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पटना में कार से टकराने के बाद पहिए में फंसा लड़का 8 किलोमीटर घिसटकर मर गया

कार में दो नाबालिग लड़के और दो लड़कियां थीं.

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8 मार्च 2019 (अपडेटेड: 8 मार्च 2019, 06:58 AM IST)
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पटना में हुई घटना जैसी एक वारदात दिल्ली में भी हुई थी. एक नाबालिग अपने पिता की मर्सिडीज चला रहा था और उसने एक आदमी को कार से उड़ा दिया. उस केस में पुलिस ने नाबालिग के पिता को भी दोषी माना था. ये उसी केस की तस्वीर है.
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16 साल का एक लड़का. पहले कार ने उसे धक्का मारा. वो गिरा और कार के पिछले पहिये और बंपर के बीच फंस गया. कार रुकी नहीं. चलती रही. सड़क पर चल रहे कुछ लोगों ने ये देखा और कार रुकवाने की कोशिश की. लेकिन कार चलाने वाला रफ़्तार तेज करके भाग गया. कार के पहिये में फंसा वो लड़का करीब आठ किलोमीटर तक कार के साथ सड़क पर घिसटता रहा और मर गया. नाबालिग था, पापा की कार चला रहा था इंडियन एक्सप्रेस में ये न्यूज दिखी हमें. वारदात बिहार की राजधानी पटना की है. जो मरा, वो भी नाबालिग. जो कार चला रहा था, वो भी नाबालिग. पुलिस ने इस मामले में दो नाबालिग लड़कों को पकड़ा है. इनमें से एक घटना के समय ड्राइव कर रहा था. कार उसके पिता की थी. जब ये हादसा हुआ, उस समय कार में इन दोनों लड़कों के साथ दो लड़कियां भी मौजूद थीं. न कार चलाने वाले के पास ड्राइविंग लाइसेंस था. न उसके साथ बैठे उसके दोस्त के पास. पुलिस का कहना है कि जब तक कार को रोका जाता, तब तक पहिये में फंसे नाबालिग की मौत हो चुकी थी. इतनी देर तक घिसटते रहने के कारण उसकी लाश की हालत भी बहुत खराब हो चुकी थी. पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज़ कर लिया है. 2016 की दिल्ली मर्सिडीज हिट-ऐंड-रन केस 2016 में दिल्ली के अंदर एक मर्सिडीज हिट-ऐंड-रन केस हुआ था. इसमें 32 साल के सिद्धार्थ शर्मा की जान चली गई थी. जिस कार से सिद्धार्थ की जान गई, उसको ड्राइव कर रहा था एक नाबालिग. कार उसके पापा की थी. वो लड़का पहले भी एक रोड ऐक्सिडेंट कर चुका था. ओवर स्पीडिंग के लिए उसका चालान भी कट चुका था. एक तो ऐसा रेकॉर्ड, ऊपर से माइनर. बावजूद इसके उसके पापा ने उसे कार ड्राइव करने दी. नाबालिग बच्चे को कार चलाने देने वाले मां-बाप भी दोषी होते हैं उस केस में एक बहुत खास बात हुई थी. एक तो ये कि पुलिस ने नाबालिग को वयस्क मान कर मामला चलाया. दूसरी और सबसे अहम बात ये हुई कि पुलिस ने उस नाबालिग लड़के के पिता मनोज अग्रवाल को भी क्राइम में भागीदार माना. उन्हें भी अरेस्ट किया. पुलिस ने कहा कि नाबालिग बेटे को कार चलाने देना, पिता का अपराध है. ये शायद पहला मामला था जब रोड ऐक्सिडेंट में शामिल किसी नाबालिग के पैरंट्स को भी अपराधी माना गया था. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बाप और बेटा, दोनों को क्राइम का भागीदार माना. कहा, पिता की लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी आपराधिक हरकत है. ये सही स्टैंड है. लाड़-प्यार तरीके से होना चाहिए. आपने तो प्यार में कार की चाभी दे दी. या फिर एक अलग कार ही खरीद कर दे दी. लेकिन कार कोई हार्मलेस खिलौना थोड़े न है. उससे किसी की जान जा सकती है.
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