क्या राजस्थान में कांग्रेस के जीतते ही मुस्लिमों ने पुलिसवाले को पीट दिया?
इस वायरल वीडियो की सच्चाई जानकर इसे शेयर करने वाले भाजपा समर्थक पछताएंगे...
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राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बाद ये वीडियो वायरल हो रहा है.
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सत्ता बदलने से क्या होता है? इस पार्टी की सरकार जाने और उस पार्टी की सरकार आने से क्या रातोरात कुछ बदल जाता है? एक वायरल पोस्ट के मुताबिक, राजस्थान में कांग्रेस के जीतते ही वहां गुंडाराज आ गया है. इस पोस्ट का दावा है कि राजस्थान में कुछ मुस्लिमों ने मिलकर पुलिसवाले की पिटाई की. बस इसलिए कि पुलिस ने उन्हें बिना हेल्मेट गाड़ी चलाने से रोका था? इस पड़ताल में हम इसी वायरल पोस्ट की छानबीन करेंगे.
क्या है इस वायरल पोस्ट में? एक वीडियो है. किसी सड़क का फुटेज़ है. सड़क के बीच में एक बाइक दिखती है. बाइक पर बैठे इंसान की वर्दी देखकर लगता है कि वो शायद कोई पुलिसकर्मी है. इसी सड़क पर आस-पास सफेद कुर्ता-पजामा और सफेद टोपी पहने कुछ लोग खड़े हैं. अपने पहनावे की वजह से वो मुस्लिम लगते हैं. बाइक वाला आगे बढ़ता है. अगले ही फ्रेम में सफेद कमीज़ पहने एक आदमी उसे रोकता है. देखते ही देखते अगल-बगल मौजूद मुस्लिम आकर बाइक को घेर लेते हैं. जो लोग पीछे से आए हैं, वो जैसे बाइकवाले को पीटने बढ़ते हैं. एकदम पलक झपकाते ही मार हो जाती है वहां. कोई पीट रहा है, कोई छुड़ा रहा है. एकदम अफरा-तफरी की हालत है. बाइक गिर जाती है. बाइक पर बैठा आदमी वहां से भागने लगता है. फिर कई लोग मिलकर एक आदमी को दौड़ाते हैं. वीडियो के आखिरी हिस्से में सड़क पर मौजूद एक आदमी ऊपर की तरफ उंगली से इशारा करता है. शायद वो सड़क किनारे के किसी घर की बालकनी की तरफ इशारा कर रहा है. बालकनी में खड़ा आदमी ही शायद ये वीडियो बना रहा था. इस वीडियो के साथ पोस्ट की शक्ल में एक कहानी चल रही है. इसमें 'सेकुलरों' से सवाल करते हुए लिखा गया है-

कम-कम शेयर्स वाले काफी पोस्ट्स दिख रहे हैं. ये वाली पोस्ट 16 दिसंबर को पोस्ट हुई थी.
11 दिसंबर को राजस्थान विधानसभा चुनाव का नतीज़ा आया था. उसके दो-तीन रोज़ बाद से ही ये पोस्ट शेयर हो रही है.
सच्चाई क्या है? ये वीडियो पहली बार वायरल नहीं हुआ है. मई में कर्नाटक विधानसभा चुनाव हुए थे. वहां कांग्रेस ने जनता दल (सेकुलर) को समर्थन देकर गठबंधन सरकार बनवाई. मुखिया बने कुमारस्वामी. इसके बाद के दिनों में यही वाला वीडियो वायरल हुआ. तब इसे कर्नाटक का बताया जा रहा था. वीडियो के साथ मेसेज लिखा था-
ये पोस्ट देखिए. मिलते-जुलते, लेकिन थोड़े अलग मेसेज के साथ यही वीडियो पहले भी शेयर हो चुका है.

