पहाड़ों पर मिमियाता रहता है ISI का ये सबसे पुराना 'एजेंट'
और इसलिए ही 'बकरे' की मां पाकिस्तान में हमेशा खैर मनाएगी. क्योंकि एक नंबर का मारखोर है वो.
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फोटो - thelallantop
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बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी? ये लाइन ईद तक के लिए तो ठीक है. पर गुरु बकरे भी कई तरह के होते हैं. एक तो वही जिसे बकरीद पर रखकर काट देते हैं. दूसरा जो है, वो है थोड़ा जाबड़ सा. पहाड़ों पर रहता है. सांप देखते ही दबोच सकता है. चुटकी बजाते ही सांप को पेल सकता है. पर ठहरा एक नंबर का शाकाहारी, तो मारकाट से दूर ही रहता है. सांप न खाता है और न जनरली उसे मारता है. लेकिन ये सांप के जहर को खत्म कर सकता है. इस जंगली बकरे की प्रजाति का नाम है 'मारखोर'. और यही 'मारखोर' पाकिस्तान का नेशनल एनीमल है
मारखोर नाम अगर आपको अजीब लग रहा है, तो जान लीजिए. फारसी में Mar का मतलब होता है सांप. और खोर यानी खाने वाला. बोले तो 'सांप खाने वाला पहाड़ी जानवर'. मारखोर को लेकर कहावत भी है. अगर सांप अपने बिल से बाहर निकला है और उसे कुछ होता है तो कहते हैं इसके लिए मारखोर जिम्मेदार है. नेवले को छड्ड दिया जाए तो सांप से सबकी हवा खराब होती है. अब सोचिए कि जो सांप को भी डरा दे, वो कित्ता बड़ा वाला होगा.
अब बात हमारे सो कॉल्ड दुश्मन ISI की. शुद्धता का मार्का ISI नहीं, पाकिस्तान वाला ISI. हां वही जो आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड होता है. इसी मास्टरमाइंड ने अपने माइंड के नीचे लटके माथे पर लोगो चेपा हुआ है. उस लोगो में लोगों को दिखता है यही बकरा, मारखोर. अब लॉजिक तो बच्चे भी समझ ही गए होंगे, खुद के लिए जो सांप खतरा हैं उन्हें खोज निकालना. और खत्म कर देना. ये पाकिस्तान भी न, पूरा का पूरा सन्नी देओल की तरह फिल्मी निकला.
अब हम ज्यादा फुटेज तो खाएंगे नहीं, बस मारखोर के बारे में कुछ फैक्ट्स बताएंगे. जान लो सब यहीं. हम चार्ज कतई नहीं करेंगे.
1. पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा में चित्राल नेशनल पार्क में है. सबसे ज्यादा मारखोर इसी पार्क में पाए जाते हैं. सही भी है. नेशनल एनीमल है, इत्ता को बनता ही है. मारखोर की प्रजाति एस्टोर दुनिया में सबसे ज्यादा कहीं पाई जाती है तो वो यही जगह है.
2. ऐसा नहीं है कि मारखोर सिर्फ पाकिस्तान में पाया जाता है. इंडिया, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान में भी पाए जाते हैं. पर जालिम जमाना इंसानों के साथ मारखोर के भी पीछे पड़ा हुआ है. हंटिंग की वजह से मारखोर अब सिर्फ 2500 बचे हैं.
3. मारखोर की सींग 1.6 मीटर से भी लंबी होती है. मेल मारखोर के सींगों की लंबाई फीमेल वालों से छोटी होती हैं.
4. बकरा है तो मारखोर को हल्के में मत लीजिएगा. क्योंकि एकदम पहाड़ों पर चिपककर चल सकता है मारखोर. बिलकुल पर्वतारोही के माफिक.
5. मारखोर की हाइट करीब 102 cm और वजन करीब 104 किलो होता है. ये मारखोर जब कुछ खाता या चबाता है तो गिरता है झाग. वही झाग जब सूख जाता है, तो मालूम है इसका यूज किस काम में होता है. सांप का जहर काटने के लिए यूज होता है मारखोर का सूखा हुआ झाग.
अब हम ज्यादा फुटेज तो खाएंगे नहीं, बस मारखोर के बारे में कुछ फैक्ट्स बताएंगे. जान लो सब यहीं. हम चार्ज कतई नहीं करेंगे.
1. पाकिस्तान में खैबर पख्तूनख्वा में चित्राल नेशनल पार्क में है. सबसे ज्यादा मारखोर इसी पार्क में पाए जाते हैं. सही भी है. नेशनल एनीमल है, इत्ता को बनता ही है. मारखोर की प्रजाति एस्टोर दुनिया में सबसे ज्यादा कहीं पाई जाती है तो वो यही जगह है.
2. ऐसा नहीं है कि मारखोर सिर्फ पाकिस्तान में पाया जाता है. इंडिया, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान में भी पाए जाते हैं. पर जालिम जमाना इंसानों के साथ मारखोर के भी पीछे पड़ा हुआ है. हंटिंग की वजह से मारखोर अब सिर्फ 2500 बचे हैं.
3. मारखोर की सींग 1.6 मीटर से भी लंबी होती है. मेल मारखोर के सींगों की लंबाई फीमेल वालों से छोटी होती हैं.
4. बकरा है तो मारखोर को हल्के में मत लीजिएगा. क्योंकि एकदम पहाड़ों पर चिपककर चल सकता है मारखोर. बिलकुल पर्वतारोही के माफिक.
5. मारखोर की हाइट करीब 102 cm और वजन करीब 104 किलो होता है. ये मारखोर जब कुछ खाता या चबाता है तो गिरता है झाग. वही झाग जब सूख जाता है, तो मालूम है इसका यूज किस काम में होता है. सांप का जहर काटने के लिए यूज होता है मारखोर का सूखा हुआ झाग.

