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साड़ी का पल्लू राइट से लेफ्ट होने पर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम ने विश्वभारती यूनिवर्सिटी में भाषण दिया है

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विश्वभारती के शताब्दी वर्ष समारोह के भाषण में पीएम मोदी ने साड़ी के पल्लू के लेफ्ट की तरफ होने की थ्योरी भी बताई.
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अमित
24 दिसंबर 2020 (Updated: 24 दिसंबर 2020, 08:20 AM IST)
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गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती यूनिवर्सिटी ने 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 24 दिसंबर को पश्चिम बंगाल में शांति निकेतन स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय के एक समारोह को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया. बाकी बातों के अलावा पीएम मोदी ने टैगोर का गुजरात का कनेक्शन भी बताया. इसी के साथ ही उन्होंने महिलाओं के साड़ी के पल्लू को लेकर रोचक किस्सा शेयर किया. आइए जानते हैं पीएम मोदी ने कैसे जोड़ा गुरुदेव का गुजरात कनेक्शन, और क्या है उनकी साड़ी के पल्लू की थ्योरी.
गुरुदेव का गुजरात कनेक्शन
पीएम मोदी ने गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर का गुजरात कनेक्शन बताने के लिए उनके बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर की बात की. सत्येंद्र नाथ टैगोर अंग्रेजों के वक्त में आईसीएस थे, जैसे अब आईएएस अधिकारी होते थे. वह कुछ बरसों के लिए गुजरात भी पोस्टेड रहे थे. पीएम मोदी ने उनका जिक्र करते हुए कहा-
गुरुदेव के बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर जब आईसीएस में थे तो उनकी नियुक्ति अहमदाबाद में भी हुई. गुरुदेव अक्सर गुजरात जाते थे. उन्होंने वहां लंबा समय भी बिताया. उन्होंने वहां पर अपनी दो लोकप्रिय बांग्ला कविताएं 'बंदी ओ अमार' और 'निरोग रजनी देखो' की रचनाएं कीं. अपनी प्रसिद्ध रचना क्षुदित पाषाण का एक हिस्सा भी उन्होंने वहीं लिखा.
पीएम मोदी ने बताया कि अपने बड़े भाई के गुजरात प्रवास के दौरान रविंद्रनाथ टैगोर ने भी गुजरात में लंबा वक्त बिताया.
पीएम मोदी ने बताया कि अपने बड़े भाई के गुजरात प्रवास के दौरान रविंद्रनाथ टैगोर ने भी गुजरात में लंबा वक्त बिताया था.

साड़ी के पल्लू का टैगोर परिवार से कनेक्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बोलते हुए कहा-
एक और तथ्य है, जिस पर महिला सशक्तीकरण से जुड़े संगठनों को अध्ययन करना चाहिए. रविंद्र नाथ टैगोर के भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर की पत्नी ज्ञानन्दिनी देवी जी जब अहमदाबाद में रहती थीं तो उन्होंने देखा कि स्थानीय महिलाएं अपनी साड़ी के पल्लू को दाएं कंधे पर रखती थीं. दाएं कंधे पर पल्लू रहने से महिलाओं को काम करने में दिक्कत होती थी. उन्होंने इस परेशानी को देखकर एक आइडिया सोचा. उन्होंने साड़ी का पल्लू बाएं कंधे पर डालने का आइडिया निकाला, पल्लू को दाएं से बाएं कंधे पर लिया. मुझे सही-सही तो नहीं पता लेकिन कहते हैं कि बाएं कंधे पर साड़ी का पल्लू उन्हीं की देन है.
स्टूडेंट्स को दिया टास्क
भाषण के दौरान पीएम मोदी ने रविंद्रनाथ टैगोर की लिखी कई बांग्ला पंक्तियां भी सुनाईं. मोदी ने बंगाल की संस्कृति और गुरुदेव से जुड़ी कई बातें बताईं. साथ ही, विश्वभारती के स्टूडेंट्स को टास्क भी दिया. उन्होंने कहा कि हर साल होने वाला पौष मेला, जो इस बार नहीं हो पाया, उसके लिए आप लोग प्रयास करें. जिन हैंडीक्राफ्ट्स वर्कर्स को इस मेले से फायदा होता था, उनकी लिस्ट निकालकर उनसे संपर्क करें. उन्हें ऑनलाइन या सोशल मीडिया पर लाकर उनके सामान को बिकवाने में मदद करें.
पीएम मोदी के इस कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी मौजूद रहे.
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विश्वभारती यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में भाषण देते हुए पीएम मोदी ने स्टूडेंट्स को हैडीक्राफ्ट्स के कलाकारों को ऑनलाइन लाने का टास्क भी दिया.

1921 में हुई थी स्थापना
विश्व भारती यूनिवर्सिटी की स्थापना 1921 में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने की थी. यह देश की सबसे पुरानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी है. इसे मई 1951 में केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा मिला था.

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