हिजड़ा. छक्का. मीहला ये वो लफ्ज़ हैं जो मैंने अक्सर गालियों की जगह सुने हैं. अगरकिसी लड़के ने नफासत से हाथ को उठा दिया या फिर नजाकत से दो कदम चल लिया तो फटाक सेलोग कह देते हैं हिजड़ा है ये. और फिर उसके साथ ऐसा बर्ताव, लगता है जैसे वो इंसाननहीं. बड़ी हैरानी होती है ऐसी सोच पर. एक तरफ कहते हैं सब कुछ अल्लाह का बनाया हुआहै और फिर दूसरी तरफ अल्लाह की बनाई गई चीज का ही मजाक उड़ाते हैं. बड़े दोगले लोगहैं ये. लेकिन अब वक्त बदल रहा है. और ज़माने को भी बदलना होगा. बदलनी होगी आपकोअपनी दकियानूसी सोच. कामी सिद. ट्रांसजेंडर हैं. पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर के हक़के लिए आवाज उठाती हैं. अब वो पाकिस्तान में ट्रांसजेंडर के लिए रोल मॉडल बन गईहैं. वो लोगों के जहन में लगे जालों को साफ़ करने की क कामयाब कोशिश में जुटी हैं.वकार जे. खान के फोटोशूट में कामी सिद ने नफीस और पुर एतमाद अंदाज में अपने आपकोपेश किया और इस तरह वो पाकिस्तान की पहली ट्रांसजेंडर मॉडल बन गईं. इस फोटोशूट मेंफोटोग्राफर हसीब एम. सिद्दीकी रहे, मेकअप आर्टिस्ट निगहत मिस्बाह शामिल रहे. कामीकहती हैं कि जब फोटोग्राफर और उनके दोस्तवकार ने उन्हें शूट की पेशकश की तो वो इसके लिए मुकम्मल तैयार नहीं थीं. एक गैर यकीनी वाली हालत थी कि वो ये सब कैसे करसकती हैं. कामी ने कहा कि वो जानती हैं, ये न सिर्फ उनके लिए अपनी सलाहियतों कोसामने लाने का एक बेहतरीन मौका होगा बल्कि मॉडलिंग के जरिए वो सोसाइटी में अपनीबिरादरी को इज्जत के साथ पेश कर सकती हैं. अगर उन्हें मुख्तारा माई की तरह फैशनशूट्स और फैशन वीक्स में नुमाइंदगी का मौका मिला तो ज़रूर काम करेंगी. कामी कहतीहैं, 'ट्रांसजेंडर कम्युनिटी लंबे अरसे तक परदे में छिपकर रह चुकी. ट्रांसजेंडर कभीमेकअप करके गुज़ारा करते रहे तो कभी दूसरे काम. और कभी उन्हें के वस्तु ही समझा गया.मगर अब जरूरत इस बात की है कि हम सामने आएं और लोगों के सामने अपनी क़ाबलियत काइजहार करें.' कामी के इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़ने पर उनके घर वाले नाराज हैं.वो इस बात से खुश नहीं हैं कि कामी मॉडलिंग करे. कामी इसकी परवाह नही करतीं. खानदानकी हिमायत हासिल न होने के बावजूद उनकी ख्वाहिश है कि लोग उन्हें फैशन की दुनियामें देखें और उन्हें उनके काम से जानें. अभी तक मुझे लोग उन्हें ट्रांसजेंडरएक्टिविस्ट के तौर पर जानते हैं. लेकिन मॉडल बनकर वो ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंचबना सकती हैं. कामी कहती हैं, 'खौफ की आंखों में आंखें डाल कर किए जाने वाले हरतजुर्बे से इंसान ताकत, हौसला और यकीन हासिल करता है. इंसान खुद को ये कहने केकाबिल हो पाता है कि मैं ये कर गुज़रा और आगे भी जो होगा मैं उसका सामना कर लूंगा.'