देश की राजधानी दिल्ली से 230 किलोमीटर दूर पड़ता है आगरा. पिछले दिनों वहां आलूसड़क पर फेंके जाने की खबरें आ रही थीं. वो भी थोड़ा बहुत नहीं, लाखों किलो आलू.हजारों की तादाद में बोरियां. आगरा के किसी भी खेत के आसपास से गुजरिए, हर 100-200मीटर पर यूं हीं सड़ने के लिए पड़ा आलू दिख जा रहा था. यही हालात उत्तर प्रदेश कीपूरी आलू बेल्ट के हैं. चाहे वो कन्नौज हो या फर्रूखाबाद. वहां भी सड़क पर आलूफेंका जा रहा था. और अब किसानों का ये गुस्सा यूपी की राजधानी लखनऊ पहुंच गया है. 6जनवरी की सुबह सैंकड़ों किलो आलू विधानसभा, सीएम आवास और राज्यपाल आवास के सामनेसड़क पर पड़ा मिला. ये देखिए-Lucknow: Potatoes dumped outside Uttar Pradesh Assembly building by farmers inprotest against low prices. Presently, farmers are getting Rs.4 per kg but theydemand a minimum price of Rs.10 per kg for their potato produce,pic.twitter.com/fsQzu49F06— ANI UP (@ANINewsUP) January 6, 2018 ये आलू भारतीय किसान यूनियन के बैनर तलेकिसानों ने 5 जनवरी की रात में ही डाल दिया था. ताकि एलआईयू और प्रशासन को इसकी खबरन लग सके. और यही हुआ भी. सुबह जब वहां से गाड़ियां गुजरीं तो आलू से सड़क पर गंदगीमच गई. पुलिस-प्रशासन सकते में आ गया. फिर इसे साफ करने का अभियान चलाया गया. आलूकिसानों की इस बर्बादी और उनकी दिक्कतों को समझने हम पिछले दिनों आगरा पहुंचे तोकिसान गुस्से में थे. सरकार से बदला लेने की बातें कर रहे थे. कह रहे थे हमने हीवोट देकर सरकार बनवाई, हम गिरा भी सकते हैं. अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो इसबार हम मोदी और योगी सरकार को मजा चखा के रहेंगे. और क्या बोले किसान इस वीडियो मेंदेखिए- किसानों की मेन दिक्कतें इन बातों को लेकर हैं- 1. आलू के दाम तय होने सेकीमत और गिरी गेहूं, धान आदि कई फसलों पर सरकार एक न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करतीहै. आलू पर ऐसा कोई नियम नहीं था. पर योगी सरकार ने इस बार 487 रुपये प्रति क्विंटलआलू का रेट तय किया था. माने 4.87 रुपये प्रति किलो. किसानों को ये रेट नहीं भाया.उनका कहना था कि इससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही थी. उल्टा इस रेट ने पूरीमार्केट में आलू के रेट गिरा दिए. जिस आलू के रेट उन्हें 10 रुपये प्रति किलो मिलनेकी उम्मीद थी, वो आधे भी नहीं मिले. किसानों ने इस उम्मीद में कि बाद में मार्केटउठेगी, आलू कोल्ड स्टोर में जमा कर दिए. मगर ना मार्केट में रेट बढ़े और ना उनकाआलू बिका. आलम ये हुआ कि वो कोल्ड स्टोर से अपना आलू तक नहीं छुड़ा पाए. और कोल्डस्टोर वालों ने अगली बार की तैयारी के लिए आलू सड़क पर फिंकवा दिया. 2. मंडी समितिखत्म की जाए पूरे प्रदेश में जो मंडी समितियां बनी हैं, उन्हें खत्म किया जाए.किसान आलू लेकर मंडी में आता है, तो उसे बाजार से पहले समिति में लेकर जाना पड़ताहै. वहां आलू रखने से लेकर हर ट्रक पर एक तय कीमत मंडी समिति को दी जाती है. किसानचाहते हैं कि इसे खत्म कर दिया जाए, ताकि किसान सीधे बाजार में आलू लेकर जा सके. जोपैसा उसे मंडी समिति को देना पड़ता है, उसे न देना पड़े. 3. ट्रांसपोर्टेशन के पैसेकिसानों को दिए जाएं योगी सरकार ने आलू किसानों के लिए आलू प्रदेश से बाहरएक्सपोर्ट करने पर सब्सिडी का भी प्रावधान किया था. इसके लिए 100 करोड़ का बजट भीजारी किया गया था. मगर किसानों का कहना है कि उन्हें इसमें से एक कौड़ी नहीं मिली.सारा माल बड़े ट्रांसपोर्टर काट ले गए. आम किसानों के पास तो इतने संसाधन ही नहींहोते हैं कि वो आलू बाहर भेज पाएं. वो किसी बड़े व्यापारी को अपना आलू बेच देते हैंऔर इस ट्रांसपोर्ट सब्सिडी का फायदा भी इन व्यापारियों को मिलता है. ऐसे मेंकिसानों की मांग थी कि ये पैसा सीधा उनको दिया जाए.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें- आलू को सच में सोना बनाने की ये है तरकीब यूपी में 10 पैसे में एककिलो आलू क्यों बिक रहा है? जब गेस्ट हाउस कांड हुआ था, तब लखनऊ SSP थे यूपी के नएDGP अंकित तोमर आपके लिए मर गया, आपको पता चला? इस BJP सांसद को आर्मी के जवानों कामरना आम बात लगती है! ये लल्लनटॉप वीडियो देखें-