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रेमडेसिविर की शीशी में भरा था पैरासिटामॉल, इंजेक्शन लगने के बाद मरीज की मौत हो गई

पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है.

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नकली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्शन बेचने के चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. (फोटो-आज तक)
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डेविड
23 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 23 अप्रैल 2021, 11:46 AM IST)
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रेमडेसिविर. कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों के इलाज के लिए इस दवा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है. इसकी कालाबाज़ारी की खबरें भी सामने आ रही हैं. पर अब रेमडेसिविर से ही जुड़ी एक शर्मनाक खबर सामने आई है, जिसमें कुछ लोगों ने पैसों के लालच में नकली दवा बेची. उस दवा को लगाने के बाद एक मरीज की मौत हो गई. पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
घटना महाराष्ट्र के बारामती की है. यहां गोरड अस्पताल में इलाज करा रहे स्वप्निल जाधव (फलटन, सतारा जिले के निवासी) को नकली रेमडेस‍िव‍िर इंजेक्शन दिया गया. इसके चलते उनकी मौत हो गई. अस्पताल के डॉक्टर गोरड ने इस बारे में पुलिस में शिकायत की थी. दूसरी तरफ आरोपियों के खिलाफ एक गुप्त सूचना भी मिली थी. कैसे बनाते थे फर्जी दवा? आज तक से जुड़े नवीद पठान के मुताबिक, आरोपी अस्पतालों से रेमडेसिविर की खाली बोतलें इकट्ठी करते थे. इसके बाद वो उसमें पैरासिटामॉल का पानी भर देते थे. इसके बाद रेमडेसिविर की तरह ही उसकी पैकिंग करके मरीज़ों को वो ज्यादा दाम में बेचते थे. दरअसल, एक आरोपी स्वास्थ्य बीमा के लिए काम करता था. कई कोरोना मरीजों के रिश्तेदार इस इंजेक्शन के बारे में उससे पूछताछ करते थे. इसी के चलते उसे फर्जी दवा बेचकर पैसे कमाने का आइडिया आया. उसने तीन और लोगों के साथ मिलकर ये काम शुरू किया. ये लोग मरीजों को 35-35 हज़ार रुपये में एक-एक इंजेक्शन बेचते थे.
आरोपियों के नाम दिलीप ज्ञानदेव गायकवाड़, संदीप संजय गायकवाड भीगवान, प्रशांत सिद्धेश्वर धरत और शंकर दादा हैं.
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रेमडेसिविर क्यों कर कोरोना मरीज को नहीं दी जा सकती, इसपर भी बात की अपने इंफोग्राफिक में.

अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन लोगों ने और कितने मरीजों को ये नकली इंजेक्शन बांटे, इनके गिरोह में कोई और भी शामिल था या नहीं. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मिलिंद मोहिते ने आज तक को बताया कि पुलिस इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी.
बारामती मंडल के पुलिस उपाधीक्षक नारायण शिरगांवकर ने कहा था कि हमने चार लोगों को IPC, आवश्यक वस्तु अधिनियम, औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम और औषधि (मूल्य नियंत्रण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है.
पुलिस ने बताया था कि रेमडेसिविर की कालाबाजारी के बारे में सूचना मिलने के बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए एक ग्राहक को भेजा गया. उसे नकली रेमडेसिविर बेचने वाले दो व्यक्तियों को बारामती एमआईडीसी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया. उनकी पहचान प्रशांत घरात और शंकर भिसे के रूप में की गई. उनसे पूछताछ के बाद दिलीप गायकवाड़ और संदीप गायकवाड़ की गिरफ्तारी हुई. आरोपियों के कब्जे से तीन नकली रेमडेसिविर की शिशियां जब्त की गई थीं.

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