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आफ़रीन फातिमा की कहानी, जिनके घर पर बुलडोजर चला तो JNU में बवाल हो गया!

आफ़रीन फातिमा कहती हैं - "मैं एक महिला हूं और मुस्लिम हूं. मुझे ऐसे ही पहचाना जाना चाहिए."

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Afreen Fatima
आफ़रीन फातिमा और प्रयागराज में उनके घर पर कार्रवाई की तस्वीर.
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सौरभ
13 जून 2022 (Updated: 20 जून 2022, 08:38 PM IST)
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साल 2019. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में वीमेन्स लीडरशिप समिट चल रही थी. समिट तीन दिन की थी. दो दिन बीत चुके थे. तीसरे दिन एक सेशन था. उस सेशन में पत्रकार आरफा खानम शेरवानी आने वाली थीं. आरफा ने कुछ दिन पहले एक ट्वीट किया था. जिसमें लिखा था 'होली खेलूंगी कहके बिस्मिल्ला'. इस बात से कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम चिढ़ गए. कहा गया कि या तो इस महिला पत्रकार को ना बुलाया जाए या आगे समिट ही नहीं होने देंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. विवाद बवाल में तब्दील हो गया. तोड़फोड़ शुरू हो गई. कुछ लोगों ने शामियाना फाड़ना शुरू कर दिया. तभी 21 साल की एक लड़की आती है. वो लड़की शामियाना फाड़ रहे लोगों की तरफ अपना दुपट्टा बढ़ाती है और कहती है, 'मेरी इज्जत से ही खिलवाड़ करना है तो शामियाना नहीं मेरा दुपट्टा फाड़ो'. ये लड़की AMU में वीमेन्स कॉलेज की प्रेसिडेंट थी. नाम आफ़रीन फातिमा.

वही आफ़रीन फातिमा जो इन दिनों खबरों में है. क्योंकि उनके पिता मोहम्मद जावेद उर्फ पंप को 10 जून को जुम्मे की नमाज़ के बाद प्रयागराज में हुए बवाल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. 12 जून को भारी पुलिसबल की मौजूदगी में इनका घर ढहा दिया गया. इसके बाद JNU में प्रोटेस्ट हुए. आफ़रीन JNU की छात्रा रही हैं. ये प्रोटेस्ट आफ़रीन के समर्थन में था. प्रयागराज के SSP अजय कुमार ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “जावेद अपनी बेटी से सलाह मशविरा करते हैं जो JNU में पढ़ती है. अगर जरूरत पड़ी तो हम एक टीम दिल्ली भेजकर जांच करेंगे.”

SSP के इस बयान ने आफरीन को एक बार फिर से मीडिया की सुर्खियों में लाकर खड़ा कर दिया. यहां हम 'एक बार फिर' इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि आफ़रीन का सुर्खियों से साक्षात्कार पहली बार नहीं हुआ हैं. तो कौन हैं आफ़रीन फातिमा, क्या करती हैं और क्यों इससे पहले चर्चा में आईं हमने इन सवालों को टटोलने की कोशिश की.

कौन है आफ़रीन फातिमा?

आफ़रीन इलाहाबाद से हैं जिसे अब प्रयागराज के नाम से भी जाना जाता है. पिता मोहम्मद जावेद का पाइप और पानी की सप्लाई से जुड़ी चीज़ों का कारोबार है. इसके अलावा जावेद राजनीतिक तौर पर भी एक्टिव हैं. जावेद प्रयागराज में वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़े हैं. जावेद पार्टी की सेंट्रल वर्किंग कमेटी के सदस्य हैं.

दी इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में वेलफेयर पार्टी के प्रेसिडेंट इलियास ने बताया है कि, जावेद 2011 से पार्टी से जुड़े हैं और कई अहम पदों पर रहे हैं. हम उनकी हर संभव लीगल मदद कर रहे हैं. जावेद को फंसाया गया है. ना तो वो 10 जून की प्रोटस्ट में शामिल थे ना ही उन्होंने प्रदर्शन का आह्वान किया था.

इसी वेलफेयर पार्टी की एक स्टूडेंट विंग है. फ्रैटर्निटी मूवमेंट नाम से. फ्रैटर्निटी मूवमेंट की वेबसाइट के मुताबिक आफ़रीन फातिमा संगठन में सेक्रेटरी के पद पर हैं.

प्रयागराज में स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद ग्रैजुएशन के लिए आफ़रीन AMU गईं. आफ़रीन ने लिंग्विस्टिक्स यानी भाषा विज्ञान में BA आनर्स किया. हालांकि पढ़ाई के साथ-साथ आफ़रीन शुरू से ही छात्र राजनीति में एक्टिव रहीं. AMU में आफ़रीन को वीमेंस कॉलेज की प्रेसिडेंट चुना गया. आफ़रीन से जुड़े लोग कहते हैं कि वो एक अच्छी वक्ता तो हैं ही महिलाओं के हक के लिए हमेशा आवाज़ उठाने वाली महिला हैं.

AMU के पूर्व छात्र अम्मार अहमद दी लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं,

AMU में लड़कियों के हॉस्टल से बाहर निकलने की टाइमिंग बहुत कम थी. कॉलेज का प्रेसिडेंट बनने के बाद आफ़रीन ने इस बात के लिए प्रोटेस्ट किया कि लड़कियों को भी बाहर जाने का समय बढ़ाया जाए. बाद में प्रशासन ने इस बात को मान लिया.

इसके अलावा अम्मार बताते हैं कि 2019 में जब वीमेन्स लीडरशिप समिट का आयोजन हुआ तो पैनल में लेखिका अरुंधति रॉय और पत्रकार आरफा खानम शेरवानी को बुलाया गया. लेकिन कुछ लोगों को आरफा के नाम पर आपत्ति हो गई. क्योंकि आरफा ने होली पर वो ट्वीट किया था. इसको लेकर काफी विवाद हुआ. और अरुंधति और आरफा के सेशन को जब AMU के मेन कैंपस में नहीं होने दिया गया तो आफ़रीन ने उसे वीमेंस कॉलेज में आयोजित कराया.

AMU के पूर्व छात्र तल्हा मन्नान बताते हैं कि आफरीन ने वीमेंस कॉलेज में कई ऐसे काम करवाए जो कैंपस में पहले नहीं हुए थे. तल्हा कहते हैं कि,

2018 में बाबरी मस्जिद डेमोलिशन की बरसी पर AMU के वीमेंस कॉलेज में पहली बार प्रोटेस्ट कराया. ऐसा पहली बार हो रहा था कि वीमेंस कॉलेज को राजनीतिक तौर पर एक्टिव देखा गया. इसके अलावा एक बार किसी मसले पर प्रशासन और छात्राओं के बीच विवाद हो गया. छात्राओं की बात नहीं सुनी जा रही थी तो आफ़रीन ने अपनी साथियों के साथ AMU की एडमिन बिल्डिंग में ताला लगा दिया था.

साल 2019 में ग्रैजुएशन खत्म कर आफ़रीन ने M.A के लिए दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में दाखिला लिया. सितंबर 2019 में JNU के स्टूडेंट यूनियन के चुनाव हुए. इसी में JNU के दूसरे स्कूलों में भी चुनाव हुए. इन्हीं में से एक है स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड कल्चरल स्टडीज़. इसी से काउंसलर पद पर चुनी गईं आफ़रीन फातिमा. काउंसलर्स का काम होता है अपने अपने स्कूल्स की मेंटेनेंस का ध्यान रखना. इस चुनाव में आफ़रीन BAPSA-फ्रैटर्निटी (BAPSA-बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की कैंडिडेट थीं. हालांकि आफ़रीन JNU से पासआउट हो चुकी हैं. लेकिन अगला चुनाव ना होने की वजह से वो अभी भी काउंसलर के पद पर हैं.

आफ़रीन फातिमा.

देश में केरल के अलावा सिर्फ JNU को ही अब लेफ्ट का गढ़ माना जाता है. लेकिन आफ़रीन ने लेफ्ट को तरजीह ना देते हुए BAPSA की राजनीति को चुना. एक इंटरव्यू में आफ़रीन कहती हैं कि, 

लेफ्ट और राइट दोनों ही दबे-कुचलों को अपने हिसाब से इस्तेमाल करते हैं. राइट विंग वाले ये खुलेआम करते हैं, लेफ्ट वाले सोशल जस्टिस के नाम पर करते हैं, तो उतना पता नहीं चलता. 

आफ़रीन ये भी कहती हैं कि लेफ्ट से उन्हें ये भी दिक्कत है कि उसने कभी कैम्पस में विकल्पों को पनपने नहीं दिया.

दिसंबर 2019 में सरकार ने सिटिज़नशिप अमेंडमेंट एक्ट(CAA) पास कर दिया. देश के अलग अलग हिस्सों में CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए. इस प्रदर्शन में JNU भी शामिल था. और आफ़रीन फातिमा भी.

CAA-NRC विरोध-प्रदर्शनों के वक़्त आफरीन फातिमा काफी एक्टिव रहीं. उस दौरान आफ़रीन का एक वीडियो वायरल हुआ था. जिसमें वो कह रही थीं कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली पर भरोसा नहीं है. भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने ये वीडियो ट्वीट किया था. वीडियो में आफ़रीन कह रही थीं,

आज जब हम उतरे हैं, CAA-NRC की वजह से उतरे हैं, लेकिन सिर्फ उसके खिलाफ नहीं उतरे हैं. CAA-NRC के बाद हम रियलाइज करते हैं कि हमारा कोई भरोसा ही नहीं है किसी चीज़ पर. न हम सरकार पर भरोसा कर सकते हैं, न हम सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा कर सकते हैं. ये वही सुप्रीम कोर्ट है जिसने 'कलेक्टिव कौन्शियंस' के लिए अफ़जल गुरु को फांसी पर चढ़ाया था. ये वही सुप्रीम कोर्ट है जिसको आज पता चलता है कि पार्लियामेंट अटैक में अफ़जल गुरु का कोई हाथ नहीं था. ये वही सुप्रीम कोर्ट है जो बोलती है कि बाबरी मस्जिद के नीचे कोई मंदिर नहीं था. ताला तोड़ना गलत था. मंदिर/मस्जिद गिराना गलत था. और फिर बोलती है कि यहां पर मंदिर बनेगा. हमको सुप्रीम कोर्ट से कोई उम्मीद नहीं है.

कहा जाता है कि आफ़रीन मुस्लिमों की सेल्फ-आइडेंटिटी को लेकर उनके विचार बहुत फ़र्म हैं. अपनी पब्लिक मीटिंग में आफ़रीन को कई बार कहते सुना गया है कि मैं एक महिला हूं और मुस्लिम हूं. मुझे ऐसे ही पहचाना जाना चाहिए.

हालांकि कुछ लोग इस मामले में इतर राय रखते हैं. AMU के पूर्व छात्र अम्मार कहते हैं कि आफ़रीन को सिर्फ हिंदू मुस्लिम के चश्मे से नहीं देखा जा सकता. वो महिलाओं के वजूद, उनके अधिकार, उनकी पहचान के लिए लड़ने वाली महिला हैं.

दी लल्लनटॉप से बातचीत में JNU छात्रसंघ की अध्यक्ष आईशी घोष कहती हैं कि,

आफ़रीन जो भी कहती हैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती हैं. चाहे आप उसे विवादित माने या कुछ और. आफ़रीन हर मसले को लेकर काफी वोकल रहती हैं. चाहे जेएनयू में फीस बढ़ने का मामला रहा हो या CAA-NRC विवाद, आफ़रीन कभी चुप नहीं रहीं.

दी इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक AMU में पढ़ाई के दौरान ही आफ़रीन देश में हो रहे प्रदर्शनों में हिस्सा लेने लगी थीं. 2016 में JNU के छात्र नजीब के गुमशुदा होने पर प्रदर्शनों में आफ़रीन ने हिस्सा लिया. CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शन चाहे दिल्ली में हों या प्रयागराज में, आफ़रीन हिस्सा रहीं. इसके अलावा खबर के मुताबिक, कर्नाटक में जब इस साल हिजाब को लेकर विवाद हुआ तब भी आफ़रीन फ्रैटर्निटी मूवमेंट के साथियों के साथ प्रदर्शनकारियों से बात करने कर्नाटक के उडुपी और मंगलोर गई थीं.

फिलहाल ताजा खबर के मुताबिक प्रयागराज में आफ़रीन के घर को गिरा दिया गया है. उनके पिता जिन पर हिंसा भड़काने का आरोप वो पुलिस की गिरफ्त में हैं. इस मामले में कल आफ़रीन ने एक बयान जारी कर कहा, 

पुलिस ने बिना वॉरेंट 10 जून की शाम उनके पिता को गिरफ्तार कर लिया. उसी रात 12.30 बजे मेरी मां और बहन को भी हिरासत में ले लिया गया. मेरे परिवार के सदस्यों के साथ पुलिस ने बदसलूकी भी की.

11 जून को आफरीन फातिमा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को एक पत्र लिखा. सोशल मीडिया पर डाले गए इस पत्र में उन्होंने अपने माता-पिता और बहन की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई.

वीडियो: प्रयागराज हिंसा के आरोपी मोहम्मद जावेद का घर गिराने पर वकील ने क्या बड़े दावे कर दिए?

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