ये वही ट्वीट है, जिसका ठीक ऊपर स्क्रीनशॉट लगाया हुआ है. तारीख देखिए इसकी. जून 2018 की.
इसमें इसी वीडियो का ज़िक्र था. बताया गया था कि ये वीडियो (जो कि उस समय भी वायरल हो रहा था) कर्नाटक का नहीं, रांची का है. इसमें 12 जून, 2018 की 'डेली पायनियर' की एक खबर का जिक्र था.
इसी खबर के हवाले से वीडियो में हो रही घटना के बारे में बताया गया था. जो बताया गया, उसके मुताबिक हुआ ये था-
ये ऑल्ट न्यूज़ की खबर का स्क्रीनशॉट है. इसमें भी उसी वीडियो को रेफरेंस है, जो अब राजस्थान का बताकर शेयर हो रही है. मगर जिस समय ऑल्ट ने ये स्टोरी की थी, तब ये वीडियो कर्नाटक का बताकर शेयर की जा रही थी.
ऑल्ट न्यूज ने दैनिक जागरण और जनसत्ता की रिपोर्ट्स का भी ज़िक्र किया था. इस घटना से जुड़ी 13 जून, 2018 को छपी दैनिक जागरण की खबर की हेडिंग थी-

ये दैनिक जागरण में छपी खबर का स्क्रीनशॉट है. इसमें रांची की घटना से जुड़े वीडियो का स्क्रीनग्रैब है. देखिए, यही राजस्थान का बताकर वायरल की जा रही वीडियो का सीन है न.
दरोगा को पीटा तो गया था, मगर उस घटना का संदर्भ अलग है इस खबर में एक वीडियो का स्क्रीनशॉट लगाया गया था. ये उसी वीडियो का स्क्रीनशॉट था, जो अब राजस्थान का बताकर शेयर हो रही है. खबर के मुताबिक, वीडियो में नज़र आ रहे पुलिसकर्मी का नाम है अनिल कुमार गुप्ता. वो रांची के लोअर बाज़ार थाने में दरोगा थे. लोगों ने पहले उन्हें मारा. उनकी बाइक गिरा दी. फिर चप्पल से पीटा. बाइक की चाभी खींच ली. इस घटना को लेकर डेली मार्केट थाने में तीन अलग-अलग FIR भी दर्ज हुए. इनमें 1,000 लोगों को नामजद किया गया. आरोपियों में कई मुस्लिम थे.
12 जून, 2018 को जनसत्ता में भी ये खबर आई.
इसके मुताबिक, भाजयुमो ने बाइक रैली निकाली और उसमें जमकर नारेबाजी की. नारेबाजी को लेकर डेली मार्केट इलाके में भाजयुमो कार्यकर्ताओं की स्थानीय लोगों और दुकानदारों से झड़प हो गई. भीड़ ने भाजयुमो कार्यकर्ताओं और पुलिस को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा.

ये जनसत्ता की खबर का स्क्रीनशॉट देखिए. घटना क्या हुई थी, इसका डिटेल दिख जाएगा आपको. हमें वायरल वीडियो में जो शख्स पिटता नज़र आ रहा है, वो असल में रांची के लोअर बाज़ार थाने के दरोगा अनिल कुमार गुप्ता हैं.
असली में जहां का वीडियो है, वहां बीजेपी की ही सरकार है अब वायरल मेसेज गढ़ने और उसे आगे चलाने वालों का बिजनस देखिए. पहले उन्होंने झारखंड की घटना का वीडियो उठाया. फिर उसको कर्नाटक का बताकर चला दिया. अपना अजेंडा चलाने के लिए कांग्रेस का ऐंगल दे दिया. फिर कर्नाटक जब पुराना हो गया, तो अब राजस्थान का बताकर इसे इस्तेमाल कर रहे हैं. मकसद वही पुराना वाला. लोगों को डराओ कि कांग्रेस का राज आया, तो ऐसा ही अंधेर आएगा. ऐसे डराकर लोगों से बीजेपी के लिए वोट करने को कहा जा रहा है. ये भी कहा जा रहा है कि बीजेपी को नहीं जिताया, तो ऐसे ही दिन देखोगे. जबकि असलियत में झारखंड में बीजेपी की सरकार है. मुख्यमंत्री हैं रघुबर दास. जिस तर्क से वायरल पोस्ट में लोगों को कांग्रेस को वोट देने से डराया जा रहा है, उस तर्क से अब क्या होगा, सोचिए!

रघुबर दास झारखंड की बीजेपी सरकार के मुखिया हैं. वायरल पोस्ट में जिस वीडियो के सहारे लोगों को कांग्रेस के नाम से डराया जा रहा है, वो घटना असल में झारखंड की है. इस लॉजिक से तो लोगों को बीजेपी को वोट देने से बचना चाहिए!
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क्या है इस वायरल पोस्ट में? एक वीडियो है. किसी सड़क का फुटेज़ है. सड़क के बीच में एक बाइक दिखती है. बाइक पर बैठे इंसान की वर्दी देखकर लगता है कि वो शायद कोई पुलिसकर्मी है. इसी सड़क पर आस-पास सफेद कुर्ता-पजामा और सफेद टोपी पहने कुछ लोग खड़े हैं. अपने पहनावे की वजह से वो मुस्लिम लगते हैं. बाइक वाला आगे बढ़ता है. अगले ही फ्रेम में सफेद कमीज़ पहने एक आदमी उसे रोकता है. देखते ही देखते अगल-बगल मौजूद मुस्लिम आकर बाइक को घेर लेते हैं. जो लोग पीछे से आए हैं, वो जैसे बाइकवाले को पीटने बढ़ते हैं. एकदम पलक झपकाते ही मार हो जाती है वहां. कोई पीट रहा है, कोई छुड़ा रहा है. एकदम अफरा-तफरी की हालत है. बाइक गिर जाती है. बाइक पर बैठा आदमी वहां से भागने लगता है. फिर कई लोग मिलकर एक आदमी को दौड़ाते हैं. वीडियो के आखिरी हिस्से में सड़क पर मौजूद एक आदमी ऊपर की तरफ उंगली से इशारा करता है. शायद वो सड़क किनारे के किसी घर की बालकनी की तरफ इशारा कर रहा है. बालकनी में खड़ा आदमी ही शायद ये वीडियो बना रहा था. इस वीडियो के साथ पोस्ट की शक्ल में एक कहानी चल रही है. इसमें 'सेकुलरों' से सवाल करते हुए लिखा गया है-
किधर हो सेक्युलरो? राजस्थान में एक पुलिस ऑफिसर सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहा था. मुल्लो (कई जगह इसे लुल्लो भी लिखा है) को गलत ड्राइविंग करने पर बिना हेलमेट के गाड़ी चलाने पर, दंगा करने से रोका तो मुल्लो ने मिलकर पुलिसवाले की जमकर पिटाई कर दी. न कोई लिब्रेन्दू आया न कोई भांड मीडिया आई क्योंकि सरकार कांग्रेस की है.
किधर हो सेक्युलरो?
#राजस्थान_में_एक_पुलिस ऑफिसर सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहा था , मुल्लो को गलत ड्राइविंग करने पर बिना हेलमेट के गाड़ी चलाने पर, दंगा करने पर रोका तो मुल्लो ने मिलकर पुलिस वाले कि जमकर पिटाई करदी, ना कोई लिब्रेन्दू आया ना कोई भांड मीडिया आई क्योंकि सरकार कांग्रेस की है
Posted by राम शर्मा
on Sunday, December 16, 2018

कम-कम शेयर्स वाले काफी पोस्ट्स दिख रहे हैं. ये वाली पोस्ट 16 दिसंबर को पोस्ट हुई थी.
11 दिसंबर को राजस्थान विधानसभा चुनाव का नतीज़ा आया था. उसके दो-तीन रोज़ बाद से ही ये पोस्ट शेयर हो रही है.
सच्चाई क्या है? ये वीडियो पहली बार वायरल नहीं हुआ है. मई में कर्नाटक विधानसभा चुनाव हुए थे. वहां कांग्रेस ने जनता दल (सेकुलर) को समर्थन देकर गठबंधन सरकार बनवाई. मुखिया बने कुमारस्वामी. इसके बाद के दिनों में यही वाला वीडियो वायरल हुआ. तब इसे कर्नाटक का बताया जा रहा था. वीडियो के साथ मेसेज लिखा था-
जिस *&$#*& को लगता है कि देश में 2019 में कांग्रेस आना चाहिए कांग्रेसी चमचे को ये वीडियो देख लेना चाहिए. कर्नाटक में एक महीना भी नहीं हुआ है सरकार बने और ये हालात है. वीडियो में मुस्लिम बाजार में मुस्लिमों ने हिंदू और पुलिस को कैसे दौड़ा दौड़ाकर पिट रहा है. भारत में सुरक्षित रहना है.

ये पोस्ट देखिए. मिलते-जुलते, लेकिन थोड़े अलग मेसेज के साथ यही वीडियो पहले भी शेयर हो चुका है.

ये वही ट्वीट है, जिसका ठीक ऊपर स्क्रीनशॉट लगाया हुआ है. तारीख देखिए इसकी. जून 2018 की.
वीडियो है कहां का? हमें 12 जून, 2018 को ऑल्ट न्यूज पर अर्जुन सिद्धार्थ की लिखी खबर दिखी.जिस भड़वे को लगता है कि देश में 2019 में कांग्रेस आना चाहिए कांग्रेसी चमचे को ये वीडियो देख लेना चाहिए कर्नाटक में 1महीना भी नही हुआ है सरकार बने और ये हालात है वीडियो में मुस्लिम बाजार में मुस्लिमो ने हिन्दू और पुलिस को कैसे दौड़ा दौड़ा कर पिट रहा है भारत में सुरक्षित रहना है pic.twitter.com/FIz5BpnNGd
— Sunilkarmunge JaiHind #NAMO (@sunilkarmunge21) June 12, 2018
इसमें इसी वीडियो का ज़िक्र था. बताया गया था कि ये वीडियो (जो कि उस समय भी वायरल हो रहा था) कर्नाटक का नहीं, रांची का है. इसमें 12 जून, 2018 की 'डेली पायनियर' की एक खबर का जिक्र था.
इसी खबर के हवाले से वीडियो में हो रही घटना के बारे में बताया गया था. जो बताया गया, उसके मुताबिक हुआ ये था-
झारखंड की राजधानी रांची में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने एक बाइक रैली निकाली. केंद्र में बीजेपी की सरकार के चार साल पूरे होने के मौके पर ये बाइक रैली हुई. इसमें कथित तौर पर भड़काऊ नारेबाजी की गई. ये बाइक रैली डेली मार्केट इलाके से गुज़र रही थी. भड़काऊ और सांप्रदायिक नारेबाजी सुनकर वहां स्थानीय लोगों ने इन्हें रोका. इसपर दोनों पक्षों के बीच हिंसा हुई. पुलिस पहुंची, तब जाकर झगड़ा-फसाद रुका.

ये ऑल्ट न्यूज़ की खबर का स्क्रीनशॉट है. इसमें भी उसी वीडियो को रेफरेंस है, जो अब राजस्थान का बताकर शेयर हो रही है. मगर जिस समय ऑल्ट ने ये स्टोरी की थी, तब ये वीडियो कर्नाटक का बताकर शेयर की जा रही थी.
ऑल्ट न्यूज ने दैनिक जागरण और जनसत्ता की रिपोर्ट्स का भी ज़िक्र किया था. इस घटना से जुड़ी 13 जून, 2018 को छपी दैनिक जागरण की खबर की हेडिंग थी-
रांची में बवाल के दौरान दरोगा को उपद्रवियों ने दौड़ाकर पीटा, वर्दी फाड़ी

ये दैनिक जागरण में छपी खबर का स्क्रीनशॉट है. इसमें रांची की घटना से जुड़े वीडियो का स्क्रीनग्रैब है. देखिए, यही राजस्थान का बताकर वायरल की जा रही वीडियो का सीन है न.
दरोगा को पीटा तो गया था, मगर उस घटना का संदर्भ अलग है इस खबर में एक वीडियो का स्क्रीनशॉट लगाया गया था. ये उसी वीडियो का स्क्रीनशॉट था, जो अब राजस्थान का बताकर शेयर हो रही है. खबर के मुताबिक, वीडियो में नज़र आ रहे पुलिसकर्मी का नाम है अनिल कुमार गुप्ता. वो रांची के लोअर बाज़ार थाने में दरोगा थे. लोगों ने पहले उन्हें मारा. उनकी बाइक गिरा दी. फिर चप्पल से पीटा. बाइक की चाभी खींच ली. इस घटना को लेकर डेली मार्केट थाने में तीन अलग-अलग FIR भी दर्ज हुए. इनमें 1,000 लोगों को नामजद किया गया. आरोपियों में कई मुस्लिम थे.
12 जून, 2018 को जनसत्ता में भी ये खबर आई.
इसके मुताबिक, भाजयुमो ने बाइक रैली निकाली और उसमें जमकर नारेबाजी की. नारेबाजी को लेकर डेली मार्केट इलाके में भाजयुमो कार्यकर्ताओं की स्थानीय लोगों और दुकानदारों से झड़प हो गई. भीड़ ने भाजयुमो कार्यकर्ताओं और पुलिस को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा.

ये जनसत्ता की खबर का स्क्रीनशॉट देखिए. घटना क्या हुई थी, इसका डिटेल दिख जाएगा आपको. हमें वायरल वीडियो में जो शख्स पिटता नज़र आ रहा है, वो असल में रांची के लोअर बाज़ार थाने के दरोगा अनिल कुमार गुप्ता हैं.
असली में जहां का वीडियो है, वहां बीजेपी की ही सरकार है अब वायरल मेसेज गढ़ने और उसे आगे चलाने वालों का बिजनस देखिए. पहले उन्होंने झारखंड की घटना का वीडियो उठाया. फिर उसको कर्नाटक का बताकर चला दिया. अपना अजेंडा चलाने के लिए कांग्रेस का ऐंगल दे दिया. फिर कर्नाटक जब पुराना हो गया, तो अब राजस्थान का बताकर इसे इस्तेमाल कर रहे हैं. मकसद वही पुराना वाला. लोगों को डराओ कि कांग्रेस का राज आया, तो ऐसा ही अंधेर आएगा. ऐसे डराकर लोगों से बीजेपी के लिए वोट करने को कहा जा रहा है. ये भी कहा जा रहा है कि बीजेपी को नहीं जिताया, तो ऐसे ही दिन देखोगे. जबकि असलियत में झारखंड में बीजेपी की सरकार है. मुख्यमंत्री हैं रघुबर दास. जिस तर्क से वायरल पोस्ट में लोगों को कांग्रेस को वोट देने से डराया जा रहा है, उस तर्क से अब क्या होगा, सोचिए!

रघुबर दास झारखंड की बीजेपी सरकार के मुखिया हैं. वायरल पोस्ट में जिस वीडियो के सहारे लोगों को कांग्रेस के नाम से डराया जा रहा है, वो घटना असल में झारखंड की है. इस लॉजिक से तो लोगों को बीजेपी को वोट देने से बचना चाहिए!
क्या राजस्थान में कांग्रेस की जीत पर मुसलमानों ने मार्च निकाला?
क्या चीन से डरकर कांग्रेस ने इस पुल को नहीं बनवाया था?
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