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जासूसी के लिए कबूतर इस्तेमाल कर रहा है पाकिस्तान!

पहले प्यार की पहली चिट्ठी भेजते थे कबूतर. सरहद पार वाले उन्हें मिसयूज कर रहे हैं!

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30 मई 2016 (अपडेटेड: 30 मई 2016, 02:16 PM IST)
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फोटो - thelallantop
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इंडिया-पाकिस्तान के बीच 'अमन की आशा' की बात की जाती है. एक तस्वीर नजर आती है. कबूतर उड़ते से नजर आते हैं. विजुअली दिमाग में जाता है कि प्यारे कबूतर दोनों मुल्कों के रिश्तों में अमन की मिठास घोल देंगे. लेकिन शायद पाकिस्तान को अमन की स्पेलिंग नहीं आती है. खबर है कि पाकिस्तान कबूतरों का इस्तेमाल इंडिया के खिलाफ जासूसी के काम में कर रहा है. बीते कुछ वक्त से बॉर्डर एरिया के आसपास ऐसे कबूतर मिल रहे हैं, जिनका इस्तेमाल जासूसी या स्मगलर्स का मैसेज इधर-उधर करने के लिए हो रहा है. कबूतरों के पास से कई बार कोड में लिखे मैसेज मिलते हैं. सुरक्षा एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं. और हां, ये जासूस कबूतर उड़ता पंजाब के इलाकों में मिल रहे हैं. गुरदासपुर बॉर्डर के पास वाला इलाका.
गुरदासपुर के चक्क अराइयां गांव के जसविंदर सिंह को अपने घर में जब कबूतर दिखा, तो वो उसके पास गए. कबूतर को जब पकड़ा, तब कबूतर के पंखों में उर्दू में लिखी एक मुहर लगी हुई थी. इस मुहर के साथ एक फोन नंबर 03024929685 लिखा हुआ था. ये बात जसविंदर सिंह के पल्ले नहीं पड़ी. चुनांचे पुलिस में शिकायत की.
पुलिस अधिकारियों ने कहा, 'कबूतर को लेकर जांच की जा रही है.' बता दें कि गुरदासपुर के बॉर्डर इलाके में ऐसे कबूतर मिलने का ये पहला मामला नहीं है. इंडो-पाक बॉर्डर बमियाल, दीनानगर में भी ऐसे ही कबूतर मिले हैं. रब्बा खैर करे. लेकिन यहां हमारे जावेद अख्तर साहेब कबूतरों, पंछियों और नदी को लेकर गाना लिख रहे हैं. 'पंछी, नदियां, पवन के झोंके... कोई सरहद न इन्हें रोके.' यानी हम पंछी नहीं रोक रहे हैं. इसका मतलब ये नहीं कि पंछियों का मिसयूज कर दिया जाए. फिर भी पाकिस्तान से दोस्ती चाहते हैं. मुहब्बत करते हैं. इसलिए ये गाना. कम लिखे को ज्यादा समझना. https://www.youtube.com/watch?v=Fw3meld4pPQ

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