मूत मिला हुआ है बाबा रामदेव के प्रोडक्ट्स में. हम नहीं, फतवा वाले संगठन'तमिलनाडु तौहीद जमात' का कहना है, पेशाब मिले प्रोडक्ट्स हराम हैं इस्लाम में.क्या कहा इस्लाम? बस इत्ता सुनते ही बाबा रामदेव अपनी फैक्ट्री के मजदूरों वालारजिस्टर लेकर आ गए. बोले, 'हजारों मुस्लिमों को काम देते हैं हम. हमय तो ठेकेदार भीमुसलमान होते हैं.' वो बात अलग है रामदेव इस्लाम के चक्कर में 'बाबा जी की बूटी'भूल गए. आई मीन, मेन मुद्दा!ये इत्ता बड़ा मुद्दा नहीं था कि रामदेव कैमरे पे आएं. तो बस प्रेस रिलीज जारी करादी. किसी ने पूछा नहीं था, लेकिन बताने लगे कि उन्होंने कितने मुसलमानों को रोजगारदिया. लिखा, 'बकौल मोहम्मद साहेब, अपने वतन से इश्क करना भी ईमान का हिस्सा है.हमारे पतंजलि में हजारों मुस्लिम भाई-बहन काम करते हैं. हजारों मुस्लिमों को नौकरीमिलती है. ज्यादातर मजदूर भी मुस्लिम ही हैं.' बाबाजी गोमूत्र पे विवाद था, आप तोखुद को 'एंटी मुस्लिम' न साबित करने की अतिरिक्त कोशिश करने लगे. टू मच एफर्ट, यूनो.वैसे प्रेस रिलीज में बाबा ने बताया कि उनके किन प्रोडक्ट्स में गाय का पेशाब मिलाहोता है. आप भी जानिए. 1. गौधन अर्क: कैंसर समेत की सीरियस बीमारी में काम आता हैये. 2. संजीवनी वटी: इसमे वत्सनाभ नाम की जहरीली दवाई होती है. गोमूत्र से जहरमिटाया जाता है. 3. पंचगव्य साबुन: चमड़ी के रोग दूर करता है ये साबुन. 4. कायाकल्पतेल: ये तेल फोड़े फुंसी को दूर करता है. 5. शुद्धि फिनायल: फर्श और घर की सफाई मेंइस्तेमाल. बाबा रामदेव के मुताबिक, पंतजलि के इन 5 प्रोडक्टस में गाय का पेशाबमिलाया जाता है. लेकिन खाने या पीने वाले आइटम सिर्फ दो हैं, गौधन अर्क और संजीवनीवटी. यानी पेशाब 'चखने' के चांसेस दो में ही हैं. बाकी के तीन चुपड़कर काम चलाया जासकता है. रामदेव का क्लेम है कि देश के करोड़ों गरीब मुस्लिम और गरीब, जो पतंजलिप्रोडक्ट इस्तेमाल करते हैं, यह उनकी सेहत से खिलवाड़ की साजिश है.रामदेव ने एक पुराना फतवा भी 'प्लीज फाइंड अटैचमेंट' कर दिया: फतवा कहता है. पेशाबआदमी का हो या जानवर का, नापाक है. एक कतरा भी अगर खाना या पानी वगैरह में मिल जाएतो उसका यूज जायज नहीं है. कपड़ों में छू जाए तो नापाक हो जाते हैं. मुसलमानों कोऐसे प्रोडक्टस के यूज से बचना चाहिए. वैसे आपने गौर किया होगा पेशाब करते हुएमुसलमान भी अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं.बाबा को मिला फतवा