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मोदी के 'नसीब' से कम हुए तेल के दाम पर अब किसके नसीब का साया है?

मोदी सरकार के तीन साल में इससे ज्यादा रेट नहीं बढ़े.

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12 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 12 सितंबर 2017, 11:53 AM IST)
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मेरी सरकार बनते ही, देश में पेट्रोल-डीजल के दाम गिर गए. लोग कहते हैं यह तो मोदी का नसीब है, इसमें बुरा क्या है? - नरेंद्र मोदी (1 फरवरी, 2015)
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले द्वारका में हुई एक रैली में पीएम मोदी ने ये बात कही थी. सही बात कही थी. तब पहले के मुकाबले रेट कम हुए भी थे. पर अब जो लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, उस पर क्या कहा जाए. नहीं, हम ये बिल्कुल नहीं बोलेंगे कि पीएम मोदी का नसीब खराब है. हां ऐसा जरूर लगता है कि जनता का ही नसीब खराब है. जानते हैं कैसे-
1. पेट्रोल-डीजल के रेट 16 जून से रोज तय होने होने के आदेश जारी हुए थे. चलिए एक जुलाई का रेट ले लेते हैं. दिल्ली में पेट्रोल 63.09 रुपए और डीजल का रेट 53.33 रुपए था. 12 सितंबर आते-आते पेट्रोल 70.38 और डीजल 58.72 रुपए का हो गया है. सरकार ने तो सोचा था- रोजाना रेट तय होंगे तो रोज जनता का फायदा होगा. पर 'नसीब' ही खराब है. क्या करें.
2. पंप डीलरों ने पहले तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रोजाना बदलाव का विरोध किया था. बोले थे- उनको कीमत कम रहने पर लाभ नहीं होगा. 16 जून से 30 जून तक पेट्रोल (2.17 रुपये प्रति लीटर) और डीजल (1.03 रुपये प्रति लीटर) के दाम घटे भी. फिर आई एक जुलाई. इस दिन से ही कीमतों में जो बढ़ोतरी शुरू हुई, तो अब तक नहीं रुकी. लोगों का तो नहीं, लेकिन पंप डीलरों का नसीब शायद अच्छा हो गया है, तभी इन लोगों ने भी कीमतों में बढ़ोतरी का विरोध बंद कर दिया है.
पेट्रोल पंप
पेट्रोल पंप

3. पड़ोसी से जलने का तो रिवाज सदियों से चला आ रहा है. तो यहां आपको जलन होगी. क्योंकि हमारे पड़ोसी देशों श्रीलंका, नेपाल, भूटान और यहां तक की पाकिस्तान में भी पेट्रोल-डीजल के रेट हमारे देश से काफी कम हैं. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 1 सितंबर को जब भारत में पेट्रोल 69.26 और डीजल 57.3 में बिक रहा था तो पाकिस्तान में पेट्रोल 42.14 और डीजल 46.93 रुपये में बिक रहा था. श्रीलंका में पेट्रोल 52.47 और डीजल 39.69 में बिक रहा था. और जगहों पर भी कुछ ऐसा ही है.  सच कहें, तो फिलहाल पड़ोसी देशों का ही नसीब सही है.
4. पड़ोसी देशों में तो दाम हमसे कम है, लेकिन दक्षिणी पूर्वी देश तो जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं. 1 सितंबर को मलेशिया में पेट्रोल 32.19 रुपये और डीजल 31.59 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा था. इसी तरह इंडोनेशिया में पेट्रोल 40.58 में तो डीजल 43.36 में बिक रहा था.
पिछले कुछ दिनों में ऐसे बढ़े पेट्रोल के दाम.
पिछले कुछ दिनों में ऐसे बढ़े पेट्रोल के दाम.

जुलाई में ये थी पेट्रोल की कीमत. सोर्स- IOC
जुलाई में ये थी पेट्रोल की कीमत. सोर्स- IOC.

