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फोटोशॉप वाले कृष्ण ने रामनवमी के दिन दी BJP वाली ब्रेकिंग

चंपक कार्यकर्ता, फोटोशॉप वाली ब्रेकिंग, रामनवमी के दिन कृष्ण लीला और बयानों की महाभारत.

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सौरभ द्विवेदी
15 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 15 अप्रैल 2016, 11:54 AM IST)
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  पॉलिटिक्स में नेता जी का प्यारा बनने के लिए चंपकई की नई मिसाल सामने आई है. जगह है मोदी जी का क्योटो. या कि यूपी का बनारस. यहां के एक स्वघोषित बीजेपी कार्यकर्ता हैं. रूपेश पांडे नाम के. वे फोटोकॉपी और ग्राफिक्स की गली किनारे की दुकान पर गए. ए4 साइज का कलर्ड पोस्टर बनवाया. दृश्य है महाभारत का. द्रुपद नरेश की पुत्री. धृष्टधुम्न सरीखे योद्धा की बहन. पांडवों की पत्नी- द्रौपदी. तो द्रौपदी का चीरहरण हो रहा है. मगर कौरव इरादे में सफल नहीं हो पाते. क्योंकि केशव आ जाते हैं. डिलीट द्वापरयुग, एंटर कलियुग. https://twitter.com/ANINewsUP/status/720876673537683456 कृष्ण की तस्वीर में शकल बदल दो. फोटू लगा दो फूलपुर से सांसद और यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य की. और द्रौपदी का रोल मिलेगा उत्तर प्रदेश को. धूमिल जिसके लिए लिख गए हैं. भाषा में भदेस हूं. इतना कायर हूं कि उत्तर प्रदेश हूं. और कौरव, वह पांच हैं. उनके नाम हैं. मायावती, राहुल गांधी, आजम खान, अखिलेश यादव और असदुद्दीन ओवैसी. पीछे से शुरू करते हैं. ओवैसी को अखिलेश यूपी में घुसने नहीं दे रहे. बड़ी मुश्किल से बरसों के जतन के बाद पिछले दिनों लखनऊ में एक मीटिंग कर पाए. वह यूपी में घूमेंगे तो भी हाल बिहार सा ही होगा. मुसलमानों को पता है कि फिलहाल तो ओवैसी किसी गिनती में नहीं लग रहे. अखिलेश यादव यूपी के सीएम हैं. प्रदेश जैसा भी है, उनकी वजह से है. उनके समर्थक कह सकते हैं कि अखिलेश तो यदुवंशी हैं. सीधे कृष्ण की फैमिली ट्री में पाए जाएंगे. उन्हें कौरव कैसे कह दिया. लड़के हैं सर. गलती हो जाती है. आजम खान. यूपी में मुसलमानों के सबसे बड़े सरकारी नेता. आज कल अखिलेश से नहीं लड़ रहे. अमर सिंह पर भी गुस्सा नहीं हो रहे. जुबान की डबल बैरल से दो लोगों पर धांय धांय कर रहे हैं. एक तो यूपी के राज्यपाल राम नाईक. नाईक साब बोले, आजम संसदीय मंत्री रहने लायक नहीं. आजम ने काउंटर मारा, राजभवन को आरएसएस का अडडा बना दिया है महामहिम ने. दूसरी धांय खान साहब साध्वी प्राची पर कर रहे हैं. दोनों डार डार भी हैं और पात पात भी. उनके बयान गिनाएंगे तो आपका नेटपैक खर्च हो सकता है. राहुल गांधी. बस नाम ही काफी है. मायावती. बीजेपी के मिशन यूपी के लिए सबसे बड़ा खतरा. कहीं लिखकर रख लीजिए. चुनाव में अगर बीजेपी को पूरा बहुमत नहीं मिला. तो कमल और साइकिल छोड़ सब कतार लगाकर बहन जी की सरकार बनवाएंगे. उनकी तैयारी भी सबसे चौकस है. जिन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव में उनकी जोरी टैली देख उन्हें चुका करार दिया. वे च्यवनप्राश खाएं. काहे कि मरा हाथी भी सवा लाख का होता है. और ये तो खूब जिंदा है और दम से चिंघाड़ रहा है. सबसे पहले कैंडिडेट डिक्लेयर कर दिए. और अब फिर से 2007 की तर्ज पर सवर्णों का भरोसा हासिल करने की जुगत में हैं. कह रही हैं कि सीएम बनी तो गरीब सवर्णों को आरक्षण दूंगी. लंतरानी हौंक दी खूब. अब उन धरती के बाल लाल का नाम भी तो ले दें. जिन्होंने ये नन्हे नन्हे पोस्टर बनाकर टीवी पर आने का सुख पाया है. जिन्होंने बीजेपी प्रवक्ताओं को रामनवमी का हलुआ खाने के बाद की मीठी नींद से जगाया है. जिन्होंने छुट्टी के दिन के बोरिंग टीवी को ब्रेकिंग न्यूज की लाल पट्टी दी है. रूपेश पांडे कह रहे हैं कि हमने जनभावनाओं का इजहार किया है. राम कसम. एएनआई का माइक उनको माइक नहीं, सीधे 6 अशोक रोड (बीजेपी मुख्यालय) के दरवाजे पर दस्तक देने वाली कुंडी लग रहा था. पांडे जी ने हौंक के खड़का दिया. और टीवी वालों का क्या कहे. पोस्टर को बड़ा बड़ा करके दिखा रहे हैं. प्रवक्ता हैं कि कहते हैं, 1. 10 करोड़ कार्यकर्ता हैं. होंगे ये भी कोई. मगर ये सही नहीं. 2. रूपेश पांडे का बीजेपी से कोई लेना देना नहीं. 3. ये विपक्षी दलों की साजिश है. मौर्या जी से बौखला गए हैं. 4. भावना देखिए. यूपी को सब मिलकर बर्बाद कर रहे हैं. बीजेपी बचाएगी. बहुविकल्पी बयान या सफाई है. अपनी मर्जी का तर्क चुन लें. चलिए अब आगे बढ़ें. मौर्य प्रदेश के तूफानी दौरे पर हैं. राजनीतिक पंडित उनकी बिरादरी (पढ़ें कुशवाहा) की गणित और उसके असर पर खर्च हो रहे हैं. बीजेपी के नेता उनसे तार जोड़ने की जुगत बिठा रहे हैं. राजनाथ सिंह खेमा कह रहा है कि देखो. आखिर में चली तो ठाकुर साहब की ही. आखिर जेटली दरबार के भरोसे फूलपुर से टिकट पाने का सपना देख रहे सिद्धार्थ शंकर सिंह की जगह केशव को वही लाए थे. कोई कह रहा है कि वह ही इकलौते ऐसे थे, जिन पर संघ, अमित शाह, ओम प्रकाश माथुर, पुराने दिग्गज (पढ़ें कल्याण सिंह, उमा भारती, राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र) सबसे कम असहमत थे. मगर सब इस पर सहमत होंगे कि ये बेफिजूल का विवाद है. लल्लन भी यही कहता है. अरे भइया. सब क्षेत्र में जाओ. मोटिवेशन दो. ये क्या छुटभैया नेताओं के साथ बैठे रहिते हो. पिरेस से हो का.

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