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20 साल की उम्र में 'माई लॉर्ड' बना ये लड़का

ऐसे ही होशियार लोगों की वजह से आज भी घर में मासूम बच्चे पीटे जाते हैं, 'पढ़ता क्यों नहीं रे' टाइप्स.

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विकास टिनटिन
1 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 31 मार्च 2016, 02:32 AM IST)
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यहां आप हेडलाइन पढ़कर खबर में ही घुसते रह गए. और सालों पहले एक 20 साल का लौंडा जज बन गया. ओह बेटे, टाइप फीलिंग आ रही है और इंडिया एंगल की उम्मीद कर रहे हैं तो रुकिए न. बात उस पार की है, जिस पार जाने के लिए परमिशन लेनी पड़ती है या फिर विद आउट परमिशन फेंस के नीचे से जाना पड़ता है.
हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान के उस बालक की, जो 20 बरस की उम्र में सिविल जज बन गया था. नाम था मुहम्मद इलियास. पाकिस्तानी पंजाब में  1931 में तब पैदा हुए, जब पंजाब सिर्फ पंजाब था. पाकिस्तान का टुकड़ा ख्यालों में था. जमीं ने पाकिस्तान-इंडिया को खून से नहाने के बाद गले नहीं लगाया था.  मुहम्मद इलियास 17 बरस के थे और पाकिस्तानी गुजरात के जमींदार कॉलेज से ग्रेजुएट हो गए थे. साल था 1948.
जस्टिस मुहम्मद इलियास

जस्टिस मुहम्मद इलियास
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जब आदमी होशियार और इश्क में होता है. तो परीक्षा देने से बिलकुल नहीं कतराता है. हां तो इलियास बाबू भी कतई नहीं कतराए और दे दिया ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम. दिमाग ब्रिलिएंट निकला और एग्जाम पास. उम्र थी 20 साल 9 महीने. इलियास सिविल जज बन गए. इत्ती कम उमर में जज बनने वाले इलियास पहले थे. 20 साल का बालक माई लॉर्ड बन गया.
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इलियास जून 1978 में लाहौर हाईकोर्ट के जज अपॉइंट हुए. लंबे वक्त तक वहीं रहे. नेशनल असेंबली के ड्राफ्टस बनाने वाली कमेटी में भी रहे. 1994 में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के जज भी बने. बाद में लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी बने. 1994-95 तक इलियास वहीं बने रहे.
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