित हो, जिससे वो निडर होकर अपना काम कर सकें.
पीएम का बयान एक बात पर केंद्रित रहा. वो ये कि ग्लोबल लीडरशिप में साउथ एशियाई देशों की भूमिका केवल बैकग्राउंड सपोर्ट के लिए न हो, बल्कि पार्टनरशिप में हो. उन्होंने अपने बयान में कहा,
‘अब हम केवल ग्लोबल डेवलपमेंट का लाभ उठाने वाले नहीं, बल्कि इस डेवलपमेंट का हिस्सा बनना चाहते हैं. हमें डोनर-रेसिपिएंट की मानसिकता से बाहर आना चाहिए. अब ऐसा वक़्त है कि हम साथ काम करें. साथ चलें. एक दूसरे की इज्जत करनी होगी बजाए सिर्फ निर्भर होने के. तभी हम सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर बढ़ सकते हैं.'

उन्होंने फिर एक बार दोहराया कि भारत इस बात में विश्वास रखता है कि किसी भी टेंशन का समाधान बातचीत, कूटनीति और आपसी भाईचारे से निकल सकता है.
ट्रंप-मोदी की मीटिंग आजपीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप दोनों 17 जून को आधिकारिक तौर पर मिलेंगे. इस मीटिंग में ओमान में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हुए हमले पर बात हो सकती है. इसके अलावा तेल आयात, H-1B वीजा और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.
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