5. पेट्रोल का रेट जो इस वक्त है, वो मोदी सरकार के तीन साल में अब तक का सबसे ज्यादा है. यानी 2014 को जो नसीब सही हुआ था, वो बिगड़ चुका है. इसका कारण हाल ही में बढ़ा क्रूड ऑयल(कच्चा तेल) का रेट है जोकि 3.50 डॉलर प्रति बैरल बढ़ा है. यही कारण है कि मुंबई में पेट्रोल फिलहाल करीब 80 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा है.

आसान भाषा में समझें तेल का खेल

कच्चा तेल अपने देश में तो मिलता नहीं है, सो सरकार इसे खाड़ी देशों यानी ईरान वगैरह से खरीदती है. तेल बैरल के हिसाब से खरीदा जाता है. एक बैरल में 159 लीटर तेल आता है. फिलहाल एक बैरल कच्चे तेल का रेट 53.39 डॉलर है. यानी एक लीटर कच्चे तेल की कीमत करीब 21.49 रुपये हुई. फिर इस मूल्य में ओशन फ्रेट शुल्क, ट्रांसपोर्टेशन चार्ज, रिफ़ाइनरी ट्रांसफर शुल्क आदि जोड़ा जाता है. यहां जो रेट निकलता है, उस कीमत पर ये पेट्रोल पंप के मालिकों को दिया जाता है. फिर इसमें केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी जोड़ती है. फिर इसमें डीलर कमीशन जोड़ा जाता है. कहानी यहां खत्म नहीं होती, इस मूल्य में हर राज्य की सरकार VAT या Value Added Tax जोड़ती है. दिल्ली में 27% VAT लगता है और तेलंगाना में 35.2%. इसे जोड़ने के बाद तेल का मूल्य वो होता है, जिस पर आप खरीदते हैं.

 सच कहें तो टैक्स बिगाड़ रहे हैं नसीब

पेट्रोल-डीजल पर असली खेल तो गुरू टैक्सों का है. इतने नाना प्रकार के टैक्स हैं कि समझने में चक्कर आ जाए. वन नेशन वन टैक्स से सबका बदला पेट्रोल-डीजल पर लगे टैक्स ही ले रहे हैं. दरअसल इस पर जीएसटी नहीं लागू होता. राज्यों को अलग अपने हिसाब से टैक्स लगाने की छूट है. लिस्ट बनाके समझा देते हैं वरना कुछ ना पल्ले पड़ेगा-
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पहले पेट्रोल पर लगे टैक्स समझो : रिफाइनरी, ट्रांसपोर्टेशन आदि खर्चे मिलाकर हिस्सा                29.96 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी                                                             21.48 रुपये प्रति लीटर डीलर्स कमीशन                                                             3.24 रुपये प्रति लीटर वैट@27%(राज्य का हिस्सा)                                            14.76 रुपये प्रति लीटर कुल-                                                                            69.43 रुपये प्रति लीटर (2 सितंबर के रेट, सोर्स- IOC)
अब डीजल पर लगे टैक्स : रिफाइनरी, ट्रांसपोर्टेशन आदि खर्चे मिलाकर हिस्सा               29.25 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी                                                             17.33 रुपये प्रति लीटर डीलर्स कमीशन                                                               2.17 रुपये प्रति लीटर वैट@27%                                                                    8.46 रुपये प्रति लीटर कुल-                                                                            57.21 रुपये प्रति लीटर (2 सितंबर के रेट, सोर्स- IOC)
ये बात किसी को समझ आ जाए तो हमें भी समझा देना
थोड़ी देर के लिए नसीब को किनारे रखते हैं. पहले कोई हमको क्रूड ऑयल का गणित समझा दे. वो इसलिए कि 2013-14 में जब क्रूड ऑयल के रेट 105.52 डॉलर प्रति बैरल थे तो डीजल 48 रुपये से 55 रुपये के बीच था और पेट्रोल 68 रुपये से 73 रुपये के बीच था. और अब जब क्रूड ऑयल की कीमत लगभग आधी हैं यानी 53.39 डॉलर प्रति बैरल है तो पेट्रोल-डीजल के रेट क्यों नहीं घटे. इस सवाल को विपक्षी दल भी अकसर उठाते रहे हैं, पर सरकार नसीब बनाने में लगी है.
सोशल मीडिया पर जनता मचाए है बवाल  


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