शिवपाल यादव बोले, अफसर दामाद को यूपी आने दो. मोदी ने कहा, तथास्तु
कार्मिक मंत्रालय के तीन बार मना करने के बाद भी पीएम ने एक चिट्ठी पर तमिलनाडु से यूपी आने की राह खोल दी.
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फोटो - thelallantop
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यूपी में सपा सरकार के कैबिनेट मंत्री और मुलायम सिंह यादव के छोटकए भाई हैं. नाम शिवपाल यादव. उनके दामाद हैं अजय यादव. अभी बाराबंकी जिले के डीएम हैं. इनके डेप्युटेशन के लिए शिवपाल यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी. अब सपा वाले तो बीजेपी वालों के एंटी होते हैं न? तो आपके हिसाब से मोदी जी ने क्या किया होगा?
फिर शिवपाल सिंह एंटर भए. अपने लेटर हेड पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी. पत्तर का असर हुआ. पीएमओ ने उसे हाई प्रायोरिटी पर कार्मिक मंत्रालय को रेफर किया. तीन बार मना किया गया था, वो फैक्ट हवा हुआ. कारण का निवारण हुआ मापदंड तेरह दंड हुए और अजय यादव तमिलनाडु से उत्तरप्रदेश जा पहुंचे. लखनऊ के सबसे पास बाराबंकी है, वहीं डीएम हो पड़े. अपने ऑर्डर में एसीसी ने अजय यादव के डेप्युटेशन को ‘स्पेशल केस’ बताया और मंज़ूरी दे दी. वही एसीसी दैवयोग से जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं.
वैसे किसी भी डेप्युटेशन में आखिरी फैसला लेना एसीसी का ही काम है, लेकिन बतावो स्पेशल केस? काहे के वो नेताजी के दामाद हैं. काहे के नेताजी ने मोदी जी को चिट्ठी लिख दी. बाकी बातें हटाओ. मोदी जी से एक बात सीखनी चाहिए. दामाद चाहे जिसका हो. सुविधा का ख्याल पूरे गांव को रखना चाहिए.

1. चिट्ठी फाड़ दी? 2. चिट्ठी पर समोसा धर के खा गए? 3. कागज का एरोप्लेन बना के उड़ा दिया? 4. कागज पर घर और सूरज वाली ड्राइंग बना ली?आन्हां इनमें से कुछ नहीं. नतीजा यह निकला कि प्रधानमंत्री ने फुर्ती में संज्ञान लिया और अजय यादव के डेप्युटेशन को 3 साल के लिए यूपी में मंजूरी दे दी. माने शिवपाल यादव के दामाद मोदी जी कि सहृदयता के चलते यूपी में रहेंगे.
अजय यादव जो हैं. उनका कैडर यूपी नहीं है. वो 2010 बैच के अफसर हैं, तमिलनाडु कैडर के. पिछले साल 28 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने उनको तीन साल के लिए यूपी में पोस्टिंग दी थी. उनकी डेप्युटेशन की अर्जी को मर्जी देकर. ये अफसरों की पोस्टिंग पर फैसला देने के लिए बाकायदा एक कमेटी भी बनी हुई है. और दैवयोग से उसके अध्यक्ष कौन हैं? प्रधानमंत्री हैं. माने गेंद अंत में उन्हीं के पास आती है.वैसे ये जानिए कि ये जो कमेटी एसीसी उर्फ अपॉइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट है, उसकी मंजूरी मिलने के पहले अर्ज़ी कार्मिक मंत्रालय के पास जाती है. और उस मंत्रालय ने अजय यादव की अर्जी को तीन बार रिजेक्ट कर दिया था. वजह ये बताई गई कि अपने कैडर में कम से कम 9 साल सर्विस करना जरुरी होता है. लेकिन अजय यादव तो 2010 बैच के हैं. साथ में यूपी आने के लिए जो वजहें बताई गईं वो भी बहुत मामूली सी थीं. ये मई 2015 की बात है.
फिर अजय यादव ने कार्मिक मंत्रालय को बताया हमारी मैडम लखनऊ में रहती हैं. एक बच्चा भी अभी हुआ है. उसको पालने में बहुत दिक्कत हो रही है. मम्मी की तबियत भी खराब रहती है इसलिए हमारी बदली यूपी कर दीजिए. अपॉइंटमेंट कमेटी ने भी इस वजह को पर्याप्त नहीं माना और रिजेक्ट कर दिया.
फिर शिवपाल सिंह एंटर भए. अपने लेटर हेड पर प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी. पत्तर का असर हुआ. पीएमओ ने उसे हाई प्रायोरिटी पर कार्मिक मंत्रालय को रेफर किया. तीन बार मना किया गया था, वो फैक्ट हवा हुआ. कारण का निवारण हुआ मापदंड तेरह दंड हुए और अजय यादव तमिलनाडु से उत्तरप्रदेश जा पहुंचे. लखनऊ के सबसे पास बाराबंकी है, वहीं डीएम हो पड़े. अपने ऑर्डर में एसीसी ने अजय यादव के डेप्युटेशन को ‘स्पेशल केस’ बताया और मंज़ूरी दे दी. वही एसीसी दैवयोग से जिसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री हैं.
वैसे किसी भी डेप्युटेशन में आखिरी फैसला लेना एसीसी का ही काम है, लेकिन बतावो स्पेशल केस? काहे के वो नेताजी के दामाद हैं. काहे के नेताजी ने मोदी जी को चिट्ठी लिख दी. बाकी बातें हटाओ. मोदी जी से एक बात सीखनी चाहिए. दामाद चाहे जिसका हो. सुविधा का ख्याल पूरे गांव को रखना चाहिए.


