टट्टू पर दांव लगाने चला पॉलिटिक्स का PK!
वो नरेंद्र मोदी को भी जिताते हैं. वो नीतीश-लालू को भी जिताते हैं. चुनावी स्ट्रेटजिस्ट का कोई मजहब नहीं होता.
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फोटो - thelallantop
वो नरेंद्र मोदी को भी जिताते हैं. वो नीतीश-लालू को भी जिताते हैं. चुनावी स्ट्रेटजिस्ट का कोई मजहब नहीं होता. :-)
देश का सबसे बड़ा चुनावी स्ट्रेटजिस्ट है पीके. यानी प्रशांत किशोर. आप सोचो साहब! कितना मुश्किल है. घोड़ों की रेस है. हर रेस में अलग घोड़े को जिताना पड़ता है. 2014 में मोदी को जिताया. 2015 में बिहार में मोदी के खिलाफ नीतीश और लालू को जिताया. लेकिन अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की नैया पार लगाने का ठेका लिया है. लिट्मस टेस्ट है गुरु. अब तक वो ताकतवर घोड़े पर दांव लगा रहे थे. अब टट्टू को जिताने निकल पड़े हैं.
यूपी कांग्रेस दफ्तर में प्रशांत किशोर की गुरुवार को पहली क्लास हुई. इस बार उनका टारगेट है 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जिताना. वही कांग्रेस जो प्रदेश में 25 साल से ज्यादा समय से सत्ता से बाहर है. तो इसकी शुरुआत के तौर पर 2 मार्च को प्रशांत किशोर की दिल्ली में कांग्रेस के चोटी के नेताओं के साथ मीटिंग थी. इसके बाद गुरुवार को वह लखनऊ पहुंचे और पांच घंटे चली बैठक में पार्टी के स्टेट लेवल के नेताओं को सुना. अब रणनीति बनाने की तैयारी होगी.
इस बैठक में कांग्रेस के प्रदेश भर के जिलाध्यक्ष, उपजिलाध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी के पदधिकारी, AICC सदस्य और कुछ विधायक भी शामिल थे. सूत्रों ने बताया कि इस मैराथन बैठक में प्रशांत किशोर ज्यादतर शांत ही रहे, लेकिन अलग-अलग जिलों से आए नेताओं ने उन्हें जातीय और चुनावी इक्वेशन समझाए.
'2017 के लक्ष्य के लिये हमें जो उपाय करने हैं. हमें किन इश्यूज को लेकर आगे बढ़ना है. किस तरीके से लड़ाई के मोर्चे पर सेनाओं को सजाना है. कहां हमारी कमियां हैं, उसे रिपेयर करना है. और जो आधुनिक विधाएं हैं युद्ध कौशल की उसके लिये हमें कहां-कहां किन लोगों से मदद लेनी है, हम वो सब करेंगे. अब उसमें प्रशांत किशोर जी किस लेवल पर मददगार हो सकते हैं. अभी तो बस शुरुआत है.' - निर्मल खत्री, अध्यक्ष, यूपी कांग्रेस कमेटी
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेसियों को सुनने के बाद प्रशांत किशोर ने इतना ही कहा कि यूपी में उनका सीधा मुकाबला बीजेपी से होने वाला है. चुनाव की तैयारी के लिए उन्होंने 20 लोगों की एक कमेटी बनाने का ऐलान भी कर दिया. लेकिन कमाल की बात है कि प्रशांत किशोर को अपना इलेक्शन मैनेजर चुनने के बावजूद कांग्रेस खुले तौर पर ये कबूलने को तैयार नहीं है कि यूपी में 2017 चुनावों की बागडोर उन्होंने पूरी तरह से किशोर को सौंप दी है. उन्हें इसके एवज में क्या पैकेज दिया जा रहा है, इस पर भी सबने होंठ सिए हुए हैं. पार्टी के यूपी इंचार्ज भी ये बताने को तैयार नहीं कि आने वाले चुनावों में प्रशांत का रोल क्या रहने वाला है.
