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PM बोले, कट्टरपंथ से लड़ना सिखाता है औरंगजेब के खिलाफ गुरु तेग बहादुर का संघर्ष

पीएम मोदी वाराणसी में भी औरंगजेब का जिक्र कर चुके हैं.

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25 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 25 दिसंबर 2021, 12:53 PM IST)
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों को संबोधित करते PM Modi (फोटो: PTI)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने एक बार फिर से मुगल शासक औरंगजेब का जिक्र किया है. गुरुपर्व के अवसर पर गुजरात के कच्छ जिले के लखपत गुरुद्वारा में एक सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि औरंगजेब के खिलाफ गुरु तेग बहादुर के संघर्ष ने देश को यह सीख दी है कि आतंकवाद और धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ किस तरह से लड़ना है. उन्होंने आगे कहा कि सिख गुरुओं ने जिन खतरों के खिलाफ चेतावनी दी थी, वो आज भी बने हुए हैं. इससे पहले प्रधानमंत्री ने वाराणसी में औरंगजेब का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि जब-जब कोई औरंगजेब भारतीय संस्कृति को नष्ट करने आया, तब-तब इस धरती से शिवाजी का उदय हुआ. 'गुरुओं ने भारत को बचाया' पीएम मोदी के वाराणसी में दिए गए बयान को यूपी चुनाव से पहले बीजेपी के एजेंडे के हिस्से के तौर पर देखा गया. विपक्षी पार्टियों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पीएम के ऊपर ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया था. वहीं लखपत गुरुद्वारे में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों के संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,
"हमारे गुरु हमें जिन खतरों के प्रति आगाह किया करते थे, वो आज भी उसी तरह से बने हुए हैं. हमें सचेत रहना है और देश की रक्षा करनी है. मुझे पूरा विश्वास है कि गुरु नानक देव जी के आशीर्वाद के साथ हम अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने में सफल होंगे और देश नई ऊंचाइयों को छुएगा."
प्रधानमंत्री ने आगे कहा,
"जब गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था, तब विदेशी हमलावर भारत के स्वाभिमान को नष्ट कर रहे थे. जो भारत पूरी दुनिया को रास्ता दिखाता था, वो खतरे में था. अगर गुरु नानक देव जी ने अपने ज्ञान का प्रकाश ना फैलाया होता, तो पता नहीं क्या होता. गुरु नानक देव जी और उनके बाद के गुरुओं ने ना केवल भारत की आत्मा को जिंदा रखा बल्कि देश को सुरक्षित बनाए रखने का भी रास्ता निकाला."
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का पूरा जीवन राष्ट्र को प्राथमिकता देने का उदाहरण है. प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय बहुत उत्पीड़न था, लेकिन गुरु नानक देव जी के बाद आए सिख गुरु देश के लिए बलिदान देने से कभी पीछे नहीं हटे. पीएम मोदी ने कहा,
"दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह का जीवन भी बलिदान का उदाहरण है. उन्होंने अपना सर्वस्व देश के लिए बलिदान कर दिया. और कैसे वीर बाबा बंदा सिंह बहादुर ने एक साम्राज्य की नींव हिला दी. कैसे सिख योद्धाओं ने नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली के हमलों के सामने बलिदान दिया."
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने यह भी याद किया कि साल 1998 के चक्रवाती तूफान में लखपत गुरुद्वार क्षतिग्रस्त हो गया था. 2001 के कच्छ भूकंप में भी इस गुरुद्वारे को क्षति पहुंची थी. पीएम मोदी ने आगे कहा कि कैसे उनकी सरकार ने पाकिस्तान के साथ करतारपुर कॉरीडोर को शुरू किया और कैसे अफगानिस्तान से गुरू ग्रंथ साहिब को वापस लाया गया.

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