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घूसखोरी केस की सुनवाई चल रही थी, सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा - "मैं भी डोलो खाया था"

सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई है कि डॉक्टरों ने घूस लेकर जानबूझकर कोविड मरीजों को Dolo 650 लेने को कहा.

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18 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 19 अगस्त 2022, 03:52 PM IST)
PIL filed on Dolo 650 producers.
PIL filed on Dolo 650 producers.
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कोविड महमारी (Covid Pandemic) के दौरान चर्चित Dolo 650 की बिक्री बढ़ाने के लिए इसे बनाने वाली कंपनी ने डॉक्टरों को हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के गिफ्ट घूस के तौर पर दिए. सुप्रीम कोर्ट में ये दावा फेडरेशन ऑफ़ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया की तरफ से किया गया है. इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने ये दावा सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स की एक रिपोर्ट के हवाले से किया है. संगठन ने कहा है कि कंपनी ने घूस इसलिए दी ताकि डॉक्टर ज्यादा से ज्यादा कोविड मरीजों को Dolo 650 लेने को कहें.

Justice Chandrachud ने जताई हैरानी

इधर इस मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्हें जब कोविड हुआ था, तो उन्होंने भी ये दवाई ली थी. उन्होंने कहा कि ये काफी गंभीर मामला है और एसोसिएशन के वकील संजय पारीख की तरफ से जो कुछ बताया जा रहा है, वो सुनने में अच्छा नहीं लग रहा है. मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ए एस बोपन्ना की बेंच ने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए. बेंच ने इस मामले पर केंद्र सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा है. अब इस मामले की सुनवाई 10 दिन के बाद होगी.

वरिष्ठ वकील संजय पारीख की तरफ से ये भी कहा गया कि देश में अभी इस तरह का कोई कानून नहीं है, जिससे इस तरह की प्रैक्टिस पर रोक लगाई जा सके. उन्होंने कहा कि दवा कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए. उनकी तरफ से कहा गया कि इस तरह के मामलों में रिश्वत लेने वाले डॉक्टरों पर तो केस चलता है, लेकिन दवा कंपनियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती.

फेडरेशन ऑफ़ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया की तरफ से दाखिल याचिका में मांग की गई है कि फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज के लिए यूनिफॉर्म कोड (UCPMP) बनाए जाने की जरूरत है. याचिका में कहा गया है कि इस कोड के ना होने की वजह से मरीजों को ब्रांडेड कंपनियों की बहुत ज्यादा कीमत वाली दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं. याचिका में कहा गया कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि महंगे गिफ्ट के लालच में डॉक्टर मरीजों के पर्चे पर उन्हीं कंपनियों की दवाएं लिखते हैं. 

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्निशिप कर रहीं शिवानी ने लिखी है)

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