20 साल की उम्र में 'माई लॉर्ड' बना ये लड़का
ऐसे ही होशियार लोगों की वजह से आज भी घर में मासूम बच्चे पीटे जाते हैं, 'पढ़ता क्यों नहीं रे' टाइप्स.
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यहां आप हेडलाइन पढ़कर खबर में ही घुसते रह गए. और सालों पहले एक 20 साल का लौंडा जज बन गया. ओह बेटे, टाइप फीलिंग आ रही है और इंडिया एंगल की उम्मीद कर रहे हैं तो रुकिए न. बात उस पार की है, जिस पार जाने के लिए परमिशन लेनी पड़ती है या फिर विद आउट परमिशन फेंस के नीचे से जाना पड़ता है.हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान के उस बालक की, जो 20 बरस की उम्र में सिविल जज बन गया था. नाम था मुहम्मद इलियास. पाकिस्तानी पंजाब में 1931 में तब पैदा हुए, जब पंजाब सिर्फ पंजाब था. पाकिस्तान का टुकड़ा ख्यालों में था. जमीं ने पाकिस्तान-इंडिया को खून से नहाने के बाद गले नहीं लगाया था. मुहम्मद इलियास 17 बरस के थे और पाकिस्तानी गुजरात के जमींदार कॉलेज से ग्रेजुएट हो गए थे. साल था 1948.

जस्टिस मुहम्मद इलियास
सक्सेस मिली. 17 साल के उस बालक ने पढ़ाई नहीं रोकी. पढ़ता गया. पंजाब यूनिवर्सिटी से 1951 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर डाली. कॉलेज टॉप कर डाला था. यूनिवर्सिटी वालों ने गोल्ड मेडल भी दिया और शाबासी भी दी ही होगी. उम्र का आंकड़ा बढ़कर पहुंचा 20 साल 6 महीने पर. इलियास बाबू वकालत शुरू कर चुके थे पाकिस्तान वाले गुजरात में.जब आदमी होशियार और इश्क में होता है. तो परीक्षा देने से बिलकुल नहीं कतराता है. हां तो इलियास बाबू भी कतई नहीं कतराए और दे दिया ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम. दिमाग ब्रिलिएंट निकला और एग्जाम पास. उम्र थी 20 साल 9 महीने. इलियास सिविल जज बन गए. इत्ती कम उमर में जज बनने वाले इलियास पहले थे. 20 साल का बालक माई लॉर्ड बन गया.
1991 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड वालों ने कहा, दुनिया के सबसे यंग जज मुहम्मद इलियास थे. गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड वालों ने अपनी किताब में इलियास को 'यंगेस्ट जज' कहा.इलियास जून 1978 में लाहौर हाईकोर्ट के जज अपॉइंट हुए. लंबे वक्त तक वहीं रहे. नेशनल असेंबली के ड्राफ्टस बनाने वाली कमेटी में भी रहे. 1994 में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के जज भी बने. बाद में लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी बने. 1994-95 तक इलियास वहीं बने रहे.
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