5 अक्टूबर 1984 की रात. तमिलनाडु के उस समय के मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन (एमजीआर)को अपोलो अस्पताल ले जाया गया था. लोगों को बताया गया कि उन्हें डीहाइड्रेशन, बुखारऔर सांस लेने में तकलीफ है. लेकिन, ये सब बातें थीं. असल बात कोई नहीं बता रहा था.32 साल बाद, ठीक उसी रहस्यमय तरीके से अभी की मुख्यमंत्री जयललिता हॉस्पिटल में हैंऔर उनकी असल हालत कैसी है, ये कोई नहीं बता रहा. दोनों नेता एक ही पार्टीएआईएडीएमके से हैं और दोनों ही नेताओं का राजनीति में आने से पहले फिल्मों में'शानदार जबरदस्त जिंदाबाद' कैरियर रहा.1984 के दिनों को याद करते हुए बड़के पत्रकार कल्याण अरुण कहते हैं, 'दोनों कोडीहाइड्रेशन और बुखार के कारण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और कहा गया कि मामूलीबीमारी है. एमजीआर के केस में शुरुआती दिनों में हमें ज्यादा कुछ पता भी नहीं चला.फिर इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उनका गुर्दा खराब हो चुका है औरहिंदू में खबर आई कि उन्हें स्ट्रोक आया है.'एक और बड़े पत्रकार शशि कुमार ने बताते हैं, 'ये स्वाभाविक है कि एमजीआर के साथ जोहुआ और जयललिता के साथ जो भी हो रहा है, उसे हम एक ही रूप में देख रहे हैं. दोनोंफिल्म इंडस्ट्री से आते हैं. सिनेमाई स्टारडम को राजनीतिक स्टारडम में लाने कीपरंपरा दोनों लोगों में रही. मैं इससे अलग हटकर इस मसले को नहीं देखता.'एमजीआर और जया के बीच एक और मिलती-जुलती बात ये है कि दोनों के ही पास एक खासम-खासतरह का नेता रहा, जो उनके गाढ़े वक्त में सब कुछ संभाले रहा. ये दोनों स्पेशल नेताअपने आका के समय में फाइनेंस मिनिस्टर ही रहे और समय की पहलवानी हुई तो मुख्यमंत्रीभी बन गए. एमजीआर के पास वीआर नेदूंचेजियां थे और जयललिता के पास पनीरसेल्वम हैं.हालांकि, राजनीतिक पंडितों को शक है कि पनीरसेल्वम जयललिता की विरासत को संभालपाएंगे.पनीरसेल्वम के फेवर में एआईएडीएमके के प्रवक्ता सीआर सरस्वती कहते हैं, 'हमारीपार्टी में सब कुछ सीएम ही डिसाइड करता है और उन्होंने ये काम पनीरसेल्वम को थमायाहै. हम लोग इसका स्वागत करते हैं. वो इससे पहले भी दो बार सीएम बनाए जा चुके हैं.वो बहुत ही ईमानदार और मेहनती किस्म के आदमी हैं.'राजनीतिक पंडित आर मणि की राय इससे उलट है. वो कहते हैं, 'हम पनीरसेल्वम की तुलनानेदूंचेजियां से नहीं कर सकते. नेदूंचेजियां एक मजबूत नेता थे और उस समय पार्टी मेंमल्टिपल सेंटर्स नहीं थे. आज पनीरसेल्वम की सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में मल्टिपलसेंटर्स का होना है.'इधर जया के मुश्किल समय में अपने लिए मौका तलाश रहे डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि जयाके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. वो कह रहे हैं कि पिछले दो हफ़्तों से जयललिताअस्पताल में भर्ती हैं और सत्ता की बागडोर उन्होंने अपने पिछलग्गुओं को सौंप दी है.वैसे लोगों में ये कानाफूसी हो रही है कि पनीरसेल्वम जयललिता की करीबी दोस्त शशिकलाको पद देने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन पार्टी के लोगों का कहना है कि पनीरसेल्वमको जो रोल पार्टी से मिला है, वो उसे अच्छी तरह निभाएंगे.जया की पार्टी में डर है कि उनके लंबे समय तक हॉस्पिटल में रहने पर तमिलनाडु मेंराजनीतिक संकट आ सकता है पर राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अभी किसी कन्क्लूजन परपहुंचना जल्दबाजी होगी. सबसे अलबेली बात ये है कि ये वही राज्य है, जहां की जनताअपने नेता और फिल्मी सितारों को भगवान से भी ज्यादा पूजती है और इसी राज्य में देशके सबसे ज्यादा नास्तिक रहते हैं.तमिलनाडु में इस समय होने वाली सभी घटनाएं उसी सिलसिलेवार तरीके से हो रही है जो आजसे 32 साल पहले हुई थीं. पिछले 32 सालों में जनता ने जबरदस्त राजनीतिक उतार-चढ़ावदेखे हैं. उस समय तो राज्य की कमान नेदूंचेजियां मिल गई थी, लेकिन इस बारपनीरसेल्वम की किस्मत का फैसला अभी तक नहीं हुआ है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: अम्मा के लिए जान देते हैं लोग, और क्या जानना है? जब दीपन ने जयललिताको धकियाया, पीटा और नीचे गिरा दिया बीमार जयललिता के एक फैन ने खुद को आग लगाई इनलोगों ने मिलकर जयललिता को मरा हुआ बता डाला--------------------------------------------------------------------------------दी लल्लनटॉप के लिए ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने लिखी है.