एक और दर्दनाक हादसे में कुछ लोग मौत के मुंह में चले गए हैं. पटना में एक नाव केडूब जाने से 24 लोगों की जान चली गई. आंकड़ा और बढ़ सकता है. घटना अनपेक्षित सही आगेका सारा प्रोसीजर देखा-भाला और रटा-रटाया है. घटना की जांच होगी, कारण तलाशेजाएंगे, मृतकों के लिए संवेदनाएं प्रकट की जाएंगी, मुआवज़े दिए जाएंगे. अगले हादसेतक. फिर कहीं कुछ और होगा और इसे भुला दिया जाएगा. पटना में एनआईटी घाट के पास एकनाव के गंगा नदी में डूब जाने का ये हादसा जितना दर्दनाक है, अफ़सोस की बात है किउतना ही आम है. मिस-मैनेजमेंट से, लापरवाही से हुई मौतों का हमारा लंबा इतिहास है.और इस बात का भी कि हमने कभी किसी हादसे से कुछ नहीं सीखा. लोग मरते रहते हैं औरहमारी नाकारा, निकम्मी मशीनरी थोड़ी सी हिलडुल के बाद फिर ‘जैसे थे’ हो जाती है.सिर्फ मशीनरी ही क्यों लोग खुद भी इतने गैर-ज़िम्मेदार हैं कि वो काम पहले करते हैंजिनकी मनाही है.मंदिरों में जहां इतनी भीड़ होती है, वहां हादसे की आशंका हरदम बनी रहती हैजर्जर पुलों पर भीड़ बनकर इकट्ठा होते हैं, संकरी गलियों में एक-दूसरे पर लदे जातेहैं, ट्रेन की छत पर सफ़र करते हैं, ज़हरीली देसी शराब को प्रसाद समझ कर ग्रहण करतेहैं. कुल मिलाकर बात ये कि तमाम मुमकिन तरीकों से अपनी जान ख़तरे में डाले रहते हैं.‘लॉ ऑफ़ एवरेज’ की मार कभी तो पड़नी ही होती है. पड़ती है. महीने-दो महीने में कोई बड़ीदुर्घटना हो जाती है और सब लोग जागने का अभिनय करने लग जाते हैं. जागता कोई नहीं येदूसरी बात है. पटना के सबलपुर दियारा में मकर संक्रांति के अवसर पर पतंगबाजीमहोत्सव आयोजित किया गया था. इस वजह से घाट पर आम दिनों से ज़्यादा भीड़ थी. इसमहोत्सव से लौटते हुए एक नाव पर उसकी क्षमता से ज़्यादा लोग सवार हो गए. ओवरलोड होनेकी वजह से नाव डूब गई. वहां मौजूद लोगों ने जो कुछ बताया उससे पता चलता है कि डूबनेवाले लोगों में से कईयों ने नाव चलाने वाले की चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया. नतीजतनमौत को अपना झपट्टा मारने का मौका मिल गया.रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे लोगभीड़ ज़्यादा और नावें कम होने की वजह से एक ही नाव पर क्षमता से डबल लोग चढ़ गए थे.नाविक ने मना किया तो लोगों ने उसे ही डांट पिलाकर चुप करा दिया. नाविक बारबार मनाकरता रहा कि अब कोई न चढ़े लेकिन लोग चढ़ते चले गए. वहां कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं थाजो लोगों को रोकता. पहले-पहल तो ज़्यादा वज़न के कारण नाव चली ही नहीं. बोट-चालक नेफिर से लोगों को चेताया कि वज़न बहुत ज़्यादा है, कुछ लोग उतर जाएं. लेकिन किसी ने नमानी. दूसरी बार नाव किसी तरह चल पड़ी तो एक ओर झुकने लगी. नाविक ने सबको बीच मेंआने को कहा. कोई ना माना. नाव ने अभी थोडा ही सफ़र किया था कि वो बाईं तरफ बहुतज़्यादा झुक गई. नाव में पानी भरने लगा. इससे नाव के अंदर दहशत फ़ैल गई. लोग एकदम सेबीच में आने लगे. अफरा-तफरी मच गई. नाव में बहुत ज़्यादा पानी भरने लगा. लोगचिल्लाने लगे. और देखते ही देखते सैकंडों में नाव पानी के अंदर समा गई. देखियेवीडियोइस वीडियो में दिख रहा है कि नाव किनारे से ज़्यादा दूर नहीं है. ये भी दिख रहा हैकि किनारे पर बहुत से लोग मौजूद हैं. लेकिन इक्का-दुक्का लोगों में हलचल के अलावाकोई ख़ास मदद का हाथ बढ़ता हुआ नहीं दिखाई देता. हम लोगों की निर्लिप्तता पर कोईकमेन्ट नहीं करना चाहते हैं. हो सकता है उनमे से काफी लोगों को तैरना ना आता हो. येभी हो सकता है कि तेज़ी से हुए हादसे ने लोगों को चकित कर के रख दिया हो और जब तक वोसंभलते मामला हाथ से बाहर निकल चुका हो. आखिर कितने लोग बिजली की तेजी से फ़ैसला लेपाते हैं! खास तौर से तब जब खुद की जान जाने का भी ख़तरा हो! वजह चाहे जो हो लेकिनये तथ्य अपनी जगह है कि इतने सारे लोगों की मौजूदगी में इतनी बड़ी संख्या में लोगोंका मर जाना असहज करता है. यूं लगता है जैसे उनमे से कुछ और जानें तो यकीनन बचाई जासकती थी. बचाई जानी चाहिए थी. प्रशासन की विफलता तो खैर बोल्ड अक्षरों में टंगी हीहै सबके सामने. जहां जहां ऐसे हादसे होते हैं एक चीज़ हमेशा कॉमन पाई जाती है.प्रशासन का मिस-मैनेजमेंट. जब सरकारी विभाग की तरफ से ये पतंगबाजी महोस्तव आयोजितकिया गया था तो लोगों को लाने-ले जाने की पूरी व्यवस्था क्यों नहीं थी इसका जवाबकोई नहीं देगा. अब तो हम इतने आदी हो चुके हैं ऐसे हादसों के कि लगता है कोई पूछेगाभी नहीं.मरनेवालों की शुरुआती सूचीसूचनार्थ बताए दे रहे हैं कि राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से मुआवजों की घोषणा होचुकी है. नितीश सरकार मरने वालों को 4 लाख रुपए दे रही है. मोदी सरकार ने भी ऐलानकर दिया है कि वो मृतकों को 2 लाख और गंभीर घायल लोगों को पचास हज़ार रुपए का मुआवज़ादेगी. कुछ दिनों में आप, मैं, हम सब इस हादसे को भूल जाएंगे. सवा-सौ करोड़ी मुल्कमें कुछ न कुछ लगा ही रहता है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िएतस्वीरें: झारखंड में खदान धंसी, 40 मजदूर दबे, 7 मौतों की पुष्टिगहरी नींद में थे सब, एक झटका लगा और इधर-उधर गिर पड़े, अब तक 96 की मौतसाजिश के तहत हुए थे कानपुर के पास दो बड़े रेल हादसे?