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इस तस्वीर के पीछे की कहानी उनके दिमाग खोल देगी, जो IND-PAK मैच नहीं चाहते

इस बार लड़कियों के वर्ल्ड कप से तस्वीर आई है.

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4 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 4 जुलाई 2017, 07:09 AM IST)
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फोटो - thelallantop
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इंडिया वर्सेज़ पाकिस्तान. विमेन्स वर्ल्ड कप 2017. इंडिया और पाकिस्तान की लड़कियां आपस में भिड़ीं और इंडिया की टीम जीती. लड़कों की चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में इंडिया को पाकिस्तान से एक बड़ी हार मिली थी. कहा जाने लगा कि लड़कियों ने लड़कों की हार का बदला ले लिया है.
लेकिन इस पूरे इंडिया और पाकिस्तान के मैच के इर्द गिर्द काफी एक्स्ट्रा कैरिक्युलर एक्टिविटी भी हुई. हुआ ये कि इंडियन टीम पर ही सवाल उठा दिए गए कि आखिर वो पाकिस्तान से इन खराब हालातों में मैच खेल ही क्यूं रहे हैं. उन्हें सैनिकों के बारे में सोचना चाहिए जो सीमा पर खड़े हैं और वो जो शहीद हो गए. कोई न्यूज़ चैनल कह रहा था कि क्यूं नहीं क्रिकेट टीम अपकी कमाई सैनिकों के परिवार को भेज देती है? कोई तो मैच ही बॉयकॉट किये दे रहा था. उस दिन खबरें कुछ ऐसी आ रही थीं, "हम नहीं बताएंगे कि इंडिया ने टॉस जीत लिया है क्यूंकि हम मैच बॉयकॉट कर रहे हैं." वीरेंद्र सहवाग ने भी कहा कि इंडिया को मैच खेलना ही नहीं चाहिए लेकीन जब मैच हुआ तो वो कमेंट्री करने पहुंच गए. पहला मैच जब इंडिया ने जीता तो इंडिया को बाप कहा जाने लगा. अचानक ही भारत माता का लिंग परिवर्तित हो गया. तुरंत भारत बाप बन गया. बच्चा पाकिस्तान था. खैर...
जब ये सब कुछ ख़त्म हुआ तो 2 जुलाई को इंडिया और पाकिस्तान फिर से आमने सामने थे. इस बार विमेन्स वर्ल्ड कप में. लेकिन इस बार कोई हो हल्ला नहीं हुआ. किसी ने आवाज़ नहीं उठाई कि ये मैच नहीं होना चाहिए. मगर हां, जिसे बॉयकॉट करना था, उसने किया. मैच खतम हुआ तो एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई. पाकिस्तान की प्लेयर कायनात इम्तियाज़ ने इन्स्टाग्राम पर एक फ़ोटो शेयर की. उसमें उनके साथ इंडियन पेस बॉलर झूलन गोस्वामी खड़ी थीं. फ़ोटो के साथ कायनात ने एक कहानी सुनाई, "2005 में मैंने पहली बार इंडियन टीम को खेलते देखा था क्यूंकि उस साल एशिया कप पाकिस्तान में हुआ था. उस मैच में मैं बॉल-पिकर (बाउंड्री के पास बॉल उठाने वाले लोग) थी. मैंने वहां झूलन गोस्वामी को देखा था. उस वक़्त की सबसे तेज़ बॉलर. मैं इतनी इम्प्रेस हुई कि मैंने क्रिकेट को अपना करियर बनाने की ठान ली. खासकर फ़ास्ट बॉलिंग को. ये मेरे लिए गर्व की बात है कि 12 साल बाद 2017 में मैं अपनी इन्सपिरेशन के साथ खेल रही हूं और उनसे और प्रेरणा ले रही हूं."
बस यही क्रिकेट का हासिल है. यही खेलों का हासिल है. और यही सबक भी है कि हमें जितना ज़्यादा हो सके इन दोनों देशों के बीच सीरीज़ होनी चाहिए. ये ज़रूरी है कि इन दोनों देशों की टीमें आपस में मिलें, बोलें-बतियाएं, एक दूसरे के खिलाफ़ मैदान में उतरें और उसके बाद यूं ही दोस्त हो जायें. जिससे हुक्मरानों को मालूम पड़ सके कि देश में अब भी कुछ इंसान बचे हैं. सभी जानवरों में तब्दील नहीं हुए हैं जिन्हें दिन के हर घंटे में पड़ोसी देश के नक़्शे से मिट जाने के सपने आते हैं. और ऐसा नहीं है कि ये एकमात्र मौका है जहां ऐसी तस्वीर देखने को मिली है. 2016 के टी-20 एशिया कप की एक तस्वीर खूब वायरल हुई थी. इंडिया की बैट्सविमेन के पैर के जूते के फीते पाकिस्तान की प्लेयर बांध रही थी. और कुछ हज़रात हैं जो चाहते हैं कि मैच न हों. खेल न खेले जायें.
india vs pakistan

इसके अलावा लड़कों की टोली से भी अच्छी तस्वीरें आई थीं. उन्होंने भी ठीक यही बातें सोचने पर मजबूर किया जो बातें इन तस्वीरों को देखकर मन में आती हैं. नीचे धोनी की तस्वीर है, पाकिस्तानी कप्तान सरफ़राज़ के बेटे के साथ.




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