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पता चल गया है, JNU में हिंसा के वक्त पुलिस कैम्पस के अंदर क्यों नहीं गई थी?

शाम चार बजे हमला शुरू हुआ फिर 6:30 बजे तक कैम्पस के अंदर क्यों नहीं गई पुलिस.

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9 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 9 जनवरी 2020, 08:57 AM IST)
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JNU VC जगदीश कुमार (फोटो: PTI)
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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी. JNU. 5 जनवरी की शाम 6.24 बजे जब यहां पेरियार हॉस्टल और साबरमती ढाबे पर हिंसा हो रही थी, तब यूनिवर्सिटी के कुलपति जगदीश कुमार ने दिल्ली पुलिस के साउथवेस्ट DCP, ACP और वसंत कुंज (उत्तरी) पुलिस स्टेशन को WhatsApp पर मैसेज किया था. उन्होंने पुलिस को कैंपस में आकर कारवाई करने के बजाए गेट पर रहने को कहा. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मुताबिक़, जगदीश कुमार ने मैसेज में लिखा,
JNU कैंपस में अस्थिर स्थिति को देखते हुए, मैं आपसे कैंपस के गेट पर पुलिस तैनात करने की गुजारिश करता हूं ताकि मुसीबत की स्थिति में वे जल्दी से कैंपस में पहुंच सकें.
इस बात को 'पुलिस की ओर से लापरवाही' के लिए बनाई गई जांच रिपोर्ट में लिखा गया है. JNU हिंसा की रिपोर्ट के लिये वेस्ट रेंज के जॉइंट कमिश्नर अमूल्य पटनायक के निर्देश पर शालिनी सिंह की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई गई है. कमिटी की रिपोर्ट आने वाले दिनों में गृह मंत्रालय के साथ शेयर की जाएगी. इससे पहले पुलिस ने एक और रिपोर्ट में लिखा था, नकाबपोश बदमाश पहली बार JNU कैंपस में दोपहर 2.30 बजे जमा हुए थे. इसके बाद कैंपस से 6 बजे तक पुलिस को 23 बार कॉल किया गया था. कुलपति के मैसेज करने के बाद यूनिवर्सिटी और पुलिस के बीच फिर शाम 7:45 बजे को बातचीत हुई. इस वक्त यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने आधिकारिक तौर पर चिट्ठी लिखी और कैंपस में पुलिस की तैनाती की मांग की. रजिस्ट्रार प्रमोद से जब 6 जनवरी को बातचीत की गई तो उन्होंने बताया था-
पुलिस शाम 6.30 बजे तक परिसर में थी. आधिकारिक तौर पर चिट्टी लिखने से पुलिस को पहले भी अनौपचारिक रूप से भी बताया गया था. कुलपति ने शाम करीब 5.30 बजे पुलिस से संपर्क किया था.
6 जनवरी को मीडिया से बातचीत करते हुए कुलपति जगदीश ने बताया था-
अगर यहां कानून व्यवस्था की जरूरत होती है तो हम तुरंत पुलिस के पास नहीं पहुंच जाते. हम देखते हैं कि क्या हम खुद से इसे संभाल सकते हैं. लेकिन चीजें अगर हाथ से बाहर निकलने लगती हैं तो हम पुलिस से संपर्क करते हैं. हम नहीं चाहते हैं कि कोई निर्दोष घायल हो. 5 जनवरी को भी हमने यही किया.
दिल्ली पुलिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी कैंपस दोपहर से ही गर्माया हुआ था. इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि दोपहर 3.45 से 4.15 बजे के बीच करीब 40-50 नकाबपोश लोगों ने पेरियार हॉस्टल में छात्रों पर हमला किया. नकाबपोश बदमाशों ने खिड़कियां और दरवाजे तोड़े. इसके बाद पुलिस आई और तब सिचुएशन कंट्रोल में आया. पुलिस सूत्रों ने बताया है कि DCP साउथवेस्ट ने शाम 5-5.15 बजे कैंपस का दौरा किया था, लेकिन उस दौरान स्थिति सामान्य होने पर मेन गेट से ही लौट गए. हिंसा का दूसरा दौर शाम 6 बजे से पहले शुरू हुआ जब JNU शिक्षक संघ के सदस्य और कुछ छात्र साबरमती ढाबा पर 'शांति मार्च' के लिए जमा हुए थे. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक़, नकाबपोशों ने इन लोगों पर पथराव किया. इसके बाद ये लोग साबरमती हॉस्टल में घुसकर तोड़-फोड़ करने लगे और छात्रों को पीटा.
वीडियो- JNU हिंसा: दृष्टिबाधित छात्र की बातें सुनिए, हमले के वक्त जेएनयू में कैसा खौफनाक मंजर था

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