'ये संगठना का मसला है. हम इस पर पब्लिक में बात करना नहीं चाहेंगे. बस. ये हमारा अंदरूनी मामला है. किसे लाना है, किसे नहीं. कब लाना है.' - मधुसूदन मिस्त्री, प्रभारी,यूपी कांग्रेस
वैसे कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को स्ट्रेटजिस्ट बनाया है तो विरोधी बिल्ला गए हैं. मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने कह दिया है कि ये जनता का तिरस्कार है और रणनीतिकारों के बूते नैया पार लगाने की कोशिश है.
'लोकतांत्रिक व्यवस्था में फैसला जनता करती है और किसी एक पर आश्रित होना उनकी राजनीतिक कमजोरी है. अगर वो आदमी इतना ही करिश्माई था और मोदी जी उनका इस्तेमाल किए थे तो दिल्ली चुनाव में पटखनी क्यों खाए. बिहार चुनाव किसी एक के करिश्मे का परिणाम नहीं था महागठबंधन का परिणाम था. जनता के फैसले को किसी एक की बिनाह पर हार और जीत का फैसला सुना देना लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या है और जनादेश का भी अपमान है. इसलिये जनता क्या करती है क्या नहीं करती है.. जो करेगी सो भरेगी.' - स्वामी प्रसाद मौर्य, बीएसपी लीडर
मुलायम की समाजवादी पार्टी ने इसे हताशा में उठाया कदम बताया है. सपा नेता और यूपी सरकार में जेल मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने इसे थोड़े रचनात्मक तरीके से इस तरह कहा है कि कांग्रेस के हवाई जहाज का इंजन फेल हो चुका है और 200 स्ट्रेटेजिस्ट भी मिलकर उसमें जान नहीं फूंक सकते.
'क्या श्री प्रशांत किशोर बता सकेंगे कि कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व नहीं है वो कहां से आएगा. पंडित नेहरू के समय में प्रताप सिंह कैंरो पंजाब में, कामराज तमिलनाडु में गोविंद बल्लभ पंत, संपूर्णानंद यूपी में, बीजू पटनायक उड़ीसा में, वीसी रॉय बंगाल में, मोहनलाल सुखाड़िया राजस्थान में. वो नेता होते थे जो टीम बनाकर चलते थे. वो कहां हैं एक भी. जिनको ला रहे हैं प्रशांत कुमार या प्रशांत किशोर... क्या वो नेता पैदा कर देंगे? एक हॉकी मैच में अपनी टीम न देखो विरोधी टीम देखो, उनका क्या करेंगे? क्या उनकी हॉकी छीन लेंगे? असल में किसी पार्टी का दिवालियापन होता है, जब अपनी कार्यशैली छोड़ वे दूसरे की रणनीति पर डिपेंड होते हैं. कोई जहाज इंजन ठीक किए बगैर हवा में नहीं उतरता. कांग्रेस के जहाज का इंजन ही खत्म हो गया है. वो चाहे 200 रणनीतिकार ले आए ये उड़ेगा नहीं. मैं बड़ा क्लियर हूं. रणनीति मैं ही बता देता हूं. राहुल को एक तरफ कर दो 90 फीसदी रणनीति अपने आप ही सही हो गई. वो ये कर नहीं पाएंगे.' - बलवंत सिंह रामूवालिया, सपा (मंत्री, यूपी सरकार)
फिलहाल तो प्रशांत किशोर ने सभी नेताओं को एक फॉर्म पर उनके क्षेत्रों की जमीनी हकीकत, मुद्दे और चुनाव जिताने के लिये सुझाव मांगे हैं. इस फॉर्म में करीब आधे सवाल जातीय समीकरणों से जुड़े हैं. प्रशांत किशोर के यूपी फॉर्मूले में जातीय राजनीति की छाप जरूर होने वाली है.

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