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बुखार, शुगर, बीपी की ये दवाएं ज्यादातर लोग लेते हैं, घटिया निकलीं, टेस्ट में बुरी तरह फेल हो गईं

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की ओर से की गई क्वालिटी टेस्ट में 53 दवाएं फेल हो गई है. इनमें विटामिन C, D3 टैबलेट शेल्कल, विटामिन B कॉम्प्लेक्स, एंटी डायबिटीज पिल्स, पैरासिटामोल टैबलेट IP 500 MG, एंटी डायबिटिक दवा ग्लिमेपिराइड और हाई ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मिसर्टन जैसी सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाएं शामिल हैं.

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26 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 26 सितंबर 2024, 01:23 PM IST)
Paracetamol vitamin B complex 53 medicines fail drug test
53 दवाएं ड्रग रेगुलेटर के क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई है. (इंडिया टुडे)
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भारत के ड्रग रेगुलेटर (Drug regulator) की ओर से किए गए क्वालिटी टेस्ट (drug quality test) में 53 दवाइयां फेल हो गई हैं. इनमें पैरासिटामोल, कैल्शियम, विटामिन D3 सप्लीमेंट्स, एंटी डायबिटीज पिल्स और हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं शामिल हैं. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने अपनी मंथली ड्रग अलर्ट लिस्ट में 53 दवाओं के लिए ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) अलर्ट जारी किया है.

NSQ अलर्ट स्टेट ड्रग ऑफिसर्स की ओर से की जाने वाली रैंडम मंथली सैंपलिंग से जेनरेट होते हैं. ड्रग रेगुलेटर के क्वालिटी टेस्ट में विटामिन C, D3 टैबलेट शेल्कल, विटामिन B कॉम्प्लेक्स, एंटी डायबिटीज पिल्स, पैरासिटामोल टैबलेट IP 500 MG, एंटी डायबिटिक दवा ग्लिमेपिराइड और हाई ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मिसर्टन जैसी सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाएं शामिल हैं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ये दवाईयां हेटेरो ड्रग्स, एल्केम लैबोरेटरीज, हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड (HAL), कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, मेग लाइफसाइंसेज, प्योर एंड क्योर हेल्थकेयर जैसी कंपनियों द्वारा बनाई जाती हैं.

स्टमक इनफेक्शन के इलाज के लिए बडे़ पैमाने पर इस्तेमाल की जाने वाली दवा मेट्रोनिडाजोल भी क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई. इसे सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एंटीबायोटिक लिमिटेड बनाती है. इसी तरह टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स द्वारा डिस्ट्रीब्यूट की जाने वाली शेल्कल भी टेस्ट में फेल रही. इसे उत्तराखंड स्थित प्योर एंड क्योर हेल्थकेयर बनाती है.

इसके अलावा कोलकाता की एक लैब के परीक्षण में अल्केम हेल्थ साइंस की एंटीबायोटिक्स क्लैवम 625 और पैन डी फेल हो गईं. इसी लैब ने हैदराबाद स्थित हेटेरो के सेपोडेम एक्सपी 50 ड्राई सस्पेंशन को सबस्टैंडर्ड (घटिया) का बताया है. यह दवा गंभीर बैक्टीरियल इनफेक्शन से जूझ रहे बच्चों के लिए है. कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की पैरासिटामोल गोलियों की क्वालिटी पर भी सवाल उठाए गए हैं.

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ड्रग रेगुलेटर ने क्वालिटी टेस्ट में फेल होने वाली दवाओं की दो लिस्ट जारी की हैं. एक लिस्ट में 48 दवाएं हैं. जबकि दूसरी लिस्ट में 5 अतिरिक्त दवाओं के नाम हैं. साथ ही उन कंपनियों के जवाब भी दिए गए हैं जिनकी दवाएं टेस्ट में फेल रही हैं. अपने जवाब में कंपनियों ने इन दवाओं की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है. उन्होंने इन दवाओं को नकली बताया है. उनके जवाब वाले कॉलम में लिखा गया है,  

 वास्तविक निर्माता (लेबल दावे के अनुसार) ने सूचित किया है कि प्रोडक्ट के संदिग्ध बैच का निर्माण उनके द्वारा नहीं किया गया है. और यह एक नकली दवा है. प्रोडक्ट के नकली होने का दावा किया गया है. हालांकि इसकी आगे जांच की जाएगी.

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने अगस्त में भारतीय बाजार में 156 से ज्यादा फिक्स्ड -डोज ड्रग कॉम्बिनेशन को बैन किया था. जिनसे लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने का अनुमान था. इन दवाओं में बुखार की दवाएं, पेनकिलर्स और एलर्जी टैबलेट्स शामिल थीं.

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