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प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री को मरवा देगा तो बचेगा क्या? सिर्फ पॉलिटिक्स!

केजरीवाल ने कहा, 'बौखलाए मोदी मुझे मरवा सकते हैं.' ये हैं वजहें...

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28 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 28 जुलाई 2016, 06:05 AM IST)
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फोटो - thelallantop
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शायद पहली बार है, जब एक मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री से खुद की जान को खतरा बताया है. ऐसे में 'कम सियासी समझ' वाले मन में ये सवाल आता है कि जब देश का प्रधानमंत्री ही मुख्यमंत्री को मरवा देगा. तो फिर बचेगा क्या? बचेगी पॉलिटिक्स, जो दबाकर दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच चल रही है. जो अजीबोगरीब इलज़ाम लगवाती है. और जो विपक्षी विधायकों की गिरफ्तारी में अतिरिक्त जल्दबाजी दिखाती है. दिमाग से काम नहीं कर रहे मोदी. बौखलाए मोदी मुझे मरवा सकते हैं: केजरीवाल दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल बुधवार शाम नई ब्रेकिंग न्यूज लेकर आए. ऐसी ब्रेकिंग न्यूज, जो टीवी और सोशल मीडिया पर छाई रही. केजरीवाल ने वीडियो में कहा, 'मोदी जी हमको लेकर बौखलाए हुए हैं. गुस्से में हैं बहुत ज्यादा हमको लेकर. और वो लॉजिकली नहीं सोच रहे हैं. जितने विधायकों को पकड़ते हैं. तीन दिन में विधायक बाहर आ जाते हैं. एक भी केस में कोर्ट साबित नहीं कर पाए ये कुछ. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जो लताड़ा है. मोदी जी दिमाग से काम नहीं कर रहे हैं. अब ये क्यों बौखलाए हुए हैं. अगर किसी देश का राजा बौखलाहट में फैसले लेने लगे. तो ये मेरे लिए सबसे चिंता का विषय है.
'मैं सारे विधायकों, वॉलिएंटर्स को ये कहना चाहता हूं कि ये क्रिटिकल वक्त है. आने वाले वक्त में ये कुछ भी कर सकते हैं. ये हमें मरवा सकते हैं. ये मुझे मरवा सकते हैं. अपने-अपने परिवार में बात कर लो. अगर कुर्बानी देने के लिए तैयार हो, तो साथ रहो.'
'हमारे खिलाफ चलाए कैंपेन के मास्टरमाइंड मोदी और अमित शाह हैं.' डरपोक कांग्रेस भी कुछ नहीं बोल रही! दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है. अरविंद केजरीवाल का प्यार (पढ़ें तरस) कांग्रेस के लिए भी नजर आया. बोले, 'मोदी ने सारी पार्टियों को कुचल दिया है. कभी देखा है कि कांग्रेस कोई आवाज उठा रही हो. दलितों, रोहित वेमुला को कुचल दिया. हमें कुचलने में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी. दिल्ली पुलिस, सीबीआई, ACB छोड़ दी. इनके सारे दमन के बाद हमने झुकना बंद कर दिया. इससे ही ये उदास हैं. AAP के सारे कार्यकर्ता, विधायक सुन लें. जेल तो बहुत छोटी चीज है.जेल अब सबको जाना पड़ेगा, सारे विधायकों को जाना पड़ेगा. आपका कुछ भी हो सकता है. अगर तैयारी नहीं हैं. मन में कुछ कमजोरी है तो छोड़ दो कुछ दिनों के लिए.' केजरीवाल कहना क्या चाहते हो? अरविंद केजरीवाल यूं तो पहले भी खुल्लम खुल्ला मोदी का विरोध कर चुके हैं. पर जान से मार देने वाला ये बयान अनूठा है. केजरीवाल के इस बयान के मायने खोजें तो कुछ वजह समझ में आती हैं. 