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खत फाड़ने की सजा डाकिया बाबू को 2 साल की कैद

बड़े बुजुर्ग कह गए हैं कि गुस्से को कंट्रोल में रखो. नहीं तो ऐसे ऐसे हादसे पेश आते हैं.

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आशुतोष चचा
18 दिसंबर 2015 (अपडेटेड: 19 दिसंबर 2015, 06:04 PM IST)
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गुस्सा खून जलाता है. कभी कभी जेल पहुंचाता है. कोच्चि, केरल के सैमुअल जॉन के साथ यही हुआ. अच्छी खासी सरकारी नौकरी कर रहे थे पोस्टमैन की. 6 सालों से. लेकिन 2009 में पोस्ट ऑफिस में ही कांड कर दिया था. उसका केस अब पूरा हुआ है और 2 साल कैद-ए-बामशक्कत मिली है. मामला ये था कि सैमुअल ने अपने जूनियर को दिया था एक लेटर. लिखे हुए पते तक पहुंचाने के लिए. बिना पोस्टमास्टर को बताए, वो चिट्ठी लेकर गया और वापस आ गया. ये बताया कि पता मिला ही नहीं. अब सैमुअल साहब पर काल योग बन गया. उसने गुस्से से आगबबूला होकर चिट्ठी फाड़ डाली. बड़े साहब को पता चला तो ठोंक दिया केस. अब आया है फैसला. मजिस्ट्रेट शिजू शेख ने दो साल कठिन कारावास की सजा सुनाई. इंडियन पोस्ट ऑफिस एक्ट के तहत. हालांकि सयाने वकील ने उसी दिन बेल करा ली और केस आगे चढ़ा दिया.

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