टैक्स लीक: खुलासों से 'खुश' सरकार ने दिए जांच के आदेश
पनामा पेपर्स का दूसरा हिस्सा सामने आ चुका है.
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फोटो क्रेडिट: UNI
पनामा पेपर्स का खुलासा जारी है. मंगलवार को टैक्स लीक की दूसरी लिस्ट सामने आई. इस लिस्ट में बंगाल के बिज़नेसमैन अशोक मल्होत्रा, ज्वैलर अश्विनी कुमार, लोकसत्ता पार्टी के अनुराग केजरीवाल, गौतम-करण थापर समेत कई इंडियंस का नाम शामिल है. पहली लिस्ट में अमिताभ, ऐश्वर्या बच्चन, DLF मालिक केपी सिंह, ब्लादिमीर पुतिन, नवाज शरीफ का नाम था. लिस्ट में 500 इंडियंस का नाम शामिल है. पीएम मोदी ने पनामा पेपर्स की जांच के ऑर्डर दे दिए हैं.
ब्लैक मनी पर बनी SIT के जजों ने कहा, डिटेल्स मांगकर पूरे मामले की जांच करेंगे. फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा, पनामा पेपर्स के सामने आने के बाद आने वाले वक्त में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी. दोषियों पर कार्रवाई करने को लेकर हम बिलकुल कोताही नहीं बरतेंगे. इन खुलासों का हम स्वागत करते हैं.'
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'अदानी से नाम शाह कर दो'
पनामा की फर्म मोसाक फोंसेका के क्लाइंट्स में गौतम अदानी के भाई विनाद अदानी का नाम भी शामिल है. खुलासे के मुताबिक, विनोद शांतिलाल अदानी ने डॉक्यूमेंट्स में अपना नाम बदलकर विनोद शांतिलाल शाह करने के लिए कहा.
द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, मोसाक फोंसेका के क्लाइंट्स में पूर्व क्रिकेटर अशोक मल्होत्रा का भी नाम शामिल था. लेकिन बाद में मालूम चला कि टैक्स चोरी करने वाला अशोक मल्होत्रा कोई और है. इंडियन एक्सप्रेस ने गलती से बंगाल में बिज़नेस करने वाले अशोक की जगह बंगाल टीम के कोच अशोक मल्होत्रा का नाम ले लिया था. ब्रिटिश सिटीजन के साथ एक कंपनी डाली थी 2009 में. ई एंड पी ऑनलुकर्स लिमिटेड. इस कंपनी के सारे शेयर संदीप ने अशोक के नाम 2009 में कर दिए गए. हालांकि 2010 में ये कंपनी बंद हो गई. अशोक मल्होत्रा ने अपना नाम आने पर कहा, 'संदीप रस्तोगी दोस्त था. अगर शेयर ट्रांसफर भी किए गए तो मुझे इस बारे में कुछ याद नहीं. बहुत वक्त पहले की बात है. शेयर एक महीने से कम वक्त में बेच दिए गए थे.'
मोसाक फोंसेका और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट
पनामा की लॉ फर्म मोसाक फोंसेका के बारे में दिल्ली के इनकम टैक्स अधिकारियों को सोमवार से पहले ज्यादा नहीं पता था. हालांकि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट साल 2013 से टैक्स चोरी में मदद करने वाली कंपनियों की तलाश में थी. मोसाक फोंसेका के डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, इंडिया ने टैक्स हेवन में तीन नोटिस भेजे थे. नोटिस में मोसाक फोंसेका के द्वारा मैनेज करने वाली 6 ऑफशोर कंपनियों के बारे में जानने की कोशिश की गई. हालांकि रिकॉर्ड्स बताते हैं कि इंडियन अथॉरिटी को इसमें काफी दिक्कतें हुईं.
HSBC, UBS जैसे बैंकों की मोसाक फोंसेका से सैटिंगबाजी
मोसाक फोंसेका को ग्राहक दिलवाने का काम कुछ ग्लोबल बैंकों ने भी किया. HSBC, UBS जैसे नाम इसमें शामिल हैं. UBS के ग्राहक ये चाहते थे कि बैंक उनकी पैसा छुपाने में मदद करे. UBS इसके लिए ग्राहकों की डील मोसाक फोंसेका से करवा देता है. दुनिया में ऑफशोर कंपनियां बनाने वाली मोसाक फोंसका ये काम खूब बढ़िया से कर रही थी. लेकिन साल 2010 में अमेरिका में टैक्स को लेकर रूल बदले. UBS ने अपने हाथ पीछे करने ठीक समझे.
टैक्स हेवन का क्या होता है मतलब?
टैक्स हेवन वो देश, जहां टैक्स बचाने के लिए सिस्टम में छूट रहती है. या ये कह सकते हैं कि बहुत सख्त रूल्स नहीं बने होते हैं. यहां टैक्स को लेकर कानून में तमाम तरह की छूट रहती हैं. आसानी से अकाउंट खुल जाते हैं. और सबसे अहम बात, यहां खुलने वाले अकाउंट्स सीक्रेट रखे जाते हैं. देशों की सरकार के दखल के बावजूद ये टैक्स हेवन देशों के बैंक आसानी से जानकारी मुहैया नहीं कराते हैं.
क्या है पनामा पेपर्स?
फरवरी 2004 तक इंवेस्टमेंट के जरिए रुपये को डॉलर में कंवर्ट कर आप बाहर नहीं ले जा सकते थे. लेकिन 2004 में RBI ने लिबेरालाइजड रेमिटेंस स्कीम की शुरुआत की. जिसके बाद से साल में करीब 25 हजार डॉलर को आप विदेश ले जा सकते थे. लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर ढाई लाख डॉलर कर दिया गया. इंडियंस बाहर जाकर इन रुपयों का कैसे भी इंवेस्ट कर सकते थे. लेकिन 2010 में RBI ने साफ किया कि विदेशों में शेयर तो खरीदे जा सकते हैं लेकिन किसी तरह की कोई कंपनी नहीं बनाई जा सकती.
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लोगों ने इस रूल का भी जुगाड़ निकाल लिया कि ठीक है. कंपनी नहीं बनाई जा सकती, लेकिन किसी पहले से बनी कंपनी पर टेकओवर तो किया जा सकता है. यहां ये लॉ फर्म मोसाक फोंसेका की एंट्री होती है. ये फर्म धड़ल्ले से कंपनियों का रजिस्ट्रेशन करती रहती है. कोई भी बंदा इस कंपनी के पास आकर शेयर या नई कंपनी खरीद सकता है. 2013 में RBI की नोटिफिकेशन आती है. और कहा जाता है कि अगस्त 2013 तक जिन कंपनियों ने ओवरसीज कंपनियां बनाई हैं, उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है.
क्या है ये मोसाक फोंसेका?
मोसाक फोंसेका ऐसी फर्म है, जो कंपनी के मालिकों के नाम का खुलासा नहीं करती है. सारे सीक्रेट्स दबाकर रखती है. पनामा पेपर्स इन्ही सीक्रेट्स को खोलने का काम करती है. ये इंडिया समेत दुनिया के उन दिग्गजों के नामों और कंपनियों का खुलासा करती है, जिन्होंने टैक्स बचाने या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए नियमों का उल्लंघन करते हुए टैक्स हेवन की मदद ली.
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