1. छोटी देवरानी बन गए हैं केजरीवाल: घरों (सीरियल वाले भी) में एक छोटी देवरानी होती है. जो अपनी नजर में गुणी होती है. पढ़ी लिखी होती है. समझ भी अच्छी होती है. उसे लगता है कि वो घर और बाहर दोनों संभाल सकती है. पर हमारे समाज और परिवारों की इसे खराबी समझ लीजिए कि नई छोटी देवरानी को जल्दी वो अधिकार नहीं दिए जाते, जो जेठानी, सास या घर के किसी बड़े को मिले होते हैं. देवरानी को लगता है कि उसके टैलेंट का यूज नहीं हो रहा. उसकी अपनी लाइफ खराब हो रही है. दिल्ली सरकार-केंद्र वाले केस में केजरीवाल छोटी देवरानी बन गए हैं. जिसे छूट नहीं मिल रही है मन का करने की. घूंघट का काम कर रहा है दिल्ली को अब तक न मिला पूर्ण राज्य का दर्जा. 2. विधायकों की गिरफ्तारी की खिसियाहट: AAP विधायक रोज लपके जा रहे हैं. केंद्र के अंडर आनेवाली दिल्ली पुलिस लूटपाट, मारपीट और कई बार रेप के मामलों में भी एक्शन लेने में वो तेजी नहीं दिखाती है. जित्ती तेजी वो AAP विधायकों को पकड़ने में दिखाती है. अब चूंकि टीवी, अखबारों पर खबर तो यही आती है न. AAP विधायक गिरफ्तार. ऐसे में केजरीवाल का 'मोदी मे किल मी' वाला बयान काउंटर अटैक है. कि तुम देखते जाओ, गिरफ्तारी को भी शहादत बना देंगे. 3. मोदी=केजरीवाल: राहुल गांधी संसद में सोते हैं. सोनिया गांधी ज्यादातर चुप रहती हैं. प्रियंका गांधी सालों से वाया पोस्टर ही राजनीति में आ रही हैं. ऐसे में अगर प्रधानमंत्री वाले कीवर्ड को हटा दिया जाए तो नरेंद्र मोदी को सीधा टक्कर देने वाला कोई नहीं है. रांझणा का वो गाना याद आ रहा है. 'कौन तेरे बिन मेरा. रौनकें तुम्ही से मेरी.' केजरीवाल बीच-बीच में सीधे हमले बोलकर खुद को मोदी के सामने ला खड़ा करते हैं. 2019 दिल्ली ही की तरह अब ज्यादा दूर नहीं. मोदी क्या सच में बौखला रहे हैं? 1. 4 साल का बच्चा 36 को आंख दिखावे: 4 साल बरस पहले पैदा हुई थी AAP. दिल्ली चुनाव में बीजेपी के 3 विधायक ही बच पाए. 67 सीटें AAP ने निकाल ली. अगले बरस चुनाव हैं. गोवा, गुजरात और पंजाब में. AAP और पान की दुकान में बैठे चाचाओं की मानें तो केजरीवाल की गाड़ी गुजरात को छोड़ दें, तो बाकी के राज्यों में सही जा रही है. खूब सपोर्ट मिल रहा है. केजरीवाल भी बोले- मोदी इस सपोर्ट को पचा नहीं पा रहे हैं. ऐसे में AAP विधायकों को हर बात पे गिरफ्तार किए जाने का एक लॉजिक ये भी समझ आता है. 2. 'यार काम तो कर रहा है': नौकरी से जो सैलरी मिलती है, उसमें उस हिस्से से ज्यादा मुहब्बत होती है जो सीधा बैंक अकाउंट में आती है. दिल्ली में बिजली के बिल पर सब्सिडी मिल रही है. 1500 का बिल आया. 600 की सब्सिडी. कुल चुकाने होंगे 900 रुपये. तो जो ये 600 रुपये का फायदा है ये पइसे दिल्ली में केजरीवाल को गोटियां सेट करवा रहे हैं. पानी के बिल माफ और छूट सो अलग. हालांकि गैस पर सब्सिडी केंद्र सरकार भी दे रही है. दिल्ली के लोग अपने बटुए से मतलब रखते हैं. ये जो फेसबुक पर हिंदी में लंबे-लंबे सियासी मायनों के स्टेटस होते हैं. सीलमपुर के लौंडे ऐसे स्टेटसों को देख, 'ये क्या भसड़ लिख दिया इसने इतना लंबा सा, हिंदी में.' कह आगे निकल पड़ते हैं. अस्पताल, मोहल्ला क्लीनिक, स्कूल, औचक दौरे दिल्लीवालों को भा रहे हैं. मोदी भी इस बात से बेखबर नहीं. 3. घोषणापत्र: फ्री वाईफाई को छोड़ दिया जाए तो खुलेतौर पर दिल्ली में लोगों को केजरीवाल से ज्यादा शिकायत नहीं है. केजरीवाल धीरे-धीरे घोषणापत्र को पूरा कर रहे हैं. मोदी का घोषणापत्र सिर्फ घोषणापत्र ही था. ये बात विरोधी कहते हैं. कहना न होगा कि मोदी समर्थकों से ज्यादा विरोधियों की कही भी दबे मन से सुन लेते हैं. केजरीवाल का पूरा वीडियो https://www.youtube.com/watch?v=jpqOYk67x2